मरा जानवर नहीं उठाने पर गर्भवती दलित महिला की पिटाई

    • Author, प्रशांत दयाल
    • पदनाम, अहमदाबाद से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

गुजरात के बनासकांठा जिले के एक गांव में मरा हुआ जानवर उठाने से मना करने पर दलित परिवार की पिटाई का एक मामला अमीरगढ पुलिस थाने में दर्ज हुआ है.

मोटा करजा गांव की इस घटना में एक गर्भवती महिला सहित दो महिलाओं को इलाज के लिए पालनपुर सिविल हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है.

बनासकांठा पुलिस अधीक्षक नीरज बडगुजर ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बीबीसी को बताया कि पुलिस ने छह अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है.

दलित परिवार के मुखिया नीलेश राणावासिया की थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार ये मामला कुछ इस तरह है.

नीलेश और उनका परिवार मजदूरी करता है. पहले वे गांव के मरे जानवर और गटर की सफाई का काम भी करते थे. लेकिन अब वे यह काम करना नहीं चाहते.

23 सितंबर को गांव के कुछ ऊंची जाति के लोगों ने आकर कहा कि कुछ जानवर मर गए हैं, आप आकर उसे ले जाएं. नीलेश ने ऐसा करने से मना कर दिया.

कुछ ही मिनटों में कई हथियारबंद लोग उनके घर में घुस आए. अपमानजनक भाषा बोलते हुए वे घर की महिला समेत सभी की पिटाई करने लगे.

उत्तर गुजरात के दलित नेता कौशीर परमार ने बीबीसी को बताया कि हमलावरों ने नीलेश की गभर्वती पत्नी संगीता ओर बुजुर्ग मां को भी नहीं छोड़ा. वे सबको बुरी तरह जख़्मी करके चले गए.

परमार बताते हैं कि गुजरात में दलितों ने मरे जानवरों को उठाने या गटर साफ करने का काम बंद कर दिया है.

वे कहते हैं कि 11 जुलाई को गुजरात के उना में दलितों की पिटाई की घटना के बाद पूरा दलित समुदाय नाराज है. लेकिन दलितों का सामाजिक बहिष्कार भी किया जा रहा है.

बनासकांठा के पुलीस अधीक्षक नीरज बडगुजर ने बीबीसी को बताया की छह अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले की जांच डीएसपी को सौंप दी गई है. साथ ही, पीड़ित दलित परिवार को सुरक्षा भी दी गई है.

फिलहाल गर्भवती महिला संगीता का पालनपुर हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है. वहां भी पुलिस सुरक्षा की व्यवस्था की गई है.

बडगुजर ने बताया कि उन्होंने दलित परिवारों को आश्वासन भी दिया है कि वे जो काम करना नहीं चाहते उनसे वो काम जबरन नहीं करवाया जाएगा.

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