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मशहूर शायर का सामान सड़क पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में सबसे बड़े शायरों में से एक, अहमद फ़राज़ को सरकारी मकान से बेदख़ल करके उनका सामान सड़क पर रख दिया है जिसे लेकर पाकिस्तान के लेखकों और साहित्यकारों में ख़ासा रोष है. 'रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ' जैसी मशहूर ग़ज़लें लिखने वाले शायर अहमद फ़राज़ इस्लामाबाद में जिस मकान में रहते थे वह उनकी पत्नी के नाम एलॉट किया गया था जो अब रिटायर हो चुकी हैं. पाकिस्तान के नेशनल बुक फाउंडेशन के अध्यक्ष के पद पर काम रहे अहमद फ़राज़ का दावा है कि उच्च सरकारी अधिकारी होने के नाते इस मकान पर उनका हक़ बनता है, मकान खाली कराने का नोटिस मिलने के बाद उन्होंने अदालत में अपील की थी. पाकिस्तान के आवासीय मामलों के मंत्री सफ़वान उल्लाह का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से क़ानून के मुताबिक़ की गई है. अफ़सोस सितारा-ए-इम्तियाज़ और हिलाले पाकिस्तान जैसे शीर्ष सम्मान पा चुके अहमद फ़राज़ इन दिनों लंदन के दौरे पर हैं और यह बेदख़ली उनकी ग़ैर-मौजूदगी में हुई है. उन्होंने बीबीसी की उर्दू सेवा के साथ बातचीत में कहा कि यह "भौंडे तरीक़े से की गई ज़्यादती है." उन्होंने बताया कि "मुझे फ़ोन पर ख़बर मिली कि पुलिस आई थी और उसने सामान निकालकर सड़क पर रख दिया, उन्होंने दरवाज़े तोड़ दिए, घर में कोई पुरूष नहीं था, मेरी पत्नी बिचारी क्या करती." अहमद फ़राज़ ने कहा, "मुझे अफ़सोस इस बात का है कि पंद्रह दिन पहले प्रधानमंत्री अज़ीज़ ने मुझे ख़ुद फ़ोन करके आश्वस्त किया था कि मैं चिंता न करूँ, मकान के लिए ऑर्डर दे दिया गया है." मेंहदी हसन और गुलाम अली जैसे मशहूर गायकों को शब्द देने वाले फराज़ ने इस घटना की टाइमिंग पर ज़ोर दिया है, उनका कहना है कि "मैं विदेश में हूँ, प्रधानमंत्री भारत गए हैं, ऐसे में मौक़े का फ़ायदा उठाया गया." लेकिन पाकिस्तान के आवासीय मामलों के मंत्री कहते हैं कि उन्हें "प्रधानमंत्री की तरफ़ से कोई निर्देश नहीं मिला था और जो भी किया गया है पूरी तरह से क़ानूनी दायरे के भीतर किया गया है." शायर का सामान उनके एक दोस्त ने एक गेस्ट हाउस में पहुंचा दिया है और उनके स्वदेश लौटने का इंतज़ार किया जा रहा है. |
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