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धूम मचा रही हैं भोजपुरी फिल्में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इन दिनों भोजपुरी फ़िल्मों का बाजार काफी उफान पर है. हाल ही में प्रदर्शित भोजपुरी फ़िल्म 'गंगा' ने बहुचर्चित फ़िल्म 'डॉन' को यूपी और बिहार में पीछे छोड़ दिया है. पिछले 4-5 सालों से भोजपुरी फ़िल्मों के निर्माण में खासी तेजी आई है. पिछले दिनों मुंबई में दिलीप कुमार की पत्नी और अपने जमाने की मशहूर अदाकारा सायरा बानू ने अपनी नई फ़िल्म 'अब त बन जा सजनवा हमार'का ऑडियो रिलीज़ किया. सबसे दिलचस्प बात ये रही कि इस ऑडियो रीलिज का खास आकर्षण रहे किंग खान यानी शाहरुख. शाहरुख ने इस मौके पर कहा कि "भोजपुरी फ़िल्में काफी अच्छा कर रही हैं, कम लागत में बनती हैं,इसलिये रिस्क भी कम रहता है और माध्यम कोई हो फ़िल्म तो फ़िल्म होती है". इससे पहले अमिताभ और हेमामालिनी अभिनीत भोजपुरी फ़िल्म 'गंगा' जो कि हाल ही में रिलीज़ हुई है, बॉलीवुड की कई नवीनतम फ़िल्मों से ज्यादा पसंद की जा रही है और अच्छा बिजनेस भी कर रही है. इधर कुछ महीनों से भोजपुरी फ़िल्मों की मीडिया कवरेज में भी इजाफा हुआ है. पहले ऐसी फ़िल्मों को कोई खास तरजीह नहीं दी जाती थी, लेकिन अब टीवी न्यूज चैनलों और पत्र-पत्रिकाओं में भोजपुरी फ़िल्मों से जुड़ी हुई खबरें प्रमुखता से छाई रहती हैं. इतना ही नहीं पिछले साल हुए भोजपुरी फ़िल्म अवार्ड समारोह में दिलीप कुमार,गोविंदा,शत्रुघ्न सिन्हा जैसी जानी मानी हस्तियों ने हिस्सा लिया,जो कि ऐसी फ़िल्मों की लोकप्रियता को दर्शाता है. बदल रहा है दौर अभी कुछ साल पहले तक बॉलीवुड के फ़िल्मी सितारे भोजपुरी फ़िल्मों में काम करने के नाम भर नाक भौं सिकोंड़ा करते थे लेकिन अब ये हाल है कि अमिताभ बच्चन जैसे मेगास्टार भी भोजपुरी में अभिनय कर रहे हैं.
पिछले दिनों अजय देवगन अभिनीत भोजपुरी फ़िल्म आई और उसने धूम भी काफी मचाई. इसके अलावा शत्रुघ्न सिन्हा ने भी हाल ही में प्रदर्शित भोजपुरी फ़िल्म 'राजा ठाकुर' में टाइटल किरदार निभाया. ऐसा नहीं है कि भोजपुरी फ़िल्में केवल उत्तरप्रदेश और बिहार में ही चल रही हैं,बल्कि पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, बंगाल और यहाँ तक कि दक्षिण भारत में भी अच्छा व्यवसाय कर रही हैं. इन फ़िल्मों में काम करने वाले कलाकारों की भी इन दिनों चांदी है. रवि किशन जिन्होंने कई भोजपुरी फ़िल्मों में शीर्ष भूमिकाएं की हैं इन दिनों भोजपुरी के अमिताभ बच्चन कहे जा रहे हैं. इसके अलावा गायकी की दुनिया से आए मनोज तिवारी की फ़िल्मों को भी दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं. वर्ष 1962 में भोजपुरी की पहली फ़िल्म 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो' आई थी, जिसने काफी अच्छा व्यवसाय किया था. अगर हम भोजपुरी फ़िल्मों की तेजी से बढ़ रही लोकप्रियता की वजह तलाश करें, तो हिंदी फ़िल्मों के निर्माता निर्देशकों की, दर्शकों के प्रति उदासीनता सबसे मुख्य वजह के रुप में सामने आती है. हिंदी फ़िल्में तमाम तकनीक और तब्दीली के बावजूद दर्शकों को नहीं लुभा पा रही हैं. इसके साथ ही साथ देश का एक बड़ा तबक़ा आज कल की कई हिंदी फ़िल्मों से खुद को आसानी से नहीं जोड़ पा रहा है, क्यों कि कहीं न कहीं जो शहरीकरण और विदेशीकरण हिंदी फ़िल्मों में इन दिनों चल रहा है, उस मल्टीप्लेक्स कल्चर को देश का एक बड़ा तबक़ा, शायद छोटे शहरों, क़स्बों, गांवों में रहने वाले लोग पचा नहीं पा रहे हैं. ऐसे में उन्हें सस्ता और अच्छा मनोरंजन इन भोजपुरी फ़िल्मों के ज़रिए मिल रहा है जो वे काफी पसंद कर रहे हैं. भोजपुरी फ़िल्मों का ये बाजार कब तक टिकेगा ये तो कहना मुश्किल है लेकिन अगर कुछ अच्छे और सूझ-बूझ वाले निर्माता सामने आए तो भोजपुरी फ़िल्मों की लोकप्रियता में आने वाले दिनों में इज़ाफ़ा हो सकता है. |
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