अमरीश पुरी की जगह अरविंद त्रिवेदी को कैसे मिला था रावण का किरदार

    • Author, मधुपाल
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

80 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए रामानंद सागर के बेहद लोकप्रिय पौराणिक सीरियल 'रामायण' में रावण का किरदार निभाने वाले अभिनेता अरविंद त्रिवेदी का मंगलवार की रात 11 बजे निधन हो गया. 83 वर्षीय अरविंद त्रिवेदी ने अपने घर पर अंतिम सांस ली.

इस बात की जानकारी अभिनेता अरविंद त्रिवेदी की बेटी एकता ने बीबीसी को दी. उन्होंने बताया कि ''उनका निधन घर पर ही हुआ और वो किसी भी तरह से बीमार नहीं थे. लेकिन कल रात उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई. रोज़ाना की तरह ही वो कल भी हमसे हँसी मज़ाक कर रहे थे और शिव महिमा स्रोत और 'राम' नाम का जाप कर रहे थे.

मेरे पिता मुझसे हमेशा कहा करते थे कि जब भी मेरा निधन हो मुझे राम नाम का ही वस्त्र पहनाना. इसलिए हमने आज उन्हें धोती और 'राम' नाम का पीला कुर्ता पहनाया है. उनका अंतिम संस्कार बुधवार शाम सात बजे मुंबई के कांदिवली में किया जाएगा.''

रामानंद सागर के धारावाहिक 'रामायण' में रावण का रोल निभाकर अरविंद त्रिवेदी ने ख़ासी लोकप्रियता बटोरी थी. वो मूल रूप से मध्य प्रदेश के इंदौर से ताल्लुक़ रखते थे. उन्होंने 250 से भी ज़्यादा गुजराती फ़िल्मों में काम किया.

'सब चाहते थे कि अमरीश पुरी बनें रावण'

अरविंद त्रिवेदी ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि वो गुजरात में थिएटर से जुड़े थे और उन्हें पता चला कि रामानंद सागर 'रामायण' बना रहे हैं और किरदारों की कास्टिंग कर रहे हैं तो वो ऑडिशन देने के लिए गुजरात से मुंबई आए. वो केवट का किरदार निभाना चाहते थे.

उन्होंने बताया था, "इस धारावाहिक में रावण के किरदार के लिए सबकी मांग थी कि अभिनेता अमरीश पुरी को कास्ट किया जाए. मैंने केवट के किरदार के लिए ऑडिशन दिया और जब बहर निकलने लगा तो मेरी बॉडी लैंग्वेज और ऐटीट्यूड देख कर रामानंद सागर जी ने कहा कि मुझे मेरा रावण मिल गया.''

ख़ुद अरुण गोविल भी इस बात को स्वीकारते हैं कि उन्होंने और टीम ने रामानंद सागर से कहा था कि अभिनेता अमरीश पुरी इस किरदार के लिए पूरी तरह से फ़िट बैठते हैं.'

'दस किलो का मुकुट घंटों पहनना पड़ता था'

अरविंद त्रिवेदी का किरदार इतना दमदार था कि जब उनकी आवाज़ टीवी पर दशानन लंकेश के रूप में गूंजती थी, तो लगता था कि वास्तविक रावण ही छोटे पर्दे पर उतर आया है.

रावण के रूप में दिखने वाला उनका चौड़ा माथा और चेहरे पर ग़ुस्से के भाव ऐसे होते थे, मानो वो सच के रावण हों.

अरविंद त्रिवेदी ने बताया था, ''उनके लिए रावण बनना आसान नहीं था. शूटिंग के लिए तैयार होने में उन्हें पांच घंटे लगते थे.''

उनका मुकुट ही केवल दस किलो का हुआ करता था और उस पर उन्हें दूसरे कई आभूषण और भारी-भरकम वस्त्र भी पहनने होते थे.

उन्होंने बताया था, "रामायण की शूटिंग गुजरात-महाराष्ट्र बॉर्डर के पास उमरगाम में हुआ करती थी मैं हमेशा बंबई से ट्रेन पकड़ कर उमरगाम जाया करता था. ट्रेन में सीट भी नहीं मिलती थी इसलिए खड़े होकर जाना पड़ता था. लेकिन जब धारावाहिक टीवी पर आने लगा तो लोग मुझे ट्रेन में बैठने के लिए सीट दे दिया करते थे और पूछा करते थे कि अब धारावाहिक में आगे क्या होने वाला है. मैं सबसे मुस्कुरा कर कहा करता था आप इसी प्रकार धारावाहिक देखो, पता चलेगा."

'उपवास रख कर किया करता था शूटिंग'

रामायण की शूटिंग के दिनों को याद करते हुए अरविन्द त्रिवेदीने बताया था कि, "मैं असल ज़िन्दगी में भी राम भक्त और शिव भक्त हूँ इसलिए जब भी शूटिंग पर जाया करता तो पूरा दिन उपवास रखता क्योंकि मुझे इस बात का दुःख होता कि दिए हुए स्क्रिप्ट के हिसाब से मुझे श्रीराम को उल्टे-सीधे शब्द बोलने हैं."

"मैं पूरा दिन उपवास रखता और शूटिंग शुरू होने से पहले राम और शिव की पूजा आराधना करता और जब शूटिंग ख़त्म हो जाती तो कपड़े बदलकर रात को अपना उपवास खोलता. शूटिंग के दौरान यही मेरी दिनचर्या होती."

अरविंद ने शूटिंग को याद कर बताया था कि असल ज़िन्दगी में भी वो अरुण गोविल को प्रभु ही पुकारते हैं.

उन्होंने बताया था,"इस सीरियल के बाद मैं लोगों के लिए अरविंद त्रिवेदी नहीं, लंकापति रावण हो गया था. मैंने कभी नहीं सोचा था कि रावण का किरदार निभाकर मैं इतना मशहूर हो जाऊंगा और भारत ही नहीं, बल्कि विदेश में भी लोग मुझे पहचानने लगेंगे. लोग मेरा नाम याद रखेंगे, मैंने कभी नहीं सोचा था. जिस दिन सीरियल का आख़िरी एपिसोड शूट किया जा रहा था उस दिन उमरगाम और उसके आसपास के इलाक़ों से हज़ारों लोग सेट पर आ गए थे. सभी लोग उस दिन बहुत रोये थे. वो मंज़र आज भी मेरी आँखों के सामने घूम जाता है."

रामायण में रावण का किरदार निभाने के बाद अरविंद त्रिवेदी ने राजनीति में भी क़दम रखा. 1991 में अरविंद त्रिवेदी गुजरात की साबरकांठा लोकसभा सीट से सांसद चुने गए.

2002 में उन्हें भारतीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफ़सी) (CBFC)के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था.

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