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'बच्चा वापस दे दो, मैं वापस चली जाऊंगी'
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि वो गायब हुए छात्र नजीब अहमद की ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं. इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और सीबीआई से भी मदद की गुहार लगाई गई है.
मामला 14 अक्टूबर की रात माही मांडवी हॉस्टल का है जब रिपोर्टों के मुताबिक कुछ छात्रों के बीच झड़प हुई जिसके बाद से नजीब लापता हैं.
बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने नजीब अहमद की मां फ़ातिमा नफ़ीस से बात की.
सुनिए उनकी आपबीती उन्हीं की ज़ुबानी.
मेरा बच्चा मुझे चाहिए. मेरी हालत बहुत ख़राब है. मैं तो बात करने की स्थिति में भी नहीं हूँ. मेरा बच्चा बहुत नेक, भोला, शरीफ़ और सीधा है और उसे पढ़ाई के अलावा किसी बात से कोई मतलब नहीं है.
वो कैसा है इसकी पुष्टि आप उसके सहपाठियों और स्टाफ़ से कर सकते हैं.
मैंने सोमवार को पुलिस को शिकायत तो दी है लेकिन पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है. परसों के अलावा पुलिस ने मुझसे कोई बात भी नहीं की है. उन्होंने सिर्फ़ मेरा बयान दर्ज किया है.
मुझे तो ये भी नहीं पता कि मेरे बेटे ने खाना खाया है या नहीं या उसे कहां-कहां चोट लगी है.
मेरी अपने बेटे से आख़िरी बार बात शनिवार को हुई थी, लगभग सुबह 11 बजे.
घटना के बाद उसने मुझे फ़ोन करके बताया तो मैं घर से यहां के लिए निकल पड़ी.
उसने अस्पताल से मुझे फ़ोन करके बताया था कि उसे सफ़दरजंग अस्पताल मेडिकल जाँच कराने के लिए लाया गया है.
वो फ़ोन पर रोते हुए कह रहा था कि मुझे आपके पास आना है.
मैं तुरंत अपने घर से चल पड़ी, आनंद विहार बस स्टैंड पहुँचकर मैंने उसे फ़ोन किया था.
जब मैं उसके कमरे में पहुँची तो उसकी चप्पल वहां पड़ी थी, सामान इधर उधर पड़ा था.
हमने बहुत संघर्ष करके नजीब को जेएनयू पढ़ने के लिए भेजा है. मेरे शौहर दिल के मरीज़ हैं, वो तो यहां आ भी नहीं पाए.
मेरा बेटा पढ़ाई में अच्छा था तब ही वो जेएनयू पहुँच पाया. अभी हमारे ख़ानदान में कोई इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी में नहीं पहुँचा था.
हमारा कोई नहीं है, हम बहुत छोटी जगह से हैं. मेरा बेटा यहां पढ़ने लिखने आया था.
उसने जामिया में दाख़िला रद्द कराकर जेएनयू में कराया था.
मेरा बेटा मुझे वापस करा दीजिए, मैं उसे जेएनयू से लेकर घर चली जाउंगी.
जिन लड़कों ने मेरे बेटे से मारपीट की है मैंने उनके नाम से रिपोर्ट दर्ज करवाई है लेकिन पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है.
मेरा बेटा जहां भी है, उसे मुझे दिया जाए मैं उसे लेकर वापस चली जाउंगी.
जेएनयू विश्वविद्यायल का पक्ष
जेएनयू ने एक बयान में कहा है कि वो 14 अक्टूबर की घटना को निपटाने के लिए पूरे प्रयास कर रही है और सभी अधिकारियों से कहा गया है कि वो गायब हुए छात्र नजीब अहमद को ढूंढने में पूरी मदद करें.
जेएनयू ने कहा कि उन्होंने जांच के लिए दिल्ली पुलिस की मदद ली है और प्रशासन पुलिस के संपर्क में है.
पुलिस में आईपीसी 365 के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया है और जांच की जा रही है. साथ ही केंद्रीय एजेंसीज़ जैसे नेशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो और सीबीआई की मदद ली जा रही है.
जेएनयू ने वक्तव्य में कहा है कि उसने मामले के निपटारे के लिए विभिन्न छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत की है और घटना की जांच के लिए प्रोक्टोरल जांच की शुरुआत भी की गई है.
प्रशासन ने कहा, "जेएनयू प्रशासन नजीब अहमद की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित है और उन्हें ढूंढने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं."