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हिटलर पर बनी फ़िल्म पर भीड़ उमड़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नाज़ी तानाशाह एडोल्फ़ हिटलर का नाम अब भी भीड़ खींचने की ताक़त रखता है. हिटलर पर बनी एक फ़िल्म जब गुरूवार रात को रिलीज़ हुई तो उसे देखने के लिए एक लाख से ज़्यादा लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. द डाउनफ़ाल नाम की यह विवादास्पद फ़िल्म काफ़ी बड़े बजट से बनी है. गुरूवार रात को यह फ़िल्म 400 पर्दों पर दिखाई गई जिसमें स्विस अभिनेता ब्रूनो गैंज़ ने हिटलर की भूमिका निभाई है. इस फ़िल्म पर विवाद इसलिए उठा कि इसमें हिटलर का मानवीय चेहरा दिखाने की कोशिश की गई है. तीस अप्रैल 1945 को हिटलर ने अपने एक बंकर में आत्महत्या की. फ़िल्म में उससे पहले के हालात दिखाए गए हैं. जर्मनी के पूर्व चांसलर हेलमुट कोल ने फ़िल्म की यह कहते हुए तारीफ़ की है कि इससे युवा पीढ़ी को हिटलर की ज़्यादतियों के बारे में जानने का मौक़ा मिलेगा.
क़रीब 90 लाख पाउंड यानी क़रीब सात अरब रूपए की लागत से बनी इस फ़िल्म के निर्माताओं का कहना है कि वे बहुत ख़ुश हैं क्योंकि युवा और बुज़ुर्ग सभी इस फ़िल्म को देखने पहुँच रहे हैं. लेकिन आलोचकों की राय कुछ अलग है. जर्मन इतिहासकार हैंस मोम्मसेन का कहना है, "इतिहास को सिर्फ़ कहानियों में समेट देने से लोगों को इतिहास की बड़ी प्रक्रिया को समझने में कोई मदद नहीं मिलती." लेकिन ब्रितानी इतिहासकार और हिटलर की जीवनी लिखने वाले इयन करशॉ का कहना है, "हिटलर पर जितनी भी फ़िल्में बनी हैं, उनमें से मैं इसे सबसे ज़्यादा आधिकारिक मानता हूँ. यह फ़िल्म पूरे यूरोप और जापान में दिखाई जाएगी. इसके निर्माता इसे उत्तरी अमरीका और ब्रिटेन में भी रिलीज़ करने के लिए आशान्वित हैं. |
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