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गुरुवार, 27 जुलाई, 2006 को 07:42 GMT तक के समाचार
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सरकार ने मायूस किया है: अहमद फ़राज़

अहमद फ़राज़
फ़राज़ का कहना है कि पाकिस्तान की मौजूदा सरकार मानवाधिकार हनन के मसले पर संजीदा नहीं है
पाकिस्तान के मशहूर शायर अहमद फ़राज़ ने मौजूदा सरकार पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए उच्च नागरिक सम्मान ‘हिलाले-इम्तियाज़’ वापस कर दिया है.

साहित्य के लिए मिलने वाले इस पुरस्कार को वापस करते हुए कैबिनेट विभाग को लिखी गई एक चिठ्ठी में उन्होंने कहा है कि वर्ष 2004 में यह सम्मान उन्होंने इस लिए क़बूल किया था क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि मानवाधिकार की स्थिति बेहतर होगी.

फ़राज़ का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि हालात वर्ष 1971 जैसे नहीं होंगे जब देश टूट गया था और बंग्लादेश आज़ाद हो गया.

अहमद फ़राज़ ने अपने पत्र में बलूचिस्तान और वज़ीरिस्तान के हालात का ज़िक्र करते हुए कहा है, "बदक़िस्मती से संवैधानिक और जनतांत्रिक मूल्यों को पैरों तले रौंदा जा रहा है. सरकार पाकिस्तानी फ़ौजियों को अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ लड़ा रही है और उनका ख़ून बहा रही है. लगता है कि राजनेताओं ने अतीत से सबक़ नहीं सीखा."

कलंक का टीका

उन्होंने कहा कि हिलाले-इम्तियाज़ एक बड़ा सम्मान ज़रूर है लेकिन उनके मुताबिक़ जब वो अपने विचारों की आँख से इस सम्मान को देखते हैं तो यह सम्मान उन्हें कलंक का टीका लगता है.

 बदक़िस्मती से संवैधानिक और जनतांत्रिक मूल्यों को पैरों तले रौंदा जा रहा है. सरकार पाकिस्तानी फ़ौजियों को अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ लड़ा रही है और उनका ख़ून बहा रही है.
अहमद फ़राज़

उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें जो मोहब्बत, प्यार और इज़्ज़त दी है वो वर्तमान अलोकतांत्रिक, अप्रतिनिधिक और बेरहम शासकों के ज़रिए दिए गए सम्मान से कहीं ज़्यादा है.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के गुरूवार को देश से नाम संदेश ने उन्हें काफ़ी मायूस किया.

अहमद फ़राज़ ने कहा कि वो जानते हैं कि उनकी अकेली आवाज़ से शायद कुछ ज़्यादा फ़र्क़ न पड़े लेकिन वो उम्मीद करते हैं कि उन जैसी और आवाज़ें भी बुलंद होंगी.

उन्होंने उम्मीद जताई कि देश भर से उनके जैसी लाखों आवाज़ें उठेंगी और देश में संविधान और क़ानून वाली सरकार स्थापित होगी और निरंकुशता समाप्त होगी.

अहमद फ़राज़ पाकिस्तान के शिक्षा विभाग से संबंधित नेशनल बुक संस्थान के प्रमुख के तौर पर कई बरसों तक सेवा देते रहे हैं और हाल ही में इस पद से अलग हुए हैं.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान के अंग्रेज़ी दैनिक 'द डॉन' के इस्लामाबाद के स्थानीय संपादक एम ज़ियाउद्दीन इस उच्च सम्मान को लेने से पहले ही इनकार कर चुके हैं.

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