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'औरत होना मेरी सबसे बड़ी पहचान है' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बेहतरीन अदाकारा और सामाजिक कार्यकर्ता शबाना आज़मी को अभी हाल में ही गाँधी शांति पुरस्कार से नवाज़ा गया. शबाना आज़मी जेपी दत्ता की आने वाली फ़िल्म उमराव जान में वही किरदार निभा रही हैं जो कभी मुज़फ़्फ़र अली की उमराव जान में शबाना की माँ शौकत कैफी ने निभाया था. बीबीसी हिंदी रेडियो के संपादक शिवकांत ने शबाना आज़मी से लंदन में बातचीत की. जिंदगी के हर दौर में आदमी की अपनी एक पहचान होती है, एक पहचान हावी रहती है, आपको क्या लगता है कि आप पर कौन सी पहचान हावी हो रही है ? औरत और हिंदुस्तानी. इसकी कोई खास वजह? मुझे लगता है कि दुनिया के साथ जो मेरा पहला तआर्रुफ़ है वो एक औरत का है. और अभिनेत्री होना? एक अभिनेत्री होना मेरे लिए काफी अहम है क्योंकि आज जो मेरी सामाजिक पहचान है, लोग मेरी बात को ध्यान से सुनते हैं उसका मुख्य कारण मेरा अभिनेत्री होना है. एक अभिनेत्री के रूप में आम जनता ने मुझे सराहा है, लोग मेरे काम को पसंद करते हैं. इसके लिए मैं अपने तमाम प्रशंसकों की आभारी हूँ. आने वाली फ़िल्म उमराव जान में आपका किरदार कहीं आपकी औरत वाली पहचान से जुड़ा तो नहीं है? मुझे लगता है कि फ़िल्मी इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि एक ही किरदार को माँ और बेटी दोनों निभाएं. पहले वाली उमराव जान में ख़ानम जान का जो किरदार मेरी माँ ने निभाया था उसी किरदार को आज मैं निभा रही हूँ.
ये मेरे लिए बड़ी चुनौती है क्योंकि पहले वाली उमराव जान में मेरी माँ के किरदार को काफी़ सराहा गया था. कैसा लगता है जब आप फ़िल्म में अपने किरदार की तुलना अपनी माँ के किरदार से करती हैं? नहीं, इस तरह की तुलना तो मैं नहीं करती हूँ. मेरी माँ हमेशा से मेरी प्रेरणास्रोत रही हैं. उनके साए में रहकर ही मैंने अदाकारी का ककहरा सीखा है. अपनी प्रेरणास्रोत को मात देना-ये कैसा एहसास है? मात देना ,मतलब. आपकी अम्मी ने पहले वो किरदार किया और अब आप कर रही हैं. कभी ये मन में नहीं आया कि अम्मी से बेहतर करूँ? बेहतर करूं या इस तरह की कोई बात कभी ध्यान में नहीं आई.
मैंने पहले भी कहा कि माँ मेरी प्रेरणास्रोत हैं. जब हम उमराव जान के कपड़े खरीदने जा रहे थे तो माँ साथ आई थीं. जब आप उस किरदार को निभाते हैं तो भी बेहतरी की बात ज़ेहन में नहीं आती? नहीं, क्योंकि आप को उस किरदार के साथ इंसाफ करना है. और दोनों उमराव जान अलग-अलग तरह की फ़िल्में हैं जहाँ पहले वाली उमराव जान कला-फ़िल्म थी वहीं ये वाली व्यावसायिक (मेनस्ट्रीम)फ़िल्म है. आप फ़रहान अख्तर की किसी फ़िल्म में काम करने की सोच रही हैं? फ़रहान को मैं आज के नौजवान निर्देशकों में सबसे बेहतरीन मानती हूँ. अगर मुझे उसकी किसी फ़िल्म में काम करने का मौका मिला तो मुझे खुशी होगी. फ़िलहाल मैं 'हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड' नाम की एक फ़िल्म कर रही हूँ जिसे फरहान प्रोड्यूस कर रहा है. फरहान के साथ काम करना आपके लिए क्या एक चुनौती नहीं होगी? चुनौती क्यों होगी. वो मेरा बेटा है लेकिन जब वो मुझे निर्देशित करेगा तो एक डायरेक्टर होगा. एक अभिनेत्री के तौर पर मेरा डायरेक्टर के साथ रिश्ता सबसे पहले और अहम होता है. फरहान की नई फ़िल्म डॉन के बारे में क्या कहेगीं? डॉन एक बेहतरीन फ़िल्म है. नई पीढ़ी ने इसे काफी सराहा है. ऐसा क्या है नए वाले डॉन में? मुझे लगता है कि डॉन बहुत ही स्टाइलिश फ़िल्म है और शायद इसीलिए नौज़वान इसे पसंद कर कहे हैं.
इन दिनों मैं नरेश गोयल (जेट एयरवेज़ के मालिक) के साथ ठहरी हुई हूँ उनके 14 साल के लड़के की जु़बान पर हमेशा डॉन ही रहती है. उसको डॉन के डायलॉग ऐसे याद हैं जैसे हमें 25 साल पहले शोले फ़िल्म के याद हुआ करते थे. आप को पहले वाली डॉन ज़्यादा पसंद है या अब वाली? मुझे दरअसल पहले वाली डॉन ठीक से याद नहीं है. मैं समझती हूँ कि दोनों फिल्मों की तुलना करना ठीक नहीं है क्योंकि दोनों अलग अंदाज से बनी फ़िल्में हैं. फिर भी एक दर्शक के तौर पर? क्योंकि मुझे पहले वाली डॉन ठीक से याद नहीं है इसलिए मैं कुछ कह नहीं सकती. एक मेरे शौहर ने लिखी थी और दूसरी मेरे बेटे ने बनाई है. (हंसते हुए) इस तरह तो आप मुझे फँसा देंगे. |
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