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तस्लीमा को नागरिकता देने का विरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी वामपंथी गठबंधन सरकार ने चर्चित लेखिका तस्लीमा नसरीन को भारत की नागरिकता दिए जाने का विरोध किया है. बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन की अपनी एक किताब पर हुए विवाद के बाद कट्टरपंथियों ने उनके ख़िलाफ़ ईशनिंदा का आरोप लगाया था और फ़तवा जारी कर दिया था. उन्हें बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था और वे पश्चिम बंगाल के कोलकाता में रह रही हैं और बीच में यूरोपीय देशों में भी वे रहती रही हैं. पर्यटक वीज़ा पर भारत में रह रहीं नसरीन मानती हैं कि कोलकाता उनके लिए 'घर से बाहर एक और घर' है. उन्होंने पिछले दिनों भारत सरकार से अनुरोध किया था कि उन्हें भारत की नागरिकता दी जाए. पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र सरकार से कहा है कि तस्लीमा नसरीन के नागरिकता के आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. राज्य सरकार का तर्क है कि तस्लीमा नसरीन को नागरिकता दिए जाने से राज्य में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता है क्योंकि अधिकतर मुसलमान उनको स्वीकार नहीं करते. राज्य सरकार ने उनकी एक किताब 'द्विखंडिता' पर प्रतिबंध लगा रखा है और जैसा कि राज्य के गृह विभाग के एक अधिकारी ने अपना नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर बताया कि सरकार इस प्रतिबंध को वापस नहीं ले रही है. उनकी पुस्तक पर प्रतिबंध को एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने अदालत में चुनौती भी दे रखी है. तस्लीमा नसरीन ने ख़ुद भी कह चुकी हैं वामपंथी सरकार के इस रुख़ से उन्हें सदमा पहुँचा है. तस्लीमा का कहना है कि वे भारत में इसलिए रहना चाहतीं हैं क्योंकि उन्हें अपने बंगाली भाई बंधुओं से दूर पश्चिमी देशों में रहने का औचित्य समझ में नहीं आता. |
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