आज की बॉलीवुड फ़िल्में वन नाइट स्टैंड की तरह: इरफ़ान

अभिनेता इरफ़ान बॉलीवुड के मौजूदा दौर से ज़रा भी ख़ुश नहीं है. बीबीसी एशियन नेटवर्क से बात करते हुए उन्होंने कहा, "आज की फ़िल्में वन नाइट स्टैंड की तरह हो गई हैं. आप उसे देखते हैं और भूल जाते हैं. मुझे इस तरह का सिनेमा ज़रा भी पसंद नहीं है."
इरफ़ान की हालिया रिलीज़ फ़िल्म 'लंचबॉक्स' है और इसे समीक्षकों की काफ़ी सराहना मिली है. ये फ़िल्म इस महीने होने वाले लंदन फ़िल्म फ़ेस्टिवल में चुनी गई एकमात्र भारतीय फ़िल्म है.
इरफ़ान के मुताबिक़ बॉलीवुड फ़िल्मकारों के पास कल्पनाशीलता की सख़्त कमी है.
वो कहते हैं, "फ़िल्मों में गाने बिना किसी रचनात्मकता के इस्तेमाल किए जाते हैं. वो बोझ की तरह हो गए हैं. यही वजह है कि पश्चिमी देशों के दर्शक हमारी फ़िल्मों से जुड़ ही नहीं पाते."
भारतीय सिनेमा ने इस साल 100 बरस पूरे कर लिए हैं लेकिन इरफ़ान के मुताबिक़, "भारतीय सिनेमा 100 साल इसलिए पूरे कर पाया क्योंकि हमारे पास मनोरंजन का कोई और साधन नहीं है."
बीते दौर के मुरीद

हालांकि इरफ़ान बीते दौर की फ़िल्मों के मुरीद हैं. वो कहते हैं, "50 और 60 के दशक में हमारी फ़िल्मों की एक विशिष्ट भाषा हुआ करती थी. गाने फ़िल्मों की मज़बूती हुआ करते थे. बड़े क्रिएटिव तरीक़े से उनका इस्तेमाल होता था. लेकिन अब वो बात नहीं. हम अपनी विश्वसनीयता खोते जा रहे हैं."
इरफ़ान मानते हैं कि पुराने भारतीय फ़िल्मकारों ने शानदार काम किया और उनकी फ़िल्में इसलिए सराही गईं क्योंकि वो विशुद्ध भारतीय हुआ करती थीं और उनमें जो मुद्दे उठाए जाते थे वो देश के लोगों से जुड़े होते थे.
इरफ़ान कहते हैं, "मैं वैसी फ़िल्में करने की कोशिश करता हूं जिनका दर्शकों पर लंबे समय तक असर रहे. फ़िल्म देखने के बाद भी वो उनके ज़ेहन में ताज़ा रहे."
'लंचबॉक्स' को तमाम तारीफ़ मिलने के बाद भी ये ऑस्कर पुरस्कारों की दौड़ में शामिल नहीं हो सकी. भारत की तरफ़ से गुजराती फ़िल्म 'द गुड रोड' ऑस्कर के लिए भेजी जा रही है.
वैसे इसे लेकर ख़ासा विवाद भी हुआ था और लंचबॉक्स के निर्देशक रितेश बत्रा ने बीबीसी से बात करते हुए इस बारे में नाराज़गी भी जताई थी.
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