फ़ैशन इंडस्ट्री में बंद हो नस्लभेद: नाओमी कैंपबेल

"फ़ैशन इंडस्ट्री में नस्लभेद होता है और इस पर रोक लगनी चाहिए." ये कहना है ब्रितानी सुपरमॉडल नाओमी कैंपबेल का.
नाओमी सिंगापुर में आयोजित डिजिटल फ़ैशन वीक में हिस्सा लेने पहुंची थीं.
वहां बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "ये एक बड़ा मुद्दा है. हमने साल 2009 में भी ये बात उठाई थी लेकिन इसे उपेक्षित कर दिया गया. बहुत कम लोगों ने हमारी बात सुनी."
नाओमी ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले विभिन्न फ़ैशन शोज़ में सिर्फ़ छह फ़ीसदी काले मॉडल और नौ फ़ीसदी ही एशियाई मॉडल होती हैं. हमें सवाल करना चाहिए कि ऐसा क्यों होता है.
वो कहती हैं, "हम किसी से लड़ना नहीं चाहते, लेकिन ये एक ऐसा मुद्दा है जिस पर लोगों को मिल बैठकर विचार करना चाहिए कि इसे कैसे दूर किया जा सकता है. फ़ैशन इंडस्ट्री में उस दिन का आना बहुत ज़रूरी है जब किसी मॉडल को इस वजह से तवज्जो दी जाए कि वो कितनी सुंदर और टैलेंटेड है. ना कि उसकी त्वचा के रंग के आधार पर उसे सेलेक्ट या रिजेक्ट किया जाए."
'मैंने भी झेला भेदभाव'
क्या कभी नाओमी को ख़ुद भेदभाव का शिकार होना पड़ा?
इसके जवाब में नाओमी ने कहा, "हां, लेकिन मैं अब उसके बारे में ज़्यादा बात नहीं करना चाहती. मैंने उस बात को अपनी मज़बूती बनाया. उस भेदभाव से मुझे लड़ने की और अपने आपको प्रेरित करने की ताक़त मिली."
नाओमी ने बताया कि वो मुहिम चला रही हैं ताकि फ़ैशन इंडस्ट्री को 'नस्लभेद मुक्त' बनाया जा सके.
उन्होंने बताया कि कई एशियाई अश्वेत मॉडलों ने उनसे अपनी पीड़ा बयां की कि कैसे बड़े-बड़े फ़ैशन डिज़ाइनर उनसे भेदभाव करते हैं. तब उन्होंने तय किया कि वो इस मुद्दे पर कुछ करेंगी और भेदभाव का शिकार होने वाली इन मॉडलों के हक़ की लड़ाई लडेंगी.
43 साल की नाओमी ने मॉडल बनने से पहले कुछ म्यूज़िक वीडियो में काम किया था. 80 के दशक के आख़िर से उनके करियर का सितारा चमकना शुरू हुआ और 90 के दशक में वो चोटी की मॉडल बन गईं जब कई अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं के कवर पेज पर उनकी तस्वीरें छपीं.
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