|
रहस्य और रोमांच के सौदागर श्यामलन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फिल्म 'द सिक्स्थ सेंस' से मशहूर हुए हॉलीवुड निर्देशक मनोज नाइट श्यामलन की नई फिल्म 'द विलेज' शुक्रवार से रिलीज़ हो गई है. उन्नीसवीं शताब्दी के एक गाँव को चित्रित करती 'द विलेज' भूत की एक साधारण कहानी है. इसमें एक ऐसे संप्रदाय को दर्शाया गया है जो पास के जंगलों में रहने वाले अजीब से जीवों के बीच फँसा है. इसकी प्रेरणा श्यामलन को एमीली ब्रोन्ते की किताब 'द वुदरिंग हाइट्स' से मिली. श्यामलन की इस फिल्म की ही तरह इसमें भी कहानी दो प्रेमियों की उलझी दास्तान को ईर्द-गिर्द घूमती है. प्रेमियों की भूमिका निभाई हैं नये अभिनेता ब्राइस डलास हावर्ड और जोआकिन फीनिक्स ने. अभिनेत्री ब्राइस डल्लास हावर्ड के लिए ये बहुत बड़ा ब्रेक रहा. लेकिन साथ ही हॉलीवुड के मशहूर निर्देशक रॉन हावर्ड की बेटी होने के कारण उन पर अच्छा प्रदर्शन करने का दवाब भी बहुत था.
हावर्ड ने श्यामलन की तारीफ करते हुए कहा, "फिल्म के काम में मुझे काफी संतुष्टि मिलती है. ख़ास तौर पर इतने अलग-अलग फिल्म निर्देशकों के साथ काम करने का मौका भी मिलता है. लेकिन एक देवता समान निर्देशक के साथ करने का मौका बार-बार नहीं मिलता." श्यामलन के लिए फिल्म बनाना कला और कारोबार के बीच समन्वय बनाने की तरह है. उनका नाम ज्यादातर फिल्म के नाम से पहले आता है, जिससे उम्मीदें बढ़ जाती हैं. लेकिन वो दुख प्रकट करते हैं कि किस तरह दर्शक उनकी पटकथा में उलझ जाते हैं. पटकथा
उनके लिए कहानी में ये घुमाव कहानी को खोलने के लिए नहीं, बल्कि उसकी सभी परतों को धीरे-धीरे खोलकर उसकी सही संवेदना को समझने के लिए होता है. "मैं जब कहानी लिखता हूँ तो वो बहुत भावुक प्रक्रिया होती है. मेरे लिए विचारों को गंभीरता से पेश करना काफी अहम है." पटकथा लिखने की प्रक्रिया को श्यामलन "आठ महीनों की प्रताड़ना" क़रार देते हैं. भारतीय मूल के इस निर्देशक ने अभी तक किसी दूसरे की कहानी पर फिल्म नहीं बनाई है और खुद ही सारा काम करना पसंद करते हैं. उनके पसंदीदा निर्देशकों में स्टेनली क्यूब्रिक और पीटर वेयर का नाम प्रमुख है. क्यूब्रिक की औपचारिकता पसंद है तो वेयर की मानवता का भाव. "मैं निर्देशक को उसके लहज़े से परखता हूँ." सस्पेंस "सस्पेंस मेरी अभिव्यक्ति का तरीका है. अगर दो लोग बात कर रहे हैं तो मैं उसे कुछ इस तरह देखूँगा कि वो आपके अंदर किसी तरह की हलचल पैदा करे." वह समझाते हैं, "मतलब है उम्मीदों से उलटा करना. अभिनेत्री इस तरह बात कहे जिस तरह आपने सोचा भी न हो, संगीत ऐसे समय आए जब आपने उम्मीद ही न की हो, कैमरा इस तरह के अप्रत्याशित दृश्य दिखाए जिनकी आपने कल्पना भी न की हो." "इसीलिए मुझे बीच में हास्य डालना मुश्किल लगता है. हास्य से अब तक बनने वाला तनाव कम हो जाता है और फिर आपको पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ती है." "डर यानी जिसके बारे में आप नहीं जानते. अनदेखे, अनजाने का डर. यही डर की सही परिभाषा है. हमें जंगलों से डर लगता है क्योंकि हमें उनकी पूरी जानकारी नहीं है." श्यामलन का मानना है कि सफल थ्रिलर बनाने का मूल-मंत्र यही है "साधारण चीज़ों को असाधारण, अप्रत्याशित बना देना." अब कब तक उनका ये फार्मूला लोगों की उम्मीदों पर ख़रा उतरता रहेगा, ये देखना काफी दिलचस्प होगा. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||