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न्यूयॉर्क में पेन वर्ल्ड वॉयसेज़ साहित्य उत्सव | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के शहर न्यूयॉर्क में अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव चल रहा है. इसमें सलमान रश्दी और झुम्पा लाहिड़ी समेत दुनिया भर के देशों से आए लेखकों का जमावड़ा लगा है. पेन वर्ल्ड वॉयसेज़ नामक इस साहित्यिक महोत्सव में 45 देशों से करीब 150 लेखक भाग ले रहे हैं. महोस्तव का आयोजन पेन अमेरिकन सेंटर नामक संस्था ने किया है. सलमान रश्दी इस महोत्सव के अध्यक्ष हैं जबकि झुम्पा लाहिड़ी इस वर्ष के साहित्यिक महोत्सव की उपाध्यक्ष हैं. इसके अलावा भारतीय मूल की लेखिका और 2006 की बुकर पुरस्कार विजेता किरण देसाई भी इस महेत्सव में हिस्सा ले रही हैं. इस महोत्सव के तहत लेखक अपनी पुस्तकें पढ़ कर सुना रहे हैं और आपस में विभिन्न मुद्दों पर बहस भी कर रहे हैं. दर्शकों के साथ भी सवाल-जवाब का सिलसिला भी इसमें शामिल है. घर और बाहर
इस वर्ष के साहित्यक मेले में मुख्य विषय है – घर और बाहर. इस विषय को चुने जाने के बारे में कारो लेवेलिन कहते हैं, “अमरीका में आजकल अप्रवासन के मामले में इस सवाल पर बहस चल रही है कि कौन अमरीका को अपना घर कह सकता है. तो हमने सोचा कि क्यूं न हम एक ऐसी व्यापक स्तर की बहस छेड़ें कि घर किसे कहते हैं और हमारा उससे क्या रिश्ता होता है.” दुनिया भर से आए लेखक इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं और अपने विचार रख रहे हैं कि उनका उनके घर से क्या वास्ता है और दूसरों के घर से क्या वास्ता है. जन्मभूमि के नाम पर राजनीतिक और सामाजिक जंगों के बारे में चर्चा हो रही है. घर या जन्मभूमि के विषय पर भारतीय मूल के पीको अय्यर का मानना है," घर तो वह चीज़ है जो भविष्य में स्थित है. विचार, भाषा, संस्कार और एक कल्पना- यह सारी चीज़ें हमें आगे ले जाती हैं न कि हम कहाँ के रहने वाले हैं या कहां से आए हैं." लेखक सलमान रश्दी कहते हैं, “लेखकों को विश्व के अहम मुद्दों पर बहस करने के लिए कम ही बुलाया जाता है. और मैं समझता हूं कि इससे नुकसान होता है.” दुनिया के अलग अलग इलाकों से आए लेखक पर्यावरण और अंतरराष्ट्रीय शर्णार्थी समस्या जैसे मुद्दों पर भी चर्चा कर रहे हैं. ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा महोसत्व में पीको अय्यर और यूगांडा के उपन्यासकार मोसेस इसेगावा ने पर्यावरण के मद्दे पर अन्य लेखकों के लेख पढ़े. इराक़ युद्व और राजनीतिक प्रताड़ना जैसे विषयों पर भी विचारों का आदान प्रदान इस महोत्सव में हो रहा है. दक्षिण अफ़्रीका की नोबेल पुरस्कार विजेता और उपन्यासकार नेडीन गोडीमर कहती हैं कि लेखक के आसपास के माहौल का असर उसके काम पर पड़ता है और इसीलिए राजनीति उसके लेख में शामिल हो जाती है. एक हफ़्ते तक चलने वाला यह महोत्सव भारी भीड़ इकट्ठा कर रहा है और लोग इन लेखकों की किताबों को खरीदने के लिए लंबी कतारें लगा रहे हैं. सलमान रश्दी, किरण देसाई और झुम्पा लाहिड़ी के अलावा जिन अन्य लेखकों की किताबों की बड़ी मांग है उनमें डेव एगर्स, डान डिलिलो, जोनेथन फ़्रैंज़न भी शामिल हैं. इनके अलावा संगीतकार पैटी स्मिथ औऱ हॉलीवुड के निदेशक सिडनी पोलाक भी बहुत चर्चित हैं. यह महोत्सव पहली बार 2005 में शुरू हुआ था जब करीब 125 लेखकों ने इसमें भाग लिया था. महोत्सव का मकसद दुनिया भर के अलग-अलग देशों के, अलग- अलग संस्कृति के और अलग- अलग भाषाओं में लिखने वाले लेखकों को एक जगह इकट्ठा करना है. इसका आयोजन करने वाली संस्था पेन अमेरिकन सेंटर, अंतरराष्ट्रीय पेन नामक साहित्यिक संस्था का हिस्सा है. अंतरराष्ट्रीय पेन दुनिया की सबसे बड़ी साहित्यिक संस्था मानी जाती है. और इसकी स्थापना 1921 में की गई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें सार्क देशों के लेखक भी जुटे03 अप्रैल, 2007 | पत्रिका 'सृजन के लिए ख़ास माहौल ज़रूरी'14 जनवरी, 2007 | पत्रिका किरण देसाई को बुकर पुरस्कार10 अक्तूबर, 2006 | पत्रिका प्रवासियों की त्रासदी बयां करती फ़िल्म03 नवंबर, 2006 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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