शबाना पाटिल और स्मिता आज़मी !

शबाना आज़मी

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इमेज कैप्शन, एक सामाजिक संस्था भी चलाती हैं शबाना.

अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्त्ता शबाना आज़मी कहती हैं कि पैरेलल सिनेमा या नॉन-कमर्शियल फ़िल्मों में उनके काम की जब भी बात होती है तो उनकी समकालीन रहीं स्मिता पाटिल का ज़िक्र हमेशा होता है.

शबाना कहती हैं, ''जो भी लोग आर्ट फ़िल्मों को याद करते हैं वो ये मानते हैं कि मुझे और स्मिता को अलग करना नामुमकिन है. अगर मैं कहूं कि मैं और स्मिता एक ही थाली के चट्टे-बट्टे थे तो ये गलत नहीं होगा. आज तक मुझे ऐसा को भी इन्सान नहीं मिला जिसने मेरी फ़िल्मों की, मेरे काम की बात की और उसने स्मिता का नाम नहीं लिया.''

शबाना कहती हैं, ''एक वक़्त था जब अगर मैं शबाना आज़मी की जगह अपना नाम शबाना पाटिल बोल देती और स्मिता पाटिल ख़ुद को स्मिता आज़मी बताती तो किसी को भी कुछ अजीब नहीं लगता. ऐसा था हमारा रिश्ता.''

शबना आज़मी ने अपनी और स्मिता पाटिल की गहरी दोस्ती का ज़िक्र उस वक़्त किया जब हाल ही में वो मुंबई में पत्रकारों से रूबरू हुई.

मौका था 'गर्ल चाइल्ड' के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाना. शबाना एक सामाजिक संस्था चलाती हैं जो लड़कियों के सशक्तिकरण के लिए काम करती है.

इस मौके पर संस्था के 'गुडविल ऐम्बैसडर' अभिनेता रणबीर कपूर भी मौजूद थे.

अब शबाना आज़मी की संस्था काम तो लड़िकयों के सशक्तिकरण के लिए करती है और इसका चेहरा हैं रणबीर कपूर, भला ऐसा क्यों? इस सवाल का जवाब शबाना चाहती थी कि खुद रणबीर दें.

तो जवाब देते हुए रणबीर बोले, ''मुझे सच में नहीं पता कि शबाना जी ने मुझे ही क्यों चुना, लेकिन जहां तक इस संस्था के लिए एक पुरुष को चुनने की बात है तो मेरी भी एक बहन है और मेरे माता पिता ने हमेशा ही हम दोनों को एक जैसी परवरिश दी. मैं तो कहूंगा कि मेरी बहन को मेरे माता पिता ने मुझसे ज़्यादा तवज्जो दी है. मुझे लगता है हर परिवार को अपने बच्चों को इसी तरह की परवरिश देनी चाहिए.''

साथ ही रणबीर ये भी कहते हैं कि लड़का और लड़की में भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए. वो कहते हैं, ''ऐसा नहीं होना चाहिए कि लड़कों को ज़्यादा मौके मिलें और लड़कियों को कम. दोनों को बराबर मौके मिलने चाहिए. मुझे तो लगता है लड़कियां हर मामले में लड़कों से आगे होती हैं. ज़्यादा प्रतिभाशाली होती हैं.''

रणबीर लड़कियों के जज़्बे की भी तारीफ करते नहीं थकते. रणबीर कहते हैं, ''लड़कियों में, औरतों में ज़िन्दगी को जीने का जो जज़्बा होता है वो बेमिसाल है. मैं तो मानता हूं कि लड़कियां लड़कों से बेहतर हैं.''