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बुधवार, 15 मार्च, 2006 को 09:01 GMT तक के समाचार
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इस्लामी देशों के योगदान पर प्रदर्शनी

इस्लामी देशों के योगदान के बारे में विस्तार से दिखाया गया है
इस्लामी देशों में हुए आविष्कारों पर आजकल इंग्लैंड के मैनचेस्टर शहर के विज्ञान और औद्योगिक संग्रहालय में एक प्रदर्शनी चल रही है.

1001 इन्वेंशंस नाम की इस प्रदर्शनी के आयोजकों का मानना है कि विज्ञान, कला, चिकित्सा और व्यापार के क्षेत्र में इस्लामी देशों के योगदान को अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है इसलिए यह प्रदर्शनी आयोजित की गई है.

इस प्रदर्शनी को सात भागों में बाँटा गया है जिसमें जाने-माने आविष्कारों को दिखाया गया है.

क्या आप जानते हैं कि रोज़मर्रा के इस्तेमाल की चीज़ें जैसे कि साबुन और कॉफी भी इस्लामी देशों की देन हैं.

इस प्रदर्शनी को आयोजित करने में मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर सलीम अल-हसानी का काफी योगदान रहा. उनका कहना है, “आज के नौजवानों को ज़रुरत है एक आदर्श की. यह प्रदर्शनी मुसलमान युवाओं के लिए एक अच्छा मौक़ा है कि वे अपने अतीत में ऐसे आदर्श को ढूँढें और उनके योगदान से सीख लें.”

ये प्रदर्शनी ऐसे समय पर आयोजित की गई है जब दुनिया में, और ख़ासतौर पर पश्चिमी देशों में इस्लामी जगत को लेकर कई धारणाएँ पनप रही हैं.

महत्वपूर्ण देन

पश्चिम में कोई भी बड़ा आयोजन रेड कार्पेट वेलकम के बिना अधूरा है लेकिन कार्पेट यानी कालीन देन है इस्लामी संस्कृति की.

 आज के नौजवानों को ज़रुरत है एक आदर्श की. यह प्रदर्शनी मुसलमान युवाओं के लिए एक अच्छा मौक़ा है कि वे अपने अतीत में ऐसे आदर्श को ढूँढें और उनके योगदान से सीख लें
प्रदर्शनी के आयोजक

उसी तरह घर की साज-सज्जा में काम आने वाला क्रिस्टल, फानूस और कई मशहूर खेल भी ईरान तथा अरब देशों विकसित हुए.

विज्ञान के जानकार और लेखक अहसान मसूद का इस प्रदर्शनी के बारे में कहना है, “दुनिया भर में मुस्लिम खानों के नाम पर करी, कबाब, बिरयानी और कुल्फी के बारे में तो पता है, लेकिन दुनिया का पहला कोल्ड ड्रिंक यानी शरबत और कॉफी भी यहीं से आए."

वे कहते हैं, "कॉफी के बारे में तो यह कहा जाता है कि एक भेड़-बकरी चराने वाले ने अपने मवेशियों को एक पौधा खाकर खूब चुस्त होते देखा, तब कॉफी की खोज हुई जो आज दुनिया भर का पसंदीदा पेय है."

इस प्रदर्शनी में व्यापार, चिकित्सा और खगोल और ज्योतिष विद्या के क्षेत्र में हुई खोजों को भी दिखाया गया है.

यहाँ 1001 इंवेंशनस नाम की एक किताब भी मिल रही है जिसमें इस इन सब खोजों और अविष्कारों के बारे में विस्तार से बताया गया है.

प्रोफ़ेसर अल-हसानी का कहना है, “रोमन, ग्रीक और सुमेरी सभ्यता के बाद के समय को पश्चिम में कई बार विज्ञान के अंधकार युग का नाम दिया गया लेकिन ये वो समय है जब मुस्लिम समाज में आय दिन नए-नए आविष्कार हो रहे थे.”

ये प्रदर्शनी 4 जून 2006 तक चलेगी.

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