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बंगाल में जुलूस और विसर्जन पर तनातनी जारी
- Author, पीएम तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा और मुहर्रम ख़त्म हो गए हैं लेकिन जुलूस और मूर्ति विसर्जन पर तनाव जारी है.
भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के कई जिलों में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच पिछले हफ्ते हुई हिंसक झड़पों के विरोध में सोमवार को प्रदर्शन किया है.
पश्चिम बंगाल के कम से कम चार जिलों में प्रदर्शन के बाद पार्टी ने इन घटनाओं पर केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट भी भेजी है.
दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन और मुहर्रम का जुलूस निकालने के मुद्दे पर विभिन्न स्थानों पर दोनों समुदायों के बीच हिंसक झड़प की खबरें आई हैं.
कोलकाता से सटे उत्तर 24-परगना जिले के हाजीनगर के अलावा मालदा का चांचल, पश्चिम मेदिनीपुर जिले का खड़गपुर और हुगली जिले का चंदननगर इलाका भी शामिल है.
हाजीनगर में तो अल्पसंख्यक तबके के लोगों पर इलाके के हिंदू मोहल्ले के घरों में घुस कर मार-पीट और लूटपाट के आरोप लगे हैं.
इन झड़पों पर अंकुश लगाने के लिए कई जगह धारा 144 लागू किया गया था.
इन घटनाओं को मीडिया में खास कवरेज नहीं मिली है. ऐसा इसलिए क्योंकि पूजा के चार दिनों तक बंगाल के अखबार बंद रहे और टीवी चैनल भी पूजा दिखाने में ही जुटे रहे.
विपक्षी माकपा और कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की खुशामद की राजनीति की वजह से ही संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं.
दरअसल सरकार ने दशमी के दिन शाम चार बजे के बाद दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन पर रोक लगा दी थी. अगले दिन मुहर्रम था.
हालांकि कोलकाता हाई कोर्ट ने इस फैसले को अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण का प्रयास बताते हुए खारिज कर दिया था. लेकिन उसके बाद से राज्य के विभिन्न स्थानों से दोनों समुदायों के बीच झड़प की खबरें आ रही हैं.
प्रदेश भाजपा के सचिव सायंतन बसु कहते हैं, "विभिन्न स्थानों पर दोनों तबके के बीच झड़पें हुई हैं. मुख्यमंत्री की खुशामद की राजनीति ही इसके लिए जिम्मेदार है."
बसु अपने समर्थन में कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हैं. वे कहते हैं कि पार्टी ने ऐसी विभिन्न घटनाओं की रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजकर कार्रवाई की अपील की है.
विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान और माकपा विधायक सुजन चक्रवर्ती की अगुवाई में हाजीनगर जा रहे प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने रविवार को हाजीनगर नहीं जाने दिया.
सुजन चक्रवर्ती का दावा है, "अल्पसंख्यकों के अत्याचार के चलते इलाके के लगभग दो हजार लोग अपने घरों से फरार हो गए हैं."
उनका आरोप है कि मामला अल्पसंख्यकों से जुड़ा होने और इस तबके के प्रति सरकार के रवैए की वजह से पुलिस और प्रशासन ने भी चुप्पी साध रखी है.
माकपा नेता का कहना है, "सांप्रदायिक संघर्ष की यह घटनाएं तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच गोपनीय साठ-गांठ का नतीजा हैं."
दूसरी ओर, पुलिस ने इसे एक मामूली विवाद बताते हुए इलाके में परिस्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया है.
आईजी (कानून व व्यवस्था) अनुज शर्मा कहते हैं, "अब तक इन झड़पों में किसी के घायल होने की खबर नहीं है. हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं. दुर्गा पूजा और मुहर्रम शांतिपूर्ण रहने का दावा करते हुए पुलिस ने लोगों से सोशल मीडिया पर दो संप्रदायों के बीच तनाव और हिंसक झड़प की अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है."
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर राज्य के विभिन्न स्थानों पर दोनों तबके के बीच हिंसक संघर्ष की अफवाहें फैलाई जा रही हैं. इससे संबंधित कई वीडियो भी पोस्ट किए जा रहे हैं.
दरअसल भाजपा से जुड़े हिंदू संहति नाम के एक संगठन ने ऐसी कई खबरों और तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था.