|
लंदन में मची बॉलीवुड सितारों की धूम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शाहरुख़ ख़ान, प्रीति ज़िंटा, रानी मुखर्जी, सैफ़ अली ख़ान, प्रियंका चोपड़ा और अर्जुन रामपाल. ज़रा सोचिए कि बॉलीवुड के ये कलाकार एक साथ कहीं इकट्ठा हो जाएँ तो क्या हो? इसी उत्सुकता से हम भी पहुँचे लंदन के उस कार्यक्रम में जहाँ ये सारे कलाकार मौजूद थे. हज़ारों दर्शकों की मौजूदगी में जब एक-एक करके ये कलाकार मंच पर उतरे तो लोग तो ख़ुशी के मारे जैसे पागल ही हो उठे. ज़बरदस्त शोर, तालियों और सीटियों की आवाज़ों से गूँज उठा पूरा माहौल. सिर्फ़ मंच पर ही रोशनी थी और रह-रहकर दर्शकों के कैमरे के फ़्लैश चमक रहे थे. कार्यक्रम को एक अलग रंग देने के लिए सभी छह कलाकारों को एक भावना से जोड़ा गया. शाहरुख़ को जहाँ प्यार का नाम दिया गया वहीं प्रीति ने आवेग या आवेश, रानी ने कामुकता, सैफ़ ने ईर्ष्या, प्रियंका ने लोभ या लालच और अर्जुन रामपाल ने शक्ति या ताक़त के रूप में प्रस्तुति दी. इन लोगों ने दर्शकों के लिए जो नृत्य पेश किया उसमें सबने इन भावनाओं के अनुरूप कार्यक्रम पेश किए.
आयोजकों को भी शायद पता था कि लोग शाहरुख़ ख़ान का कितना बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं और इसीलिए उन्हें सबसे बाद में पेश किया गया. मगर जैसे ही शाहरुख़ के मंच पर आने की भूमिका बनी कि दर्शकों में उत्साह की एक नई लहर सी दौड़ गई. पूरा माहौल रोमांचित हो उठा. भीड़ से रह-रहकर शाहरुख़-शाहरुख़ की आवाज़ें सुनाई पड़ने लगीं. इस रोमांच में उम्र की कोई भूमिका नहीं थी. वह सोलह वर्षीया लड़की रही हो या 50 वर्षीया महिला. हर कोई ये मानकर अपनी ही जगह पर झूम रहा था जैसे शाहरुख़ सिर्फ़ उसी के लिए मंच पर है. शाहरुख़ ने मंच के जिस कोने पर आकर दर्शकों की ओर हाथ उठाया उधर ही लगा जैसे दर्शक उड़कर मंच तक पहुँच जाना चाहते थे. ‘परसों हो जाएगा’ सबके व्यक्तिगत कार्यक्रम के बाद शुरू हुई एक लघु नाटिका. हँसी की फुलझड़ियों से भरे इस कार्यक्रम को नाम दिया गया ‘कल हो न हो, परसों हो जाएगा’. प्रस्तुत करने वाली कंपनियों का नाम ‘ट्वेंटिएथ सेंचुरी फॉक्स’ की तर्ज़ पर ‘ट्वेंटिएथ सेंचुरी सॉक्स’ और ‘पैरामाउंट’ की तर्ज़ पर ‘प्यारा माउंट’ दिया गया था. कहानी थी कि चंपा और चमेली की भूमिका निभाने वाली रानी और प्रीति किसी पैसे वाले से शादी करना चाहती हैं.
इसी तरह शाहरुख़ और सैफ़ भी किसी पैसे वाली लड़की से शादी करना चाहते हैं. अब ऐसे में सैफ़ और शाहरुख़ एक अमीर व्यक्ति के नाम के सहारे रानी और प्रीति को धोखा देते हैं. जबकि असली धनी व्यक्ति यानी अर्जुन रामपाल एक अलग ही लड़की यानी प्रियंका चोपड़ा को पसंद कर लेता है. बाद में सच्चाई सामने आती है और सारी माफ़ी के बाद जोड़ियाँ ख़ुशी-ख़ुशी एक दूसरे को स्वीकार कर लेती हैं. जी हाँ, वही जानी पहचानी फ़िल्मी कहानी मगर अंतर ये था कि ये कहानी तीन घंटे न चलकर तीस मिनट में ही सिमट गई. लोकप्रिय बॉलीवुड बॉलीवुड की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता की मिसाल तब दिखी जब शाहरुख़ ने एक लड़की को भीड़ में से मंच पर बुलाया और जो लड़की इसके लिए शाहरुख़ ने चुनी वो थी तंज़ानियाई मूल की. मगर वह शाहरुख़ की ऐसी दीवानी थी कि उसने शाहरुख़ की लगभग सभी फ़िल्में देखी थीं. उसे न सिर्फ़ शाहरुख़ के साथ नृत्य का मौक़ा मिला बल्कि शाहरुख़ ने उसे एक छतरी, एक टी-शर्ट और एक टैडीबियर भी दिया. मुझे याद आ गई कुछ दिन पहले अफ़ग़ानिस्तान के एक नागरिक से हुई मुलाक़ात जिसमें उसने बॉलीवुड को भारत का ‘वेपन ऑफ़ मास डिस्ट्रैक्शन’ यानी असल अर्थों में ‘व्यापक स्तर पर प्रभावित करने वाला हथियार’ बताया था. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||