'शागिर्द बनो, उस्ताद नहीं'

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मशहूर तबला वादक ज़ाकिर हुसैन को उनके चाहने वाले 'उस्ताद' कहते हैं. लेकिन ख़ुद ज़ाकिर हुसैन को उस्ताद कहलवाना पसंद नहीं है.
वो कहते हैं, "जब मैंने तबला बजाना सीखा था तब एक छात्र था. अब भी छात्र हूं. मेरे पिताजी कहा करते थे कि बेटा कभी भी उस्ताद मत बनो. हमेशा शागिर्द बने रहो, ज़िंदगी आराम से कट जाएगी. मैं भी यही बात मानता हूं."
ज़ाकिर हुसैन 16 फ़रवरी को मुंबई में गायक और संगीतकार शंकर महादेवन के साथ एक कॉन्सर्ट में जुगलबंदी पेश करेंगे. ये पहला मौका होगा जब दोनों कलाकार एक साथ स्टेज पर परफॉर्म करेंगे.
ज़ाकिर हुसैन कहते हैं कि उन्हें अलग-अलग कलाकारों के साथ परफॉर्म करना बहुत अच्छा लगता है और वो हर किसी से कुछ ना कुछ सीखते रहते हैं.
शंकर महादेवन की तारीफ़ करते हुए ज़ाकिर हुसैन कहते हैं, "हम दोनों भाई जैसे हैं. हम लोग संगीतमय यात्रा पर निकले हुए हैं. और चाहते हैं कि श्रोतागण भी हमारे साथ इस सुरीले सफ़र के हमराही बनें."
ज़ाकिर हुसैन के मुताबिक़ शंकर महादेवन की ख्याति पूरी दुनिया में फैली है और उनके साथ जुगलबंदी को लोग बेहद पसंद करेंगे.
उन्होंने ये भी कहा कि वो चाहते हैं लोग उनके संगीत को सुनकर कुछ देर के लिए अपने सारे दुख और तकलीफ़ भूल जाएं और निर्वाण जैसी अवस्था में पहुंच जाएं.
शंकर महादेवन भी ज़ाकिर हुसैन के साथ होने वाले इस कॉन्सर्ट को लेकर बेहद उत्साहित हैं.
वो कहते हैं, "उस्ताद ज़ाकिर हुसैन जैसे महान कलाकार के साथ एक ही मंच पर बैठना मेरे लिए अपने आप में बहुत बड़ा सम्मान है. वो मेरे दोस्त, मेरे गुरु, मेरे भगवान, मेरे शुभचिंतक यानी सब कुछ हैं."












