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मशहूर पेंटर मंजीत बावा का निधन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मशहूर पेंटर मंजीत बावा का सोमवार की सुबह लंबी बीमारी के बाद दिल्ली में निधन हो गया. वे 67 वर्ष के थे. पंजाब के धुरी में वर्ष 1941 में जन्मे मंजीत बावा पिछले तीन वर्षों से कोमा में थे. अपने चित्रों में लाल और बैगनी जैसे भारतीय रंगों का विशेष इस्तेमाल करने वाले बावा के चित्रों में सूफ़ी रहस्यवाद और प्रकृति के अनेक रंग मिलते हैं. भारतीय पौराणिक कथाओं को नए ढंग से उन्होंने अपनी चित्रों में प्रस्तुत किया है. पशु-पक्षी, राधा-कृष्ण और बच्चे उनकी पेंटिग में बार बार आते हैं. चर्चा कुत्तों से घिरे भगवान कृष्ण की बांसुरी बजाती हुई उनकी पेंटिंग काफ़ी चर्चित रही है. मंजीत बावा सूफ़ी गायन और दर्शन में अपनी विशेष रुचि के लिए भी जाने जाते थे. उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ़ आर्ट और ब्रिटेन से पेंटिग की विधिवत शिक्षा पाई जिसके बाद उन्होने लंदन में सिल्क स्क्रीन पेंटर के तौर पर अपना करियर शुरू किया. चर्चित पेंटर जतिन दास ने मंजीत बावा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए बीबीसी को बताया कि भारतीय चित्रकला के क्षेत्र में मंजीत बावा का अपना एक अलग अंदाज़ था. उन्होंने कहा, "मंजीत मेरे ख़ास दोस्त थे. यह बहुत दुख की बात है कि हमने एक बेहतरीन कलाकार को खो दिया है." |
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