डैनी का 75वां जन्मदिन- अमिताभ बच्चन के ठुकराए रोल को अदा करके बने बड़े स्टार

डैनी 75 बरस बॉलिवुड सिनेमा सफ़र

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    • Author, वंदना
    • पदनाम, भारतीय भाषाओं की टीवी एडिटर
बीबीसी हिंदी

डैनी पर एक नज़र

  • डैनी का असल नाम है शेरिंग फ़िंसो डेन्ज़ोंगपा
  • 1973 में बीआर चोपड़ा की धुंध से मिली पहचान
  • लता, रफ़ी, किशोर के साथ बतौर गायक काम किया
  • अग्निपथ, हम, ख़ुदागवाह में अभिनय के लिए मिली तारीफ़
बीबीसी हिंदी

बात 70 के दशक की है… हिंदी फ़िल्मों के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन उन दिनों फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने की कोशिश में थे. उन्हीं दिनों सिक्किम से आए एक्टर डैनी भी मुंबई पहुँच चुके थे और काम की तलाश में थे. तभी बीआर चोपड़ा ने अपनी नई फ़िल्म धुंध में डैनी को इंस्पेक्टर के रोल के लिए बुलाया.

डैनी ने जब कहानी सुनी तो उन्हें इंस्पेक्टर की बजाए कोई दूसरा ही रोल पसंद आया जो थोड़ा नेटेगिव था. लेकिन डैनी से कहा गया कि उस रोल के लिए तो अमिताभ बच्चन नाम के एक्टर को साइन कर लिया गया है, इसलिए वो इंस्पेक्टर का रोल ही कर लें.

20-21 साल के डैनी ने तब बीआर चोपड़ा जैसे दिग्गज निर्देशक को इंस्पेक्टर वाला रोल करने से मना कर दिया.

हालांकि जिन लोगों ने 1973 में रिलीज़ हुई फ़िल्म धुंध देखी है, वो जानते हैं कि वो छोटा सा लेकिन असरदार नेगेटिव रोल आख़िरकर डैनी ने ही किया था.

फ़िल्म धुंध से डैनी न सिर्फ़ मशहूर हुए, बल्कि उनका करियर भी चल निकला.

तब से अब तक डैनी ने अग्निपथ, हम, ख़ुदा गवाह, रोबोट और ऊंचाई जैसी 200 से अधिक फ़िल्मों में काम किया है.

13 फ़रवरी 1973 में रिलीज़ हुई धुंध के 50 साल पूरे हो गए हैं और 25 फ़रवरी को डैनी भी अपनी 75वीं सालगिरह मना रहे हैं.

डैनी 75 बरस बॉलिवुड सिनेमा सफ़र

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कैसे मिला पहला रोल

'वाइल्ड फ़िल्म्स इंडिया' को दिए एक लंबे इंटरव्यू में डैनी ने किस्मत के इस खेल के बारे में विस्तार से बताया है.

डैनी ने कहा था, "बात तब से शुरू होती है जब मैं फ़िल्म इंस्टीट्यूट ऑफ़ पूना में पढ़ाई कर रहा था. बीआर चोपड़ा ने मुझसे कहा कि जब पढ़ाई पूरी करके बॉम्बे आना तो मुझसे मिलना. जब बॉम्बे आया तो चोपड़ा जी से मिला पर उन्होंने कहा कि उस वक़्त जो फ़िल्म वो बना रहे थे उसमें मेरे लिए रोल नहीं बन पा रहा है. फिर जब उन्होंने धुंध फ़िल्म बनानी शुरू की तो मुझे बुलाया. ये बड़ी बात थी कि एक स्ट्रगलर को एक बड़े निर्माता ने बुलाया था."

"मुझे इंस्पेक्टर का किरदार दिया गया जो लंबा रोल था लेकिन मेरा दिल कह रहा था कि मैं एक दूसरा किरदार करूँ जो कम समय के लिए पर्दे पर आता है और फिर मर जाता है. लेकिन असरदार है. मैंने बीआर चोपड़ा को मना कर दिया. चोपड़ा जी हैरान थे कि ये नया लड़का उन्हें मना कर रहा है. फिर भी चोपड़ा साहब ने कहा कि थोड़ा सोच लो और फिर बताना."

"इस बीच हुआ ये कि अमिताभ बच्चन की फ़िल्म आनंद रिलीज़ हो गई और वो फ़िल्म हिट हो गई. अमित जी शायद नेगेटिव रोल नहीं करना चाहते थे तो उन्होंने फ़िल्म छोड़ दी. मैं भाग कर गया कि अब तो अमिताभ ने फ़िल्म छोड़ दी है. लेकिन चोपड़ा जी बोले हमने शत्रुघ्न सिन्हा को साइन कर लिया है. लेकिन तीन चार दिन बाद पता चला कि शत्रुघ्न सिन्हा को बाहर कर दिया क्योंकि वो समय पर नहीं पहुँचे थे."

"मुझे पता चला तो मैं फिर गया. चोपड़ा जी बोले कि तुम अभी बच्चे लगते हो और ये पति का मैच्योर रोल है. वो अपंग है. तब मैं सिर्फ 20-21 साल का था. तब तक बीआर चोपड़ा भी मुझसे तंग आ चुके थे. मैंने दाढ़ी लगाकर स्क्रीन टेस्ट दिया और बीआर चोपड़ा को लगा कि ये अच्छा काम कर सकता है. वो फिल्म लोगों को बहुत पसंद आई और इस तरह फ़िल्मों में मेरी एंट्री हुई."

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डैनी को बदलना पड़ा असली नाम

सिक्किम के रहने वाले डैनी का असल मक़सद तो सेना में भर्ती होना था, वो एनसीसी कैडेट भी थे. लेकिन उन्हीं दिनों सीमा पर चीन और भारत के बीच जंग छिड़ गई जिसमें कई भारतीय सैनिक मारे गए. इसके बाद डैनी की माँ ने उन्हें सेना में जाने से मना कर दिया.

डैनी की संगीत में रुचि थे तो दूसरे विकल्प के तौर पर वो जा पहुंचे पुणे के फ़िल्म इंस्टीट्यूट.

बॉलीवुड में पारंपिरक हीरो की छवि के बीच सिक्किम से आए डैनी उस वक़्त पुणे में और फ़िल्मी दुनिया में अपवाद की तरह थे.

2018 में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में डैनी ने बताया, "उन दिनों नाटकीय फ़िल्में बनती थीं, जिनमें सास बहू के बीच तनाव, भाइयों का मिलना-बिछड़ना, हीरो-विलेन की कहानियाँ होती थीं. कुछ शुभचिंतकों ने मुझे सलाह दी कि जिस तरह की फ़िल्में बनती हैं उसमें तुम्हारे जैसे चेहरे-मोहरे वाले चरित्र नहीं खपेंगे, इसलिए अब भी कहीं नौकरी कर लो."

उससे पहले पुणे फ़िल्म इंस्टीटयूट में भी डैनी को इसका आभास हो गया था.

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फ़िल्मफ़ेयर में दिए एक इंटरव्यू में डैनी बताते हैं, "जब मैं पुणे के फ़िल्म इंस्टीट्यूट में पढ़ने आया था तो पहले दिन सब छात्रों ने अपने नाम बताए. मैंने बोला कि मेरा नाम सेरिंग फ़िंसो डेनज़ोंगपा है. मैं सिक्किम से था और कोई मेरा नाम बोल ही नहीं पा रहा था. मुझे देखते ही मेरे क्लासमेट कहते थे शश... जैसे मैं कोई जानवर हूँ. तब जया बच्चन भी वहाँ पढ़ती थीं. उन्होंने मुझसे अपना आसान सा नाम डैनी रखने की सलाह दी."

इस तरह शेरिंग फ़िंसो डेन्ज़ोंगपा बन गए डैनी. ग़ुलज़ार ने 1971 में डैनी को 'मेरे अपने' फ़िल्म में और बीआर इशारा ने 1972 में फ़िल्म 'ज़रूरत' में एक छोटा सा रोल दिया.

डैनी आने वाले सालों में विलेन के तौर पर तो छाए ही पर उन्होंने बाइस्कोप वाला, इत्तेफ़ाक़, फ्रोज़न जैसी बहुत सारी अलग-अलग फ़िल्में भी कीं.

'अपना उसूल कहता है दाएं हाथ से जुर्म करो तो बाएं हाथ को पता भी न चले', 'कमज़ोर की दोस्ती ताक़तवर के वार को कम कर देती है. इसलिए हम हमेशा ताक़तवर के साथ हाथ मिलाता है', जैसे डैनी के कई संवाद मशहूर हुए.

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डैनी थे शोले में गब्बर के लिए पहली पसंद

अगर टाइमिंग सही होती तो शोले के गब्बर भी डैनी ही होते. जितनी शोले मशहूर है उतना ही मशहूर ये किस्सा भी कि अमजद ख़ान से पहले गब्बर का रोल डैनी को मिला था.

दरअसल उन दिनों डैनी ने फ़िरोज़ ख़ान को उनकी फ़िल्म धर्मात्मा के लिए तारीख़ें दे दी थीं और अफ़ग़ानिस्तान में शूटिंग होने वाली थी.

अफ़ग़ानिस्तान में शूटिंग करने के लिए तारीख़ें बदलना आसान नहीं था.

फ़िरोज़ ख़ान और रमेश सिप्पी के बीच बात भी हुई लेकिन डैनी ने फ़िरोज़ ख़ान को दी हुई ज़बान पर डटे रहना ठीक समझा और गब्बर सिंह का रोल अमजद ख़ान को चला गया.

लेकिन अमजद ख़ान की तरह ही विलेन के रोल में डैनी ने ख़ूब महारत हासिल की थी. 1992 में बनी फ़िल्म द्रोही में डैनी ने राघव नाम के एक ख़ूंखार अपराधी के मेंटर का रोल किया था जिसने मुझे 1973 की फ़िल्म ख़ून ख़ून की याद दिलाता है.

ख़ून ख़ून में डैनी का एक साइकॉटिक सीरियल किलर का रोल आज भी मुझे याद है- लंबे बालों वाला, एकदम सिरफिरा क़ातिल राघव.

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किशोर, रफ़ी, लता के साथ गाए हैं डैनी ने गाने

डैनी मंझे हुए एक्टर तो हैं ही साथ में एक गायक भी हैं. डैनी ने हिंदी और नेपाली फ़िल्मों में गाने गाए हैं और वो मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार, लता मंगेश्कर और आशा भोंसले जैसे गायकों के साथ.

देव आनंद की फ़िल्म 'ये गुलिस्तां हमारा' में डैनी को रोल दिया गया था. बाद में ये रोल जॉनी वॉकर को दे दिया गया लेकिन एसडी बर्मन ने फ़िल्म में जॉनी वॉकर के लिए गाना डैनी से गवाया जिसके बोल थे- मेरा नामे आवो, मेरे पाश आओ...

इसके अलावा ऋषि कपूर के साथ आई फ़िल्म नया दौर में भी डैनी ने गाने गाए- एक गाना किशोर कुमार के साथ (पानी के बदले पीकर शराब...) और दूसरा गाना था रफ़ी और आशा भोंसले के साथ (मुझे दोस्तों तुम गले से लगा लो...)

डैनी ने नेपाली फ़िल्मों में भी काम किया

नेपाली फ़िल्म साइनो को डैनी ने लिखा भी और एक्टिंग भी की. जिसे बाद में डैनी ने अजनबी नाम से दूरदर्शन पर टेलीसिरीज़ के तौर पर रिलीज़ की. आशा भोंसले के साथ उनका नेपाली गाना आगे आगे तोपई को गोला... ज़बरदस्त हिट हुआ था जिसका ब्लैक एंड व्हाइट वीडियो इंटरनेट पर उपलब्ध है.

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अग्निपथ में जमी अमिताभ-डैनी की जोड़ी

70 और 80 के दशक में डैनी ने हर बड़े हीरो (मिथुन, राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, राज कुमार) के साथ विलेन या साइड रोल के तौर पर काम किया. चाहे वो धर्मात्मा, कमांडो, प्यार झुकता नहीं हो या द बर्निंग ट्रेन.

लेकिन उस दौर के सबसे बड़े स्टार अमिताभ बच्चन के साथ डैनी का असल आमना-सामना 1990 में जाकर अग्निपथ में हुआ जिसमें कांचा चीना का किरदार आज भी मशहूर है.

इसके बाद 1991 में फ़िल्म हम में वो बख़्तावर के रोल में अमिताभ से टकराए. फिर 1992 में ख़ुदा गवाह में ख़ुदा बख़्श के रोल में. ख़ुदा बख़्श का रोल उनके विलेन वाले रूप से अलग था जिसके लिए उन्हें फ़िल्मफेयर पुरस्कार भी मिला.

हिंदी फ़िल्मों के ज़्यादातर कलाकारों से अलग दिखने वाले डैनी ने यूँ तो हर तरह का रोल किया जिसमें वो शशि कपूर से लेकर तमाम हीरो के भाई बने नज़र आते थे लेकिन डैनी फ़िल्मी निर्देशकों के दिए ऐसे रोल को लेकर हमेशा हैरान रहे.

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डैनी ने बताया था, "न्यूयॉर्क से मेथड एक्टिंग सिखाने के लिए एक टीचर आते थे. लेकिन फ़िल्मों में जब हम यथार्थ एक्टिंग करते थे तो डायरेक्टर शॉट ओके करता ही नहीं था. वो डायलॉगबाज़ी का ज़माना था. लाउड एक्सप्रेशन और लाउड मेकअप उस दौर की ख़ासियत थे. जो लोग आर्ट फ़िल्मों में रियलिस्टिक एक्टिंग करते थे उन एक्टरों को काम ही नहीं मिलता था लेकिन जो बाज़ार की माँग को ध्यान में रखकर एक्टिंग करते थे उनके पास काम ही काम था."

हिंदी फ़िल्मों में यूँ तो कितने ही विलेन और चरित्र अभिनेताओं ने अपनी जगह बनाई है लेकिन डैनी की सफलता उन सबसे कहीं अलग और अहम है. पूर्वोत्तर राज्यों से आए किसी भी कलाकार के लिए उस वक़्त ये सफलता अनोखी और अनहोनी बात थी.

आज भी गिने चुने कलाकार ही पूर्वोत्तर से आकर हिंदी फ़िल्मों में जगह बना पाए हैं- सीमा बिस्वास, आदिल हुसैन जैसे नाम इसमें गिने जा सकते हैं.

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सिक्किम के जंगलों में रहना है पसंद

मुंबई की भागम भाग से दूर डैनी अपना बहुत सारा वक़्त सिक्किम में ही बिताते हैं.

डैनी बताते हैं, "हम लोग शिकारी हुआ करते थे. ये हमारे जींस में है. हम जानवरों के पीछे भागा करते थे. लेकिन अब जबसे गाड़ियाँ आ गई हैं, एसी आ गया है, लोग टीवी के सामने बैठ जाते हैं या फिर एसी गाड़ी से सफ़र करते हैं. मैंने पैदल चलना नहीं छोड़ा है."

"मैं असल ज़िंदगी में भी सिक्किम के जंगलों में मिशैटी या दाव लिए झाड़ काटते हुए पैदल ही निकल पड़ता हूँ, पेड़ों पर चढ़ जाता हूँ. मेरी सेहत का राज़ भी यही है."

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वरिष्ठ पत्रकार रामचंद्रन श्रीनिवासन बताते हैं, "ज़ोगरिला नाम का उनका बंगला काफ़ी मशहूर है, उनकी पत्नी सिक्किम की राजकुमारी हैं. वो सिक्किम में रहकर काफ़ी ख़ुश रहते हैं. डैनी के पिता मोनेस्ट्री में मॉन्क थे और उनकी परवरिश बड़े शांत वातावरण में हुई. जिस तरह के किरदार डैनी सिनेमा में निभाते आए हैं, उनके घर का माहौल उससे उलट था."

"वो काफ़ी शांत स्वभाव हैं. फ़िल्म न करके भी वो ख़ुश रहते हैं. शायद उन्हें लगता है कि वैसे रोल मिले नहीं जिसमें उन्हें अपने अभिनय को दिखाने का मौका मिले. हाल ही में उन्होंने फ़िल्म ऊंचाई में काम किया. लेकिन इसके लिए उन्हें काफ़ी मनाना पड़ा. अनुपम खेर ने उनको मनाया, तब जाकर वो माने."

"डैनी ने ब्रैड पिट के साथ हॉलीवुड की फ़िल्म सेवेन इयर्स इन तिब्बत की थी लेकिन वो कभी इस बारे में ज़्यादा बात नहीं करते. सुभाष घई की फ़िल्म हीरो भी उन्होंने साइन की थी लेकिन सुभाष घई के साथ क्रिएटिव मतभेद होने के बाद उससे अलग हो गए."

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इमेज कैप्शन, पिछले दिनों रिलीज हुई फ़िल्म ऊंचाई के एक दृश्य में डैनी

फ़िल्म ऊंचाई में उन्होंने एक बार फिर अमिताभ बच्चन के साथ काम किया. इत्तेफ़ाक़ ही है कि ये वही अमिताभ हैं जो 1973 में आई बीआर चोपड़ा की फ़िल्म धुंध में काम करने वाले थे और वो रोल आखिरकर डैनी को मिल गया था.

और ये भी इत्तेफ़ाक़ है कि जब डैनी एक्टर बनने की पढ़ाई कर रहे थे, तो बीआर चोपड़ा उनके एग्ज़ामिनर बनकर आए और डैनी को देखकर बोले थे कि तुम बहुत अलग किस्म के एक्टर हो.

डैनी ने बचपन में अपनी पहली फ़िल्म भी नया दौर देखी थी जो बीआर चोपड़ा ने बनाई थी. और उन्हीं बीआर चोपड़ा ने डैनी को उनको पहला बड़ा फ़िल्मी रोल भी दिया.

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