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केरल में सम्मेलन से भाजपा को क्या हासिल?
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब केरल में पाकिस्तान और उड़ी हमले पर बोले तो उनके तेवर तो आक्रामक दिखे लेकिन बात उन्होंने की ग़रीबी और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ युद्ध की.
केरल के कोझिकोड में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में कई प्रस्ताव पास किए गए और प्रधानमंत्री ने एक आमसभा को भी संबोधित किया.
भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी में सेना के शिविर हुए हमले के बाद प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के आवाम को संबोधित करते हुए ग़रीबी और बेरोजगारी ख़त्म करने की बात कही.
प्रधानमंत्री के भाषण और भाजपा राष्ट्रीय कार्यकरिणी की बैठक पर वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कौशल का विश्लेषण-
"पाकिस्तान को लेकर भाजपा उहापोह की स्थिति में दिखाई दी. यह तय कर पाना मुश्किल था कि पाकिस्तान को लेकर वह उदार भाषा बोलना चाह रही है या आक्रामक.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के लोगों को राष्ट्रवाद की घुट्टी पिलाई जाती है. ऐसे में लोगों को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री अपने भाषण में आक्रामक भाषा में युद्ध की बात करेंगे.
लेकिन उन्होंने ग़रीबी और बेरोजगारी के खिलाफ युद्ध की बात की. इससे कई लोगों को बहुत निराशा हुई.
भाषण के दौरान प्रधानमंत्री की भाषा तो आक्रामक थी, लेकिन उन्होंने बातें नरम ही की हैं. इससे कई लोगों को जो निराशा हुई, वही भाजपा की दुविधा का कारण है.
उत्तर प्रदेश के चुनाव को लेकर भाजपा में कई लोग ध्रुवीकरण चाहते हैं. भाजपा चाहती है कि हिंदू उसके पक्ष में लामबंद हो जाएं.
वहीं उसकी चिंता यह भी है कि इससे मुसलमान भी उसके खिलाफ लामबंद होंगे. इससे बचने के लिए प्रधानमंत्री ने भाषण में मुसलमानों की बात की जिससे पार्टी थोड़ी उदार दिखे.
यह बैठक पार्टी के पूर्व अध्यक्ष पंडित दीन दयाल उपाध्याय के नाम से आयोजित की गई.
इसके ज़रिए भाजपा ने दो संदेश देने की कोशिश की.
एक तो यह कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय उत्तर प्रदेश के थे और जाति के ब्राह्मण थे. इस पहचान के ज़रिए उत्तर प्रदेश के लोगों और ख़ासकर ब्राह्मणों को संदेश देने की कोशिश की गई जहां कुछ ही महीने में चुनाव होने हैं.
दूसरी बात यह कि पंडित जी की राजनीति में अंत्योदय का एक महत्वपूर्ण स्थान था. वो चाहते थे कि सामाजिक रूप से कमज़ोर लोगों के उत्थान के लिए पार्टी अपनी प्रतिबद्धता जताए.
बैठक में भाजपा ने जो प्रस्ताव पारित किए, वो पंडित दीन दयाल उपाध्याय के इन विचारों पर ही आधारित हैं.
केरल में यह बैठक आयोजित करने का एक ख़ास मकसद था.
इस दक्षिणी राज्य में कार्यकर्ताओं की अच्छी खासी संख्या होने के बाद भी भाजपा को ख़ास चुनावी सफलता अभी तक नहीं मिली है. पिछले विधानसभा चुनावों में ही भाजपा ने केरल में अपनी पहली सीट जीती है.
इस बैठक के ज़रिए भाजपा का प्रयास अपने कार्यकर्ताओं में जान फूंकने का था. प्रधानमंत्री के भाषण से पार्टी कार्यकर्ताओं को मज़बूती ज़रूर मिली होगी.
महत्वपूर्ण बात यह है कि कोरा राष्ट्रवाद भाजपा के लिए पर्याप्त नहीं है. हाल के दिनों में विपक्षी दलों ने बार-बार यह जताने और इसका प्रचार करने की कोशिश की है कि भाजपा कमज़ोर वर्ग के लोगों के खिलाफ़ है, अल्पसंख्यकों के खिलाफ़ है.
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जिस तरह सामाजिक असमानता, बेरोज़गारी और भेदभाव के खिलाफ बात की और पार्टी की बैठक में जो प्रस्ताव पारित किए, उससे भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को इन विषयों पर ही संदेश देने में सफल हुई है.
(वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कौशल की बीबीसी संवाददाता वात्सल्य रायसे बातचीत पर आधारित)