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सेना पर भरोसा है, ऐसी हर कोशिश को नाकाम करेगी: मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें अपनी सेना पर भरोसा है और वो अपने पराक्रम से हर ऐसी (उड़ी जैसी) कोशिश को नाकाम कर देगी.
उन्होंने कहा, "दोषी सज़ा पाकर ही रहेंगे. सेना बोलती नहीं, पराक्रम करती है."
प्रधानमंत्री रविवार को आकाशवाणी पर 'मन की बात' के ज़रिए देश को संबोधित कर रहे थे. ये उनका 24वां संबोधन है.
उन्होंने 'मन की बात' में कश्मीर, उड़ी हमला, पैरालंपिक, सोशल मीडिया आदि कई मसलों पर अपनी बात रखी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "कश्मीर के नागरिक देश विरोधी ताकतों को समझने लगे हैं. वो ऐसे तत्वों से अलग होकर शांति की राह पर चल पड़े हैं. हम जानते हैं शांति सद्भावना ही विकास का रास्ता है. कश्मीर के नागरिकों की सुरक्षा शासन की ज़िम्मेदारी है. सुरक्षा बल भी क़ानून नियमों का इस्तेमाल कश्मीर के लोगों की ज़िंदगी में सुख-चैन लाने के लिए करें."
मोदी ने 'मन की बात' के दौरान बताया- "एक दिन हर्षवर्धन नाम के बालक ने लिखा कि उड़ी के बाद मैं विचलित था, कुछ कर गुज़रने की लालसा थी. मैंने संकल्प किया कि रोज़ तीन घंटे ज़्यादा पढ़ाई करूंगा."
उड़ी चरमपंथी हमले के बाद देश के नागरिकों की बात करते हुए मोदी ने कहा कि लोगों के मन में आक्रोश है, जो राष्ट्र की चेतना का प्रतीक है.
उन्होंने कहा- "जब 1965 की लड़ाई हुई तो पूरे देश में आक्रोश था, देशभक्ति का भाव था. तब लालबहादुर शास्त्री ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया था. सेना अपनी ज़िम्मेदारी निभाए, हम भी रचनात्मक योगदान दें, तो देश नई ऊंचाई को छुएगा."
नरेंद्र मोदी ने पैरालिंपिक्स का ज़िक्र करते हुए कहा, "इन खेलों ने और हमारे खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने दिव्यांग के प्रति रवैया बदल दिया है. विजेता बहन दीपा मलिक ने कहा कि इससे मैंने विकलांगता को परास्त कर दिया. "
उन्होंने गांधी जयंती की बात करते हुए कहा कि दो अक्तूबर को खादी का कुछ ज़रूर खरीदें जिससे ग़रीब के घर की भी रोजी-रोटी चल सके.