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विवाहेतर संबंधों पर फ़िल्मों का बोलबाला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक ज़माना वह भी था जब विवाहेतर संबंधों की चर्चा से भी लोग घबराते थे. हालाँकि तब भी 'गुमराह' जैसी फ़िल्में रिलीज़ हुईं और सफल भी रहीं. लेकिन अब वक़्त बदल गया है. और यह प्रवृत्ति हिंदी फ़िल्मों में तो खुल कर सामने आ रही है. अभी हाल ही में विवाहेतर रिश्तों पर एक के बाद एक कई फ़िल्में रिलीज़ हुई हैं. कुछ समय पहले आई 'जिस्म' में बिपाशा बासु और जॉन अब्राहम ने इन संबंधों को जिया और दर्शक इस फ़िल्म को देखने के लिए टूट पड़े. पूजा भट्ट की इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफ़िस पर भारी धूम मचाई.
फ़िल्म ने बिपाशा बासु को भी एक नई पहचान दी और लोगों ने इस फ़िल्म में उन्हें एक अभिनेत्री के तौर पर भी मान्यता दे दी. अभी हाल ही में रिलीज़ हुई 'मर्डर' भी एक ऐसी ही फ़िल्म है. हॉलीवुड की फ़िल्म 'अनफ़ेथफ़ुल' पर आधारित इस फ़िल्म को एक थ्रिलर के तौर पर पेश किया गया. मल्लिका शेरावत, अश्मित पटेल और इमरान हाशमी की यह फ़िल्म भी दर्शकों ने बेहद सराही. कलियों का चमन...वीडियो से मशहूर हुईं मेघना नायडू ने 'हवस' में कुछ इसी तरह के रोल को जिया. इस फ़िल्म में उनका साथ दिया शहवार अली और तरुण अरोड़ा ने. इस होड़ से मनीशा कोइराला भी पीछे नहीं रहीं.
उन्होंने 'तुम' में करण नाथ के साथ विवाहेतर संबंधों को एक नई परिभाषा दी. लेकिन फ़िल्म दर्शकों के गले नहीं उतरी. इसी कड़ी की नई फ़िल्म है 'मस्ती'. इसे एक कॉमेडी के तौर पर प्रदर्शित किया गया है और सुना है यह लोगों को पसंद भी आ रही है. इस फ़िल्म में जो बात अन्य फ़िल्मों से हट कर है वह यह कि इसमें पत्नी नहीं बल्कि पति इस तरह के संबंधों को जीना चाहते हैं. विवेक ओबेरॉय, आफ़ताब शिवदसानी और ऋतेश देशमुख तीन ऐसे पतियों की भूमिकाएँ निभा रहे हैं जिन्हें 'घरवाली' से ज़्यादा 'बाहरवाली' आकर्षित लगती है. |
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