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महेश भट्ट की याचिका ख़ारिज | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने निर्माता निर्देशक महेश भट्ट की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने गुजरात में फ़ना फ़िल्म के प्रदर्शन के लिए सुरक्षा मुहैया करवाने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया था. गुजरात में सिनेमाघर मालिकों ने फ़िल्म देखाने से इनकार कर दिया था क्योंकि उन्हें डर था कि अभिनेता आमिर ख़ान के सरदार सरोवर मामले पर अपने विचार व्यक्त करने के बाद प्रदर्शन हो सकते हैं. गुजरात में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों इस फ़िल्म का विरोध कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने से पहले महेश भट्ट ने बीबीसी हिंदी के विशेष कार्यक्रम 'आपकी बात, बीबीसी के साथ' में कहा था कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जो जनहित याचिका दायर की वह आमिर ख़ान या फ़ना पर ही केंद्रित नहीं है.
उनका कहना था कि मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीविका के अधिकार का है. 'पुलिस से सुरक्षा लें' लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ये तर्क मानने से इनकार कर दिया. कोर्ट का कहना था कि यदि सिनेमाघर के मालिक फ़िल्म दिखाना चाहते हैं तो वे स्थानीय पुलिस के पास जाकर उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का अनुरोध कर सकते हैं. सरदार सरोवर के संदर्भ में आमिर ख़ान ने कहा था कि वे बाँध बनाए जाने के ख़िलाफ़ नहीं हैं और वे केवल बाँध के कारण विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास की माँग का समर्थन कर रहे थे. गौरतलब है कि जब आमिर ख़ान सरदार सरोवर के विस्थापितों के समर्थन में उतरे थे तो गुजरात में कई सिनेमाघरों में चल रही उनकी फ़िल्म 'रंग दे बसंती' का विरोध हुआ था और कई सिनेमाघरों में तोड़फोड़ भी हुई थी. |
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