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बुकर की दौड़ में चार एशियाई लेखक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वर्ष 2008 के बुकर पुरस्कारों की दौड़ में शामिल 13 किताबों की सूची जारी की गई है जिसमें दक्षिण एशियाई मूल के चार लेखक शामिल हैं. इस बार की 'लॉन्ग लिस्ट' में सलमान रुश्दी एक बार फिर शामिल हैं जिन्हें उनकी किताब 'एनचैंट्रीज़ ऑफ़ फ्लोरेंस' के लिए बुकर पुरस्कार मिल सकता है. तीन अन्य दक्षिण एशियाई नाम हैं, मोहम्मद हनीफ़, अमिताभ घोष और अरविंद अडिगा. पेशे से पत्रकार मोहम्मद हनीफ़ बीबीसी की उर्दू सेवा के प्रमुख रहे हैं और उनका पहला उपन्यास 'ए केस ऑफ़ एक्सप्लोडिंग मैंगोज़' बहुत चर्चित रहा है. इस उपन्यास में मोहम्मद हनीफ़ ने पाकिस्तान के सैनिक शासक ज़िया उल हक़ की मौत के रहस्यों पर दिलचस्प तरीक़े से क़िस्सागोई की है. अमिताभ घोष की शोधपरक किताब 'सी ऑफ़ पॉपीज़' में उन्होंने काफ़ी रोचक तरीक़े से साबित किया है कि अफ़ीम किस तरह ब्रितानी साम्राज्य की बुनियादी ताक़त था. अरविंद अडिगा की किताब 'द व्हाइट टाइगर' एक ग़रीब हलवाई बलराम की कहानी है जो अपने ही तरीक़े से दुनिया को देखता है. कुल 112 किताबों में से इन 13 को चुना गया है, सितंबर महीने में शॉर्ट लिस्ट जारी की जाएगी जिसमें छह किताबें चुनी जाएंगी, अक्तूबर महीने में विजेता की घोषणा की जाएगी. लौंग लिस्ट में चुने गए 13 लेखकों में से ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड और ब्रिटेन के लेखक भी शामिल हैं. |
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