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'कॉमेडी में टाइमिंग ग़लत तो सब चौपट' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कहते हैं कि लोगों को हँसाना बहुत मुश्किल काम है. ये बात फ़िल्मों में काम करने वाले उन हास्य अभिनेताओं से बेहतर कौन समझ सकता है जो फ़िल्मों के ज़रिए बार-बार और लगातार दर्शकों को हँसाते, गुदगुदाते हैं. और अगर किसी महफ़िल में दो कॉमेडियन एक साथ हों तो कहना ही क्या. हाल में ही लंदन में बीबीसी को हिंदी फ़िल्मों के दो हास्य अभिनेताओं से एक साथ मुलाक़ात करने और बात करने का मौका मिला- राजपाल यादव और रज़्ज़ाक खान. राजपाल यादव ने पिछले कुछ वर्षों में हंगामा, भागमभाग और फिर हेरा फेरी जैसी कॉमेडी फ़िल्मों में काम किया है वहीं रज़्ज़ाक खान ने भी इश्क, बड़े मियाँ छोटे मियाँ और हसीना मान जाएगी समेत कई फ़िल्मों में यादगार हास्य किरदार निभाएँ हैं. पेश है राजपाल यादव और रज़्ज़ाक ख़ान से बातचीत के मुख्य अंश: आजकल किन फ़िल्मों पर काम चल रहा है. राजपाल यादव- कई फ़िल्में हैं, पाँच-छह में मुख्य किरदार है और पाँच छह में सहायक रोल है. सब अलग-अलग तरह के रोल हैं. बतौर अभिनेता मैं चाहता हूँ कि अलग-अलग भूमिकाएँ मिलें-गंभीर हो, निगेटिव हों, कॉमिक हों. मुझे कोई दिक्कत नहीं है. ऐसे रोल मिल रहे हैं इसलिए मैं बहुत खुश हूँ. फ़िल्म उद्योग चुनौतीपूर्ण रोल दे रहा है, मेरे लिए तो अच्छा ही है. रज़्ज़ाक खान- हम दोनों की साथ में पाँच-छह फ़िल्में भी तैयार हो गई हैं-चल चला चल, रामा क्या है ड्रामा, मस्ती एक्सप्रेस. आप दोनों को लोग कॉमेडी के लिए जानते हैं...कोई कॉमेडी किंग की संज्ञा देता है.. कैसा लगता है. राजपाल यादव- पहले तो ये कि अगर कॉमेडी किंग की बात होगी तो मैं रज़्जा़क भाई का नाम पहले लेना चाहूँगा. और दूसरा ये कि मैं किंग की अवधारणा को नहीं मानता. लोगों का प्यार मिलता है यही सबसे बड़ी बात है. इस क्रिएटिव फ़ील्ड में आप किसी को किंग नहीं बोल सकते और किसी को रंक नहीं क्योंकि जो आपको छह दिखता है वो दूसरी तरफ़ से किसी को नौ दिखता है.
रज़्ज़ाक खान - ये किंग की संज्ञा देकर तो आप एक बोझा लाद रहे हो. कौन किंग, काहे का किंग. लोग पसंद करते हैं बहुत बड़ी बात है और प्रोड्यूसर पैसा देता है इज़्ज़त देता है ये उससे भी बड़ी बात है. काम की वजह से ही तारीफ़ मिलती है. किंग का लेबल मिलने से तो समझो पैक-अप है. बार-बार लगातार हर फ़िल्म में लोगों को हँसाना आपके लिए कितना मुश्किल या आसान होता है. कभी मन में आशंका नहीं रहती है कि अगर कोई डायलॉग बोला या कॉमिक सीन किया और लोगों को हँसी नहीं आई? राजपाल यादव- अगर असल बात बताऊँ तो मैं समझता हूँ कि हम लोगों ने कभी कॉमेडी की ही नहीं. जिस दिन हम कॉमेडी करने की सोच लेंगे उस दिन कैरिकेचर होगा, कॉमेडी नहीं होगी. मैं कभी ये नहीं सोचता कि मैं हास्य कलाकार हूँ या कुछ और. अभिनेता का काम होता है निर्देशक के सामने पूरी तरह से आत्मसमर्पण करना. वो निगेटिव रोल है या कॉमेडियन का है, वो आप सब तय करें. मैने तो हमेशा चरित्र को जीने की कोशिश की है बस. रज़्ज़ाक खान - हम लोग एक्टर हैं, कोई स्टैंड-अप कॉमेडियन नहीं है. निर्देशक हमें जो सीन देता है,उसका आनंद उठाते हुए हम लोगों को हँसाने की कोशिश करते हैं.कागज़ पर जो लिखा है उसे अपने अभिनय से और बेहतर करने की कोशिश होती है. अच्छी कॉमेडी क्या है आपके लिए? राजपाल यादव- कॉमेडी में अगर टाइमिंग ग़लत है तो ज़ीरो अगर सही टाइमिंग तो पूरे 100 अंक मिलते हैं. यहाँ 33 फ़ीसदी नहीं मिलते हैं. तो इस सही टाइमिंग का कोई राज़ या गुर होता है. राजपाल यादव- ऐसा कोई राज़ नहीं है....बस ईमानदारी से काम करते हैं, दिल से. रज़्ज़ाक खान - कॉमिक टाइमिंग ऊपरवाला देता है. वो आपको फ़नी बोन दे देता है. आपको भी नहीं पता चलता कि आपने क्या बोला, पर वो टाइमिंग सही हो जाती है. इनदिनों टेलीवीज़न पर कॉमेडी शो की मानो भरमार है. उनके स्तर के बारे में क्या कहेंगे. राजापल यादव- ये कार्यक्रम बहुत अच्छे हैं. मैने पहले भी कहा कि क्रिएटिव फ़ील्ड में आप किसी को चुनौती नहीं दे सकते. ये कोई खेल नहीं है. कॉमेडी से आप खिलवाड़ कर ही नहीं सकते. कॉमेडी से खिलवाड़ करोगे तो वो भौंडी कॉमेडी लगेगी. रज़्ज़ाक खान - सबसे बड़ी बात ये है कि कॉमेडी शो पर आने वाले ये लोग आपका मनोरंजन कर रहे हैं. ये फ़ुल टाइम जॉब है- कॉमेडी करना बहुत गंभीर काम है. लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि इनमें से कई शो ऐसे हैं जिन्होंने कॉमेडी को मानो मज़ाक बना दिया है. राजपाल यादव- नहीं नहीं मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ. स्टैंड-अप कॉमेडी के लिए कितने लोगों को ब्रेक मिला है इन शो के ज़रिए. मैं तो सबको बधाई देता हूँ. कितने ही ऐसे लोगों को मौका मिला है जिनमें दर्शकों को हँसाने की क़ाबिलियत है और उनके चूल्हे जल सकते हैं. मैं हमेशा से ये मानता आया हूँ कि ईमानदारी से किसी भी काम को करने में चूल्हे अगर जलें तो उस चीज़ का स्वागत है. रज़्ज़ाक खान-देखिए हर चीज़ का बूम आता है. मेरे हिसाब से तो ये शो एक उपलब्धि की तरह हैं. आप खड़े-खड़े हज़ार लोगों को हँसा रहे हो,मामूली बात नहीं है. अच्छा आप लोग एक साथ कई फ़िल्मों में काम करते हैं- कई तरह की भूमिकाएँ होती हैं .काम करने की ऊर्जा कहाँ से मिलती है. राजपाल यादव - दर्शकों से तारीफ़ मिलती है , प्यार मिलता है यही प्रेरणा है . हमारे लिए हर फ़िल्म एक परीक्षा की तरह है. अच्छे नंबर मिलेंगे तो फिर आगे अच्छी फ़िल्में मिलेंगी. और इसके लिए हमारे जज वो लोग हैं जो अपना बहुमूल्य समय और पैसा लगाकर सिनेमा हॉल में फ़िल्में देखते हैं . रज़्ज़ाक खान - अंत में दर्शक संतुष्ट होना चाहिए हमारे काम से बस. | इससे जुड़ी ख़बरें अब भोजपुरी में हंसाएँगे जॉनी लीवर19 जून, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'चार्ली चैपलिन हैं मेरे प्रेरणा स्रोत'09 जून, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'कॉमेडी फ़िल्में भी करना चाहता हूँ'07 नवंबर, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस कठिन भूमिका का इंतज़ार: राजपाल यादव27 अक्तूबर, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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