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भारतीय अख़बारों में छाई शिल्पा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के टेलीविज़न शो बिग ब्रदर में अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के साथ हुए व्यवहार को दिल्ली से प्रकाशित होने वाले लगभग सभी अख़बारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. महत्वपूर्ण है कि जहाँ शिल्पा शेट्टी के ख़िलाफ़ कथित नस्लभेदी टिप्पणी पर राजनीतिक हलकों में भी हलचल हुई है वहीं बिग ब्रदर के आयोजक चैनल-4 ने इन आरोपों का खंडन किया है. इस मुद्दे पर अख़बारों के साथ-साथ अनेक टीवी चैनलों ने भी बिग ब्रदर शो के वीडियो के अंश दिखाए और प्रतिक्रियाएँ प्रसारित की हैं. इस मामले पर भारतीय अख़बारों की सुर्खियाँ और ख़बरें कुछ इस प्रकार हैं: अमर उजाला का कहना है - "शिल्पा के मामले पर दिल्ली से लंदन तक बवाल." अख़बार ने मुख्य पृष्ठ पर आँसू पोंछती हुई शिल्पा की तस्वीर भी छापी है. दैनिक जागरण की सुर्खी है - "शिल्पा मसले पर हंगामा." समाचार पत्र का कहना है कि केंद्र का रुख़ कड़ा है और वह इंग्लैंड से कार्रवाई करने को कहेगा. उधर नवभारत टाइम्स की हेडलाइन है - "ब्रिटेश संसद में गूँजे कमेंट्स." नवभारत टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है कि किसी को 'शायद उम्मीद नहीं होगी कि ये ड्रामा इतने शर्मनाक मोड़ तक पहुँच जाएगा.' अख़बार लिखता है - "यह घटना एशियाई समुदाय से ज़्यादा नुकसान ब्रिटेन या पश्चिम को कर सकती है और इसीलिए हमसे ज़्यादा इसकी चिंता ब्रिटेन को करनी होगी." अमर उजाला ने एक विशेष कॉलम में नस्लभेद पर ध्यान आकर्षित किया है. इसमें लिखा गया है - "...(इससे) नस्लभेदी भावनाओं का खुलासा होता है. पर सवाल ये भी है कि हमारे अपने भीतर नस्लभेदी कुंठाओं का शमन कैसे हो?" अंग्रेज़ी अख़बारों में भी ये मुद्दा प्रथम पन्ने पर छाया हुआ है. स्टेट्समैन, द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस, एशियन एज, ट्रिब्यून के साथ-साथ कई अन्य अंग्रेज़ी अख़बारों ने भी इसे पहले पन्ने पर जगह दी है. इंडियन एक्सप्रेस की हेडलाइन है - "सरकार की नवीनतम भूमिका - शेट्टी की बिग ब्रदर बनी." हिंदुस्तान ने पहले पन्ने पर ये ख़बर छापी है. सुर्खी है - "भारत को बुरा लगा शिल्पा पर सितम." अख़बार ने अपने संपादकीय को शीर्षक दिया है 'नस्लवाद का यथार्थ' और इसमें कहता है - "...रंग, रूप, संस्कृति, स्थानीयता के आधार पर ख़ुद को श्रेष्ठ मानने की सहज प्रवृत्ति हर समाज में है, हालाँकि लोग यह नहीं समझते कि यह प्रवृत्ति होना ही उन्हें सभ्यता और संस्कृति के पायदानों पर काफ़ी नीचे पहुँचा देता है." |
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