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टूट की कगार पर खड़ी है समाजवादी पार्टी?
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
समाजवादी पार्टी में पारिवारिक विवाद अपने चरम पर पहुंच गया है. अखिलेश यादव को पार्टी अध्यक्ष बनाने की मुलायम सिंह को सलाह देने वाले विधायक उदयवीर सिंह को पार्टी ने शनिवार को बर्ख़ास्त कर दिया वहीं रविवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिवपाल सिंह यादव और उनके समर्थक मंत्रियों को मंत्रिमंडल से निकाल दिया.
निकाले गए मंत्री हैं- शिवपाल यादव, अंबिका चौधरी, नारद राय, शादाब फातिमा, ओमप्रकाश सिंह और गायत्री प्रजापति.
हालांकि इसके संकेत पहले ही मिल चुके थे. अखिलेश यादव ने सोमवार को बुलाई गई विधायक दल की बैठक से ठीक एक दिन पहले रविवार को विधायकों की बैठक बुलाई और वो भी तब जब शनिवार को सारे दिन दोनों पक्षों में सुलह कराए जाने की पुरजोर कोशिशें हो रही थीं.
रविवार सुबह ही रामगोपाल यादव की चिट्ठी ने इस प्रकरण में आग में घी का काम किया और फिर उसके बाद दोनों खेमे एक बार फिर आमने-सामने आ गए.
रविवार को सुबह से ही एक ओर मुख्यमंत्री आवास के बाहर बैठकें चल रही हैं और दूसरी ओर उसके पीछे ही बने विक्रमादित्य मार्ग पर स्थित पार्टी कार्यालय में भी पार्टी के सदस्यों को लेकर जोड़-तोड़ चल रही थी.
हालांकि विवाद को ख़त्म कराने की तमाम कोशिशें कई दिनों से जारी हैं.
मुलायम सिंह यादव के कथित विरोध के बावजूद विवाद के एक पक्ष शिवपाल सिंह यादव खुले तौर पर कह चुके हैं कि चुनाव जीतने पर अखिलेश यादव ही मुख्यमंत्री होंगे, बावजूद इसके उदयवीर के निष्कासन से साबित हो गया कि ये सब बातें ऊपरी हैं और अंदरखाने विवाद इतना गहरा हो गया है कि उसका सुलझना मुश्किल है.
वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मिश्र कहते हैं "अगले चौबीस घंटे पार्टी के लिए बेहद अहम हैं क्योंकि जो बातें सामने निकल कर आ रही हैं, उनसे साफ़ पता लग रहा है कि पार्टी अब दो खेमों में नहीं बँटी है, बल्कि पार्टी अब दो टुकड़ों में बँटने जा रही है."
वहीं तमाम पार्टी कार्यकर्ताओं के अंदर भी जिस तरह का असमंजस है, उससे यही लगता है कि पार्टी और परिवार में कलह का स्तर काफी ज़्यादा बढ़ गया है और इसका सुलझना मुश्किल है.
नई बात ये है कि अभी तक इस विवाद में एक ओर शिवपाल यादव और दूसरी ओर अखिलेश यादव दिख रहे थे लेकिन अब ये लड़ाई सीधे तौर पर मुलायम सिंह यादव बनाम अखिलेश की हो गई है.
समाजवादी पार्टी में दख़ल रखने वाले कुछ पर्यवेक्षकों ने तो दावे के साथ ये कहा है कि अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव नई पार्टी बना भी सकते हैं और इससे पहले वो विधान सभा भंग करने की सिफ़ारिश भी कर सकती हैं.
वहीं ये भी कहा जा रहा है कि सोमवार को विधायकों के साथ होने वाली बैठक में मुलायम सिंह यादव नेतृत्व की कमान ख़ुद ले सकते हैं और मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं.
बहरहाल, इस बीच ये चर्चा भी तेज़ी से चल रही है कि शिवपाल यादव ख़ुद ही पार्टी छोड़ दें और शायद इससे सुलह का कोई नया रास्ता निकल आए. लेकिन जानकारों का कहना है कि उदयवीर सिंह कि चिट्ठी में जिस तरह से मुलायम सिंह यादव के बेहद निजी पारिवारिक मामलों को उठाया गया है और उदयवीर सिंह को अखिलेश यादव का जितना क़रीबी समझा जाता है, उसे देखते हुए मुलायम और अखिलेश में सुलह होना बड़ा मुश्किल है.
इन मतभेदों के बारे में समाजवादी पार्टी के नेता खुलकर बोल भी नहीं रहे हैं. हालांकि पार्टी प्रवक्ता अशोक वाजपेयी ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि पिता-पुत्र के बीच जो भी चल रहा है वो ठीक नहीं है लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि सब कुछ ठीक हो जाएगा.
बहरहाल शनिवार से ही ये चर्चाएं तेज़ हैं कि पार्टी में बड़े फ़ैसले हो सकते हैं. रविवार को अखिलेश यादव ने विधायकों के साथ बैठक की और बड़ा फ़ैसला लिया. अब सोमवार को मुलायम सिंह के साथ विधायकों की बैठक है, उसमें क्या फ़ैसला होता है, इसे लेकर क़यास जारी हैं.
इस बीच, ये भी कहा जा रहा है कि बड़ा फ़ैसला इस बैठक से पहले भी आ सकता है.
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