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'भारत-पाकिस्तान में जंग की आशंका नहीं'
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारतीय वायुसेना के एयर वाइस मार्शल (रिटायर्ड) कपिल काक मानते हैं कि भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी में हुए चरमपंथी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ से सख्त बयान आएंगे लेकिन फिलहाल दोनों देशों के बीच युद्ध की कोई संभावना नहीं है.
एयर वाइस मार्शल (रिटायर्ड) काक ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा, "तनाव की जो स्थिति बनी हुई है, उसे बरकरार रखने में किसी देश का फायदा नहीं है."
उड़ी में रविवार सुबह सेना के कैंप पर हुए हमले में भारतीय सेना के 17 सैनिक मारे गए. सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में चार संदिग्ध चरमपंथियों की भी मौत हुई.
कपिल काक का कहना है कि भारत और पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि जंग जैसी स्थिति में पहुंचने के बाद दोनों देशों के रिश्ते मज़बूत होते रहे हैं.
काक याद दिलाते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच साल 2001 में भी युद्ध की स्थिति बन गई थी.
वो कहते हैं, "उस वक्त एक युद्ध होने वाला था. तब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे. साल 2002 से 2007 के बीच उस स्थिति से भारत और पाकिस्तान के रिश्तों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ़ की काफी भूमिका थी."
काक के मुताबिक, "जब वाजपेयी हट गए तब साल 2004 से 2007 तक मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे. उनके साथ बैक चैनल डिप्लोमेसी पर काम होता रहा."
काक कहते हैं, "इसमें शक नहीं है कि पाकितान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ संयुक्त राष्ट्र महासभा जाएंगे तो वहां उनका रुख़ सख्त होगा. भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी सख्त रुख़ अपनाएंगी. दोनों नेताओं को ये मुद्दा इस तरह आगे बढ़ाना होगा कि रिश्तों में बना तनाव जारी न रहे."
वो मानते हैं कि तनाव में कमी आना ज़रूरी है जिससे आगे बातचीत की सहूलियत बन सके.
हालांकि वो ये भी कहते हैं कि आने वाले चुनावों को देखते हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मौजूदा स्थिति चुनौतीभरी है.
काक कहते हैं, "उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं. मोदी चाहते हैं कि वहां उनकी स्थिति मजबूत हो. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी उनके लिए काफी चुनौती पेश कर सकती हैं. स्थिति मुश्किल है."
काक कहते हैं कि अगले 24 से 48 घंटे के बीच दोनों पक्ष सख्त रुख़ अपनाएंगे. पाकिस्तान से जो बयान आएंगे वो बहुत अहमियत रखते हैं.
वे कहते हैं, ''पाकिस्तान पर जिम्मेदारी है कि वो स्थिति को और ज्यादा ख़राब न करे. युद्ध न भारत के हित में है न कश्मीरियों के और न ही पाकिस्तान के.''
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