दिलीप कुमार से दो बातों में पीछे थे अमिताभ: कादर ख़ान

मशहूर फ़िल्म अभिनेता <link type="page"><caption> अमिताभ बच्चन</caption><url href="Filename: http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2013/07/130702_amitabh_bachchan_remake_bollywood_pkp.shtml" platform="highweb"/></link> लंबे अरसे से हिन्दी फ़िल्मों में काम कर रहे हैं और अपने फ़िल्मी सफ़र में उन्होंने हर तरह का किरदार निभाया है.
उन्हें सदी का महानायक भी कहा जाता है. लेकिन क्या आप ये सोच सकते हैं कि ये महानायक किसी और अभिनेता से कभी पीछे रहा हो. अगर मशहूर संवाद लेखक और चरित्र अभिनेता कादर ख़ान की मानें तो अमिताभ बच्चन गुज़रे ज़माने के हरदिल अजीज़ कलाकार दिलीप कुमार कुछ बातों में पीछे थे.
कादर ख़ान ने अमिताभ बच्चन के साथ कई फ़िल्मों में काम किया है. हाल ही में मुंबई में मीडिया से रूबरू हुए कादर ख़ान कहते हैं कि ऐसी दो बाते हैं जिनमें अमिताभ बच्चन दिलीप कुमार से पीछे थे.
रोना और हंसना

कादर खान के मुताबिक होने और हंसने के मामले में दिलीप कुमार अमिताभ से आगे हैं.
वो कहते हैं, ''मैं मानता हूं कि अमिताभ सभी लोगों से दो कदम आगे रहे हैं लेकिन दो बातों में वो दिलीप कुमार से पीछे हैं. मैंने उनसे कहा कि अगर वो एक बेहतरीन कलाकार बनना चाहते हैं तो उन्हें दिलीप कुमार की तरह रोना और हंसना सीखना होगा.''
अपनी बात को पूरा करते हुए कादर ख़ान कहते हैं, ''मर्द का रोना और मर्द का मुस्कुराना दो लाजवाब चीज़ें हैं. अगर ये दोनों चीज़ें ढंग से न हों तो न तो मर्द रोता हुआ अच्छा लगता है और न ही हंसता हुआ. दिलीप कुमार ने अभिनय के इन दोनों पहलुओं पर ऐसी महारत हासिल की कि लोग उनके दीवाने हो गए.''
कादर ख़ान कहते हैं कि दिलीप कुमार के इसी स्टाइल को देखते देखते अमिताभ बच्चन ने भी इन दोनों बातों पर अपनी पकड़ बनाई.
वो कहते हैं, ''अमिताभ के पास अच्छी आवाज़ थी, देखने में भी वो बहुत अच्छे थे. लंबा कद था. अच्छा नाच लेते थे और अच्छी फ़ाइट भी कर लेते थे, लेकिन उन्हें रोने और मुस्कुराने में दिक्कत होती थी. रोने और हंसने के मैदान में अमिताभ ने दिलीप साहब से बहुत कुछ सीखा. हमने अमिताभ को बाध्य किया कि वो दिलीप कुमार से सीखें.''
समय के पाबंद अमिताभ
अमिताभ बच्चन ने सिर्फ रोने और हंसने में ही महारत हासिल नहीं कि बल्कि समय के पाबंद होने के कारण वो फ़िल्म इंडस्ट्री में एक लंबे समय तक चोटी पर बने रहे.
अमिताभ बच्चन की इस आदत की तारीफ़ करने से खुद को रोक नहीं पाए कादर ख़ान. वो कहते हैं, ''अगर फ़िल्म इंडस्ट्री में आपको अपना नाम कमाना है तो आपको वक़्त की कद्र करनी होगी. अमिताभ बच्चन से लोगों को सीखना चाहिए. अमिताभ हमेशा फ़िल्म सेट पर समय से पहुंच जाते थे. जीतेंद्र भी अमिताभ की ही तरह समय के पाबंद रहे हैं.''
कादर ख़ान ने समय के पाबंद अमिताभ बच्चन और जीतेंद्र के साथ तो काम किया ही साथ ही देर से आने के लिए मशहूर गोविन्दा के साथ भी उन्होंने कई फ़िल्में की हैं.

<link type="page"><caption> गोविन्दा</caption><url href="Filename: http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2012/03/120302_govinda_pn.shtml" platform="highweb"/></link> के बारे में कादर ख़ान कहते हैं, ''एक बार गोविन्दा ने अपनी कलाई पर बंधी घड़ी मुझे दिखाते हुए कहा कि कादर साहब देखिए ये घड़ी 40 लाख की है. मैंने गोविन्दा से बस ये ही कहा कि अगर तुम समय का सही उपयोग न कर पाओ तो इस 40 लाख की घड़ी का क्या फ़ायदा.''
कादर ख़ान एक लम्बे अरसे से फ़िल्मी परदे से दूर हैं लेकिन वो एक बार फिर से सिल्वर स्क्रीन का रुख करना चाहते हैं.
आजकल कॉमेडी के नाम पर बन रही फ़िल्मोंसे वो बड़े निराश हैं.
कादर ख़ान कहते हैं, ''जहां मैंने फ़िल्में करनी छोड़ी थी लगता है उस स्तर से कोई ऊपर ही नहीं उठ पाया है. लगता है मुझे इंडस्ट्री में चार पांच साल और काम करना होगा ताकि हमारी कॉमेडी फ़िल्मों को कुछ भला हो पाए.''
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml " platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="http://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












