गुरुजी के खिलाफ कुछ नहीं सुनती!

दिल्ली में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना पर धार्मिक गुरु आसाराम बापू के विवादास्पद बयान पर कई आपत्तियां दर्ज हुई हैं.
एक अख़बार के मुताबिक पीड़िता के भाई ने आसाराम के बयान पर कहा "हमारे मन में आसाराम के लिए बहुत सम्मान था पर उन्होंने बेहद ही बेतुकी बात कही है. हमारे घर में उनकी कुछ किताबें रखी हैं जो मैं दिल्ली जाते ही जला डालूंगा."
बीबीसी ने आसाराम के कुछ अनुयायियों से बात करके जानने कि कोशिश की अपने गुरु के इस वक्तव्य से उनकी आस्था पर कितना फर्क पड़ा है?
गुरु जी सच कहते हैं
35 साल की नेहा सारस्वत एक गृहणी हैं और उनका साफ कहना है कि "गुरुजी के खिलाफ मैं कुछ भी नहीं सुनती.मुझे इतना पता है कि वो जो कहते हैं सही कहते हैं और मुझे उन पर पूरा विश्वास है.मंत्रजाप से बहुत सारी विपत्तियां दूर हो जाती हैं,शायद उस लड़की की भी हो सकती थी."
मानसिक आघात
वहीं अपने घऱ के मंदिर में आसाराम की तस्वीर रखने वाले 32 साल के दुर्गेश सेन का कहना है "मैं आसाराम को बहुत मानता था.लेकिन जबसे मैंने उनके इस वक्तव्य को सुना है मुझे मानसिक आघात पहुंचा है.मैंने उनकी तस्वीर हटा दी है.ऐसी सोच का व्यक्ति गुरु क्या इंसान भी कैसा हो सकता है."
भोपाल की रहने वाली आशा चौधरी कहती हैं "हम पिछले 20 साल से आसाराम बापू के साथ हैं.गुरुजी ने क्या सोचकर ये सब कहा मुझे नहीं पता पर इन सबके बावजूद मेरा उनके प्रति सम्मान और विश्वास कम नहीं होगा."
गौरतलब है कि सोमवार को आसाराम बापू ने अपनी एक सभा में कहा था, “केवल पांच-छह लोग ही अपराधी नहीं हैं. बलात्कार की शिकार हुई बिटिया भी उतनी ही दोषी है जितने बलात्कारी. वह अपराधियों को भाई कहकर पुकार सकती थी. इससे उसकी इज्जत और जान भी बच सकती थी. क्या ताली एक हाथ से बज सकती है, मुझे तो ऐसा नहीं लगता.”
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