फैशन की चकाचौंध के पीछे स्याह सच्चाई

मॉडलिंग देखने में बहुत चकाचौंध से भरपूर पेशा लगता है, लेकिन इसके कई स्याह पहलू हैं जिसमें बहुत उत्पीड़न और पक्षपात होता है.
जब भी आप काम की बदतर परिस्थितियों की बात करते हैं तो बेशक उनमें मॉडल्स को शामिल नहीं किया जाता है.
लेकिन सच कुछ और है.
अब मेरी उम्र 30 साल है और मैंने अपनी आधी जिंदगी बतौर मॉडल गुजारी है. 14 साल की उम्र में स्कूल से आते समय एक फोटोग्राफर की मुझ पर नजर पड़ी और मॉडलिंग का सिलसिला शुरू हो गया.
चकाचौंध का मतलब
मैं अपने करियर में खासी भाग्यशाली रही और कई बड़े ब्रैंडों के चेहरे के तौर पर मुझे पेश किया. मुझे मॉडलिंग में मजा आता है. इससे न सिर्फ मेरा जीवन चलता है बल्कि ये मुझे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाता है.

ज्यादातर मुझे इस काम में मजा आता है. इसलिए मेरे पास इस पेशे के बारे में नकारात्मक बोलने की वजह नहीं है.
लेकिन फिर कुछ वर्षों पहले मैंने फैसला किया कि इस पेशे में दूसरी मॉडलों के साथ जो ज्यादती होती है, मैं उस पर और नहीं चुप रह सकती हूं. इसे मैंने खुद भी देखा है.
2010 में मैंने एक डॉक्यूमेंट्री ‘पिक्चर मी’ रिलीज की जिसमें मेरे और अन्य मॉडल्स के अच्छे-बुरे अनुभवों को पेश किया गया है.
ये डॉक्यूमेंट्री फोटो शूट और फैशन शोज़ के दौरान छोटी से वीडियो कैमरे से पांच वर्षों में ली गई क्लिपों का नतीजा है. हमारे पास ऐसी लगभग 300 घंटों की फुटेज है.
दुर्भाग्य से यौन उत्पीड़न तो बहुत ही आम हैं. एक मॉडल बताती है कि कैसे फैशन जगत के एक नामी फोटोग्राफर ने उससे अपने कपड़े उतारने को कहा. बाद में फोटोग्राफर ने अपने भी कपड़े उतार दिए और मॉडल से कहा कि वो उसे यौन रूप से संवेदनशील जगहों पर स्पर्श करे.
इस फिल्म में पहली बार मॉडल्स ने फैशन जगत के बारे में खुल कर अपनी राय रखी, जो शायद ही कभी सामने आती है.
हमारी फैशन इंडस्ट्री मॉडल्स के वजन और शरीर को लेकर कई बार बहुत ही सतही आलोचना को बढ़ावा देती है. हमें बहुत बार सुनने को मिलता है, “हैमबर्गर खाया करो.”
बूढ़ी नहीं होती मॉडल्स

ये सब जानते हैं कि रैंप पर दुबली पतली मॉडलों की ही मांग है. लेकिन हम इस बारे में कम ही जानते हैं कि फैशन उद्योग लंबे समय से बच्चों पर चल रहा है, क्योंकि किशोरावस्था से जवानी में दाखिल होते उनके शरीर की फैशन जगत में मांग है.
फैशन में "पीटर पैन" सिंड्रोम की अकसर चर्चा होती है. जैसे ही आप पर उम्र का असर दिखने लगता है तो आप से अत्यधिक डाइटिंग करने को कहा जाता है. अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो आपकी जगह आपसे कम उम्र की कोई मॉडल ले लेगी.
इसलिए मॉडल कभी बूढी नहीं होती हैं.
मेरी दोस्त मॉ़डल एमी लेमॉन्स ने 12 साल की उम्र से ही महिलाओं के परिधानों की मॉडलिंग शुरू कर दी थी. जब वो इतालवी वॉग के आवरण पर पृष्ठ पर छपीं तो रातों रात सुपरमॉडल बन गईं.
उस वक्त वो सिर्फ 14 साल की थी.
लेकिन इसके तीन साल बाद ही उनका शरीर भारी होने लगा. न्यूयॉर्क के एक एजेंट ने उन्हें सलाह दी कि दिन में सिर्फ एक राइस केक खाएं. और अगर इससे भी फर्क न पड़े तो आधा राइस केक खाइए.
एमी ने मुझे भी बताया कि कैसे उनसे दुबली होने के लिए कहा जा रहा है.
कब बदलेगी तस्वीर
फैशन जगत में इस बात की कोई पाबंदी नहीं है कि व्यस्क लोगों के कपड़ों की मॉडलिंग कितनी उम्र की मॉडल से कराई जाए. निजी तौर पर मेरी राय है कि व्यस्क लोगों के कपड़ों की मॉडलिंग व्यस्क मॉडल्स से ही कराई जानी चाहिए.

बात यह नहीं है कि सिर्फ 18 वर्षीय मॉडल्स को ही काम करने दिया जाए, लेकिन काम की परिस्थितियों को बेहतर करने की जरूरत है जिनका खमियाजा बहुत बार मॉडल्स को उठाना पड़ता है.
जिन मॉडल्स से मेरी बात हुई, उन्हें अपने काम से प्यार है, लेकिन इसमें होने वाला पक्षपात और उत्पीड़न किसी को भी पसंद नहीं होगा.
फरवरी 2012 में अमरीका के फोर्डहम लॉ स्कूल के फैशन लॉ इंस्टीट्यूट में मैंने अन्य मॉडल्स के साथ मिल कर अमरीका की फैशन इंडस्ट्री में काम कर रही मॉडल्स का एक ‘मॉडल एलायंस’ बनाया.
मई में हम वॉग पत्रिका के सभी 19 अंतरराष्ट्रीय संस्करणों के संपादकों से मिले और वो सहमत हुए कि वो 16 वर्ष से कम उम्र की मॉडल्स को नहीं लेंगे. फैशन इंडस्ट्री अपने ढर्रे को न बदलने पर जितनी अडिग है, उसे देखते हुए ये बड़ी बात कही जाएगी.
मॉडलिंग को एक चकाचौंध वाले पेशे के तौर पर देखा जाता है. लेकिन मॉडल्स के साथ होने वाली ज्यादतियों पर ध्यान दिया जाए, उन्हें दूर करने की कोशिश की जाए. हम अगर ऐसा कर पाएं तो इससे तस्वीर बदली जा सकती है.












