|
तस्लीमा की किताब पर लगा प्रतिबंध हटा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिम बंगाल की एक अदालत ने बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन की आत्मकथा 'द्विखंडिता' पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है. राज्य सरकार ने इस आत्मकथा पर यह कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया था कि इससे अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की भावनाएँ आहत होती हैं. विवादास्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन बांग्लादेश छोड़ने के बाद कई वर्षों तक स्वीडन में रहीं और अब वे भारत में रह रही हैं, इसी महीने के शुरू में भारत सरकार ने उन्हें एक वर्ष का वीज़ा दिया है. तस्लीमा नसरीन के वकील जयमाल बागची ने कहा, "यह हमारे लिए एक बहुत बड़ा दिन है, हमने सरकार से एक कठिन लड़ाई लड़ी, लेकिन मुझे लगता है कि वे इतनी आसानी से हार नहीं मानने वाले." तस्लीमा नसरीन की आत्मकथा के प्रकाशक पीपुल्स बुक हाउस का कहना है कि वे इस बात का इंतज़ार कर रहे हैं कि सरकार जल्द से जल्द पुस्तक की प्रतियाँ उनके हवाले कर दे, द्विखंडिता के सभी अंकों को प्रतिबंध लगने के बाद ज़ब्त कर लिया गया था. अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि वह द्विखंडिता की सभी प्रतियाँ प्रकाशक को वापस कर दे. पीपुल्स बुक हाउस के प्रशांत राय कहते हैं, "हम इसकी बिक्री जल्द से जल्द शुरू करना चाहते हैं, हम सरकारी सेंसरशिप की मार झेल रहे हैं." अदालत ने अपने फ़ैसले में प्रतिबंध लगाने को ग़लत ठहराया है और कहा है कि राज्य सरकार के निर्णय का कोई औचित्य नहीं था. 1994 में उपन्यास 'लज्जा' के प्रकाशन के बाद बांग्लादेश के मुस्लिम कट्टरपंथियों की धमकियों के डर से उन्होंने देश छोड़ दिया था. सुरक्षा डॉक्टर से लेखिका बनीं तस्लीमा नसरीन ने अदालत के इस फ़ैसले पर प्रसन्नता प्रकट करते हुए कहा, "यह सिर्फ़ मेरी जीत नहीं है बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जीत है." भारत की नागरिकता की अर्ज़ी दे चुकीं तस्लीमा नसरीन ने कहा कि उन्हें विश्वास हो गया है कि "भारत में क़ानून का राज है." अदालत के आदेश के बाद पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कट्टरपंथी मुसलमान इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर सकते हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें तस्लीमा नसरीन की सुरक्षा और कड़ी करनी होगी. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||