बच्चन की बेटी तो हूं नहीं: नेहा शर्मा

"मैंने अपने लिए कोई सीमाएं नहीं बनाई हैं.वैसे भी मैं अमिताभ बच्चन की बेटी तो नहीं हूं कि सीमाएं बनाने के बाद भी मेरे घर के सामने निर्माताओं की लाइन लगी रहे."
ऐसा कहना है अभिनेत्री नेहा शर्मा का जिनकी फिल्म 'जयंताभाई की लव स्टोरी' शुक्रवार को रिलीज़ हो रही है.
बॉलीवुड में स्टार परिवार से जुड़े कलाकारों के लिए परिस्थिति जितनी आसान होती हैं शायद इंडस्ट्री में बाहर से आने वालों के लिए थोड़ी मुश्किल.
नेहा ने ऐसा ही कुछ कहा जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होने बोल्ड सीन को लेकर कुछ सीमाएं बना रखी हैं. नेहा कहती हैं"मैं ये नहीं कह सकती कि मैं ये करुंगी और ये नहीं.मैं इतनी लकी नहीं हूं. इसलिए मैं कोशिश करुंगी कि जितना कुछ कर सकती हूं सहज होकर करुं.मैंने कोई लाइन नहीं बनाई है और ना ही आगे के लिए सोचा है."
वहीं 'राऊडी राठौड़' और 'सन ऑफ सरदार' जैसी हिट फिल्मों का हिस्सा रही सोनाक्षी सिन्हा ने कई बार मीडिया के सामने साफ किया है कि <link type="page"> <caption> वो अपने दायरे में रहकर ही रोल करेंगी.</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2012/05/120522_sonakshi_pkp.shtml" platform="highweb"/> </link>
70 और 80 के दशक के मशहूर अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी सोनाक्षी की झोली में फिलहाल 'लुटेरा' और 'वन्स अप ऑन ए टाइम इन मुंबई 2' जैसी बड़ी फिल्में हैं .
"काम से ही पहचान मिलती है"
मर्डर 3 में अहम रोल निभाने वाली पाकिस्तानी अभिनेत्री सारा लोरेन भी बॉलीवुड में कदम जमाने के लिए बोल्ड दृश्यों से परहेज़ नहीं करती.
मर्डर 3 में कुछ अंतरंग दृश्यों के बारे में सारा कहती हैं "मैं एक बोल्ड लड़की हूं लेकिन ऐसे सीन मैंने पहले कभी नहीं किए हैं.पाकिस्तान में मैंने काम किया है और वहां पर जब लोग कोई किसिंग सीन देखते हैं तो काफी पर्सनल हो जाते हैं कि ये कैसे कर लिया इसने.बॉलीवुड में चीज़ें अलग है."
पूजा भट्ट की फिल्म 'कजरारे' से हिंदी फिल्मों में शुरुआत करने वाली सारा के मुताबिक बॉलीवुड में टिकने के लिए उन्होंने कभी भी बॉल्ड सीन का सहारा लेकर पब्लिसिटी पाने की कोशिश नहीं की है.
सारा का मानना है "जब आप अपना काम अच्छा करते हैं तो लोग आपकी बात ज़रुर करते हैं.बॉलीवुड का सफर एक फिल्म से ज़रुर होता है लेकिन उसके बाद आपका करियर आपके रोल से पहचाना जाता है."
शायद बॉलीवुड में आना और यहां टिके रहना दो अलग अलग बातें हैं, उसी तरह जैसे शिखर पर पहुंचना औऱ वहां जमे रहना.












