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शुक्रवार, 24 नवंबर, 2006 को 04:08 GMT तक के समाचार
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मेरे पिता मेरे आदर्श रहे हैं: ऋतिक रोशन
ऋतिक रोशन
ऋतिक रोशन अपनी पहली फ़िल्म कहो न प्यार है से ही चर्चित हो गए थे
अभिनेता ऋतिक रोशन बताते हैं कि वो अपने पिता राकेश रोशन को अपना आदर्श मानते हैं. हृतिक मानते हैं कि उन्होंने अभी तक कई विविधताओं वाले किरदार निभाए हैं पर फिर भी बहुत कुछ करना बाकी रह गया है.

'कहो न प्यार है', 'मिशन कश्मीर', 'कृष', 'लक्ष्य' जैसी फ़िल्मों में बेहतरीन भूमिका के लिए चर्चित रहे ऋतिक अपनी ज़िंदगी के अभी तक के सफ़र को अच्छा मानते हैं.

उन्होंने शुक्रवार को रिलीज़ हो रही फ़िल्म 'धूम-2' में भी काम किया है पर फ़िल्म में उनका काम कैसा है, इसपर उन्होंने कहा कि वो फ़िल्म के प्रचार के एक समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, जिसके बाद वो फिलहाल इसका खुलासा नहीं कर सकते. हृतिक की इस फ़िल्म में क्या भूमिका है, इसका पता लगाना है तो इस फ़िल्म को देखना होगा.

अभिनय की बदौलत बॉलीवुड में अपनी ख़ास पहचान बनाने वाले ऋतिक से उनके करियर और जीवन से जुड़े कई सवालों पर बातचीत की वेदिका त्रिपाठी ने.

आइए, पढ़ते हैं कुछ अंश-

आपको एक ऐसे कलाकार के रूप में देखा जाता है जो अपने किरदार के लिए पूरी तैयारी करता है. आप ये तैयारी किस तरह से करते हैं?

तैयारी किरदार पर बहुत ज़्यादा निर्भर करती है. उसी के मुताबिक तय करता हूँ कि मुझे अपने आपको कितना तैयार करना है. जैसे कृष के लिए तैयारी करना आसान नहीं था. मुझे लगा था कि मैं यह सब नहीं कर पाऊंगा.

 सिर्फ़ अभिनेता के रूप में नहीं बल्कि पहले भी वो मेरे लिए एक आदर्श की तरह रहे हैं. मैंने हर फ़िल्म के साथ कुछ न कुछ नया सीखा है. मैंने कुछ वर्षों तक उनके सहायक के रूप में काम भी किया है.

कई लोगों का मानना है कि ऋतिक रोशन अपने अभिनय का जादू सिर्फ़ अपने पिता की ही फ़िल्मों में दिखा सकते हैं? आप इसपर क्या कहेंगे?

नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. मैं अपनी दूसरी फ़िल्मों में भी उतनी ही मेहनत करता हूँ जितनी कि पापा की फ़िल्मों के लिए करता हूँ. किरदार, कहानी और उसका ट्रीटमेंट भी किसी फ़िल्म को सफल बनाने के लिए काफी मायने रखता है. पापा मेरे साथ हमेशा एक कलाकार की तरह ही बर्ताव करते हैं. उन्हें पता होता है कि मुझे अपनी तैयारी के लिए कितना समय चाहिए.

क्या आप इस बात को मानते हैं कि आपने अपने पिता राकेश रोशन की फ़िल्मों से आपने बहुत कुछ सीखा है?

बिल्कुल, मैंने तो सबकुछ वहीं से सीखा है. सिर्फ़ अभिनेता के रूप में नहीं बल्कि पहले भी वो मेरे लिए एक आदर्श की तरह रहे हैं. मैंने हर फ़िल्म के साथ कुछ न कुछ नया सीखा है. मैंने कुछ वर्षों तक उनके सहायक के रूप में काम भी किया है.

आपने एक बार कहा था कि बचपन में आपने सुपरमैन बनने के चक्कर में गले में तौलिया लटकाकर ऊपर से कूदने की कोशिश की थी लेकिन आपकी दादी ने आपको बचा लिया था. तो क्या 'कृष' उसी फ़ैंटेसी का नतीज़ा है?

ऋतिक रोशन

(हँसते हुए) हाँ. लेकिन 'कृष' न ही सुपरमैन और न ही स्पाइडरमैन की तरह है. वह तो एक मासूम और सीधा-साधा लड़का है जिसे ख़ुद उसकी शक्तियों के बारे में नहीं पता होता है.

आपकी पहली फ़िल्म 'कहो न प्यार है' के बाद आपका कैरियर ग्राफ़ नीचे चला गया था, इसे किस तरह देखते हैं?

मेरे हिसाब से यह ज़िंदगी के पहिए की तरह है. आप मेहनत करते हैं, आपको तरक्की मिलती है और फिर वह आपके काम में थोड़ा-बहुत असंतुलन लाता है जिसका लोग ग़लत मतलब निकालते हैं. जब मेरी फ़िल्में नहीं चल रही थी तो कई लोगों को मैंने कहते सुना कि इसका कैरियर अब ख़त्म हो गया. मुझे लगता है दोनों हालातों को मैंने बहुत अच्छी तरह संभाला है. मैं अपनी सफलता को सिर से ऊपर नहीं जाने देता और विफलता से अपने आपको असंतुलित नहीं होने देता.

'कहो न प्यार है' से लेकर अब तक आपने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. इसे कैसा सफ़र मानते हैं?

मेरे ख़याल से मेरा अभी तक का पूरा सफ़र बहुत ही अच्छा रहा. एक कलाकार के रूप में मैंने अपने आपको साबित कर दिया है. मैं अपनी प्रगति से संतुष्ट हूँ. उतार-चढ़ाव तो ज़िंदगी का एक हिस्सा होते हैं, उससे कहाँ भागा जा सकता है और यह हर किसी की ज़िंदगी में आता है.

 अभी तो बहुत कुछ करना बाकी है. मुझे लगता है मैंने अपनी पूरी कोशिश की है लेकिन अभी भी बहुत कुछ है जो मैं करना चाहता हूँ

क्या आपको लगता है कि आपने ऐसे-ऐसे किरदार कर लिए हैं जो करना चाहते थे या आपको वह सबकुछ मिल गया जो आप चाहते थे?

नहीं. अभी तो बहुत कुछ करना बाकी है. मुझे लगता है मैंने अपनी पूरी कोशिश की है लेकिन अभी भी बहुत कुछ है जो मैं करना चाहता हूँ.

आप एक अच्छे कलाकार होने के साथ ही अच्छे डांसर हैं. क्या आप ख़ुद को एक अच्छा डांसर मानते हैं?

मैं मानता हूँ कि कलाकारों की दुनिया में मैं एक अच्छा डाँसर हूँ लेकिन मैं बहुत बढ़िया डाँसर नहीं हूँ.

आपने कई फ़िल्में नए निर्देशकों के साथ की हैं. इसकी कोई ख़ास वजह रही है?

अगर अच्छे निर्देशकों की बात की जाए तो कुछ गिने-चुने ही निर्देशक हैं और वो भी आजकल फ़िल्में कम बना रहे हैं. जो नई पीढ़ी के युवा निर्देशक हैं उनमें ऊर्जा के साथ ही कुछ नया करने का जज़्बा भी होता है. इसके अलावा अगर कहानी अच्छी हो और यह भरोसा किया जा सकता हो कि निर्देशक कहानी के साथ इंसाफ़ करने में सक्षम है तो नया या पुराना निर्देशक मेरे लिए ज़्यादा मायने नहीं रखता है.

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