मैं धर्म के ठेकेदारों से नहीं डरता: इरफ़ान

इरफ़ान ख़ान

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बॉलीवुड अभिनेता इरफान ख़ान ने जानवरों की क़ुर्बानी को लेकर दिए बयान पर क़ायम हैं.

<link type="page"><caption> शुक्रवार को किए एक फ़ेसबुक पोस्ट में</caption><url href="https://www.facebook.com/IrrfanKhan/photos/a.1600088546902694.1073741828.1593420754236140/1744798042431743/?type=3" platform="highweb"/></link> इरफ़ान ख़ान ने लिखा, "प्लीज़ भाइयों, जो मेरे बयान से दुखी हैं, या तो वो आत्मविश्लेषण के लिए तैयार नहीं है या नतीजे पर पहुंचने की जल्दी में हैं. मेरे लिए धर्म व्यक्तिगत आत्मविश्लेषण के बारे में है. ये करुणा, ज्ञान और संयम का स्रोत है न की कट्टरपंथ और रूढ़िवाद का."

उन्होंने लिखा, "मैं धर्मगुरुओं से नहीं डरता. ख़ुदा का शुक्र है कि मैं ऐसे देश में नहीं रहता जहां धार्मिक ठेकेदारों का राज चलता हो."

इरफ़ान ख़ान ने अपनी फ़िल्म मदारी के प्रोमोशन के दौरान कहा था, "क़ुर्बानी का मतलब अपनी कोई प्यारी चीज़ क़ुर्बान करना होता है. ये नहीं कि बाज़ार से आप कोई दो बकरे ख़रीद लाए और उनको क़ुर्बान कर दिया."

इरफ़ान ख़ान

उन्होंने कहा था, "हमारी बहुत सी परंपराएं हैं, बहुत से त्यौहार हैं लेकिन हम त्यौहारों के असली मायने भूल गए हैं. मैं कहता हूँ कि हमें परंपराओं और त्यौहारों के मायने समझने होंगे और ये समझना होगा कि वो क्यों मनाए जाते हैं."

इरफ़ान ख़ान के बयान की कुछ लोगों ने आलोचना की थी.

लेकिन इरफ़ान के ताज़ा पोस्ट पर उन्हें ख़ूब समर्थन मिल रहा है. सोशल मीडिया पर उनका स्टेट्स भी पोस्ट किए जाने के आधे घंटे की भीतर ही चार सौ से ज़्यादा बार शेयर किया गया.

पीयूष दीक्षित ने टिप्पणी की, "ये सभी धर्मों के बारे में सही है, शायद ये धर्मों से आगे बढ़कर और भारतीय होकर सोचने का वक़्त है. धर्म के नाम पर देश बर्बाद हो रहा है."

वहीं अथर आलम ने लिखा, "मैं आपका प्रशंसक हूँ लेकिन इस विषय पर आपको समझना होगा कि क़ुर्बानी कैसे शुरू हुई और क़ुर्बानी के बाद इस्लाम के अनुसार क्या किया जाना चाहिए."