जिन्होंने राजेश खन्ना और बिग बी के लिए सीटी बजाई
- Author, वैभव दीवान
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बचपन में नागेश सुर्वे जब सीटी बजाते थे तो उनकी दादी बोलती थी बेटा सीटी मत बजा साँप आ जाएगा.
उनको नहीं पता था कि सीटी बजाने का यही हुनर सुर्वे को बॉलीवुड की फ़िल्मी दुनिया में नाम और शोहरत दिलाएगा.
सुर्वे ने 16 साल की उम्र से सीटी से धुन निकालने के हुनर को अपना पेशा बना लिया. अभी उनकी अम्र 64 साल है.
हिंदी फ़िल्मों में राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, आमिर ख़ान और पिछले साल की सुपरहिट फ़िल्म 'बर्फी' में रणबीर कपूर के लिए उन्होंने सीटी बजाई.
उन्होंने जूली फ़िल्म के लिए पहली बार सीटी बजाई थी, जिसका एक गाना 'दिल क्या करे, जब किसी को किसी से प्यार हो जाए' काफी लोकप्रिय हुआ.
सीटी से प्यार
इसके बाद नागेश ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उनके पास एक के बाद एक फ़िल्मों के प्रस्ताव आते गए. अभी 64 साल की उम्र में उनके पास 1500 फ़िल्मों में सीटी की धुन देने का रिकॉर्ड है.
नागेश पहले ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने इतनी सारी फ़िल्मों में सीटी की धुन दी है. बहुमुखी प्रतिभा के धनी नागेश एक पेशेवर सितार वादक हैं. वह वॉयलिन भी बजाते हैं.
सीटी से परिवार नहीं चल सकता
नागेश चालीस सालों से फ़िल्मों में सीटी के ज़रिए धुन देने का काम कर रहे हैं. वह कहते हैं, "सिर्फ़ सीटी बजाकर परिवार का पेट नहीं पाला जा सकता है. फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के लिए बैकअप होना बहुत ज़रूरी है."
नागेश के मुताबिक़, "अगर मैं केवल सीटी बजा रहा होता तो मेरे लिए बहुत मुश्किल होती. मेरे लिए यह एक शौक है, जिसका मुझे फ़िल्मों में उपयोग करने का अवसर मिला. रिक्शे वाले से लेकर गाड़ी चलाने वाले लोग रास्ते पर हमारे देश में सीटी बजाते हैं. लेकिन सीटी का सही इस्तेमाल कम ही लोग करते हैं."
नागेश कहते हैं कि बचपन में लड़कियों को छेड़ने के लिए सीटी बजाता था तो बड़े लड़कों से चॉकलेट मिलती थी लेकिन अब उन्हें लगता है कि राह चलते सीटी बजाना बुरा है.
चिड़ियों की चहचहाहट

नागेश कहते हैं, "सीटी बजाना बहुत आसान है. इसके लिए किसी तरह के प्रशिक्षण की ज़रूरत नहीं होती. मुँह से हवा फूँकने भर से सीटी बजती है. केवल हमें उसे शेप देने की ज़रूरत होती है."
नागेश कहते हैं कि सीटी कई तरह की होती है लेकिन यह संगीत निर्देशक पर निर्भर करता है कि उसे किस तरह की सीटी वाली धुन चाहिए?
शाहरुख़ ख़ान की फ़िल्म पहेली के बैकग्राउण्ड में चिड़ियों के चहचहाने की आवाज़ नागेश की सीटी से निकली थी.
आजकल इलेक्ट्रॉनिक वाद्यों के चलते सीटी बजाने के लिए इंसानों की ज़रूरत नहीं है. इन यंत्रों के ज़रिए सीटी की अलग-अलग धुनें निकाली जा सकती हैं.
आपका फ़ोन और मेरी सीटी
नागेश इस बात से नाख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहते हैं कि आप कंप्यूटर से सीटी की धुन तो निकाल सकते हैं, लेकिन उसमें इंसानी भाव कहां से लाएंगे? सुख और दुख के भावों को कंप्यूटर कैसे जान सकता है?
सीटी की धुनों से संगीत प्रेमियों को लुभाने वाले नागेश कभी न कभी आपके मोबाइल की रिंगटोन बने होंगे. फ़िल्म फ़ना का “चाँद सिफारिश” या फ़िल्म “कुछ-कुछ होता है” की सिग्नेचर धुनों ने लोकप्रियता की ऊंचाइयों को छुआ.
यह सीटी के धुनों की उड़ान कही जा सकती है कि सुर्वे ने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल से लेकर अनु मलिक तक और जतिन ललित से लेकर प्रीतम तक जाने-माने संगीतकारों की धुनों में अपनी सीटी से जान डाली.
<bold>(<link type="page"><caption> बीबीसी हिन्दी</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और क्लिक करें <link type="page"><caption> ट्विटर </caption><url href="https://twitter.com/bbchindi" platform="highweb"/></link>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












