फ़र्रुख़ जाफ़र का लखनऊ में निधन, 'गुलाबो-सिताबो' में अमिताभ के साथ किया था काम

बॉलीवुड की जानीमानी अदाकारा फ़र्रुख़ जाफ़र का शुक्रवार शाम लखनऊ में देहांत हो गया है.

फ़र्रुख़ जाफ़र के नाती शाज़ अहमद ने बीबीसी के सहयोगी पत्रकार अनंत झणाणे को बताया कि उनका निधन लखनऊ के सहारा अस्पताल में शुक्रवार को साढ़े सात बजे के आसपास हुआ.

फ़र्रुख़ जाफ़र बीते पांच अक्तूबर से लखनऊ के सहारा अस्पताल में भर्ती थीं. उनको ब्रेन स्ट्रोक पड़ा था जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अस्पताल में भर्ती होने के दौरान उनके फेफड़ों में भी संक्रमण हो गया था.

फ़र्रुख़ जाफ़र के परिवार ने एक बयान में कहा है "स्वंत्रता संग्राम सेनानी एस एम जाफर साहब की धर्म पत्नी और अदाकारा फ़र्रुख़ जाफ़र अब इस दुनिया में नहीं रहीं."

फ़र्रुख़ जाफ़र का जन्म 1933 में हुआ था और वे 88 साल की थीं.

उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1981 में रिलीज़ हुई फिल्म उमराव जान से की थी जिसमें वे अभिनेत्री रेखा की मां के किरदार में नज़र आई थीं.

इसके अलावा फ़र्रुख़ जाफ़र ने स्वदेश, सुल्तान, सीक्रेट सुपरस्टार, पीपली लाइव और गुलाबो-सिताबो में भी काम किया. उन्होंने मुज़फ़्फ़र अली के कुछ सीरियल्स में भी काम किया था.

साल 2020 में फ़र्रुख़ जाफ़र की फ़िल्म गुलाबो-सिताबो वीडियो प्लेटफ़ॉर्म अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई थी. उस वक्त बीबीसी संवाददाता मोहम्मद शाहिद ने उनसे बात की थी. फ़र्रुख़ जाफ़र पर 12 जून 2020 को छपी रिपोर्ट पढ़िए-

"हमारे एक बात समझ नहीं आ रही है. यहां एलुमिनियम की हंडिया पड़ी थी. वहां मिर्ज़ा की चप्पलें पड़ी थीं. यहां दो बकरियां बांध रखी हैं. सा... हमारा ही बलब मिला है निकालने के लिए."

गुलाबो-सिताबो फ़िल्म में बांके रस्तोगी (आयुष्मान खुराना) जब इस डायलॉग को बोलता है तो तुरंत दूसरी ओर से बालों में मेहंदी लगवाती, मंद-मंद मुस्कुराती और तंज़ कसती एक बूढ़ी औरत का डायलॉग गूंजता है, "अरे बल्ब न चोरी हुई, निगोड़ी जायदाद चोरी हो गई."

दिमाग़ पर ज़ोर डालो तो याद आता है कि यह वही बूढ़ी औरत है जो फ़लां-फ़लां फ़िल्म में थी.

शुक्रवार को वीडियो प्लेटफ़ॉर्म अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई गुलाबो-सिताबो में एक ओर जहां अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना के अभिनय की तारीफ़ हो रही है.

वहीं, फ़ातिमा बेगम उर्फ़ फ़त्तो बेगम के किरदार की भी ख़ूब चर्चा है जिसको फ़र्रुख़ जाफ़र ने निभाया है.

ख़ालिस लखनवी पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म में फ़र्रुख़ जाफ़र ज़रा भी किसी और दुनिया की औरत नहीं लगती है. वो जब-जब पर्दे पर आती हैं तो लगता है कि एक ओर तंज़ आने वाला है.

फ़िल्म में फ़र्रुख़ जाफ़र को बहुत ज़्यादा स्पेस नहीं मिला है लेकिन फ़िल्म उनके और उनकी हवेली 'फ़ातिम महल' के ही इर्द-गिर्द घूमते हुए ही शुरू होती है और ख़त्म भी होती है.

कौन हैं फ़र्रुख़ जाफ़र?

फ़र्रुख़ जाफ़र फ़िल्म की तरह ही आम ज़िंदगी में भी एक ज़मींदार ख़ानदान से आती हैं. जौनपुर में पैदा वो हुईं और 16-17 साल की उम्र में निकाह के बाद लखनऊ आ गईं.

पति सैयद मोहम्मद जाफ़र स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने बाद में काफ़ी समय तक पत्रकारिता की और फिर दो बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे.

लखनऊ आने के बाद फ़र्रुख़ जाफ़र इसी तहज़ीब में रच-बस गईं और यहीं से उन्होंने हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और फिर ग्रैजुएशन किया.

फ़र्रुख़ जाफ़र बीबीसी हिंदी से बताती हैं कि उन्होंने आकाशवाणी से अपने करियर की शुरुआत की थी.

वो कहती हैं कि वो लखनऊ में विविध भारती की पहली महिला एनाउंसर थीं, इसके अलावा आकाशवाणी की उर्दू सेवा के बनने के समय वो संस्थापक सदस्यों में से एक थीं.

फ़र्रुख़ की बेटी और लेखिका मेहरू जाफ़र कहती हैं, "हमारे अब्बा की पोस्टिंग वॉशिंगटन पोस्ट के संवाददाता के तौर पर दिल्ली में हुई थी. तब हमारी मां दिल्ली में आकाशवाणी में एनाउंसर के तौर पर काम कर रही थीं."

लेकिन पारिवारिक कारणों से फ़र्रुख़ आकाशवाणी से इस्तीफ़ा देकर वापस लखनऊ आ गईं.

फ़िल्मों में कैसे मौक़ा मिला?

फ़र्रुख़ जाफ़र को गुलाबो-सिताबो से पहले सुलतान, सीक्रेट सुपरस्टार, स्वदेश, पीपली लाइव में देखा जा चुका है लेकिन उनका फ़िल्मी करियर इससे भी बहुत पहले 80 के दशक में शुरू होता है.

उसका क़िस्सा कुछ यूं है जो फ़र्रुख़ जाफ़र ख़ुद हमें बताती हैं, "एक्टिंग में मेरा इंट्रेस्ट था लेकिन कभी हम कैमरे के आगे एक्टिंग करेंगे ऐसा सोचा नहीं था. हुआ यूं कि एक दावत में मैं अपने एक नौकर की नकल उतार रही थी तभी वहां मुज़फ़्फ़र अली भी मौजूद थे. वो उस समय उमराव जान बनाने की तैयारी कर रहे थे. उन्होंने मुझसे कहा कि मैं उनकी फ़िल्म में एक्टिंग करूंगी लेकिन मैंने कहा कि हमारे यहां औरतें फ़िल्में तक देखने नहीं जाती हैं और आप मुझसे एक्टिंग करने के लिए कह रहे हैं."

फिर उन्होंने एक्टिंग करने के लिए हामी कैसे भरी? इस सवाल पर वो कहती हैं कि उनके पति बेहद खुले विचारों के थे, उन्होंने किसी चीज़ के लिए उन्हें रोका नहीं.

वो बताती हैं कि कुछ लोगों को आपत्ति थी लेकिन उनके पति को कोई आपत्ति नहीं थी, इस वजह से वो एक्टिंग कर पाई.

इसके बाद फ़र्रुख़ ने उमराव जान में रेखा की मां का किरदार निभाया और फिर मुज़फ़्फ़र अली के कुछ और सीरियल्स में काम किया.

इसके बाद वो फ़िल्मों में रोल करती रहीं लेकिन हमेशा उनका किरदार या तो बेहद छोटा होता या फिर पोस्ट प्रोडक्शन में काट दिया जाता.

2004 में आई स्वदेश फ़िल्म में उन्होंने शाहरुख़ ख़ान के साथ काम किया लेकिन उन्हें असली पहचान 2010 में आई पीपली लाइव फ़िल्म से मिली. पीपली लाइव के बाद उनके पास काफ़ी फ़िल्मों के ऑफ़र आने लगे.

'अमिताभ बच्चन मेरे पसंदीदा अभिनेता रहे हैं'

फ़र्रुख़ जाफ़र कहती हैं कि अमिताभ बच्चन उनके पसंदीदा अभिनेता रहे हैं और उनकी 'सिलसिला' फ़िल्म उन्हें बेहद पसंद है.

अमिताभ बच्चन के साथ शूटिंग के अनुभवों पर वो कहती हैं, "मैं अमिताभ बच्चन के आगे बिलकुल भी नर्वस नहीं हुई. वो मुझसे बड़े मोहज़्ज़ब (सभ्य) तरीक़े से सलाम करते थे. लेकिन वो अपना रोल निभाकर चले जाते थे इसलिए ज़्यादा उनसे बातचीत नहीं हुई."

फ़त्तो बेगम के किरदार के लिए फ़र्रुख़ जाफ़र ने कितनी मेहनत की? इस सवाल पर वो कहती हैं कि उन्होंने कोई मेहनत नहीं की वो आम शख़्स की तरह उस किरदार को निभा रही थीं. इस तरह के अभिनय के लिए वो निर्देशक शुजीत सरकार का भी शुक्रिया कहती हैं.

फ़र्रुख़ की बेटी मेहरू कहती हैं कि शुजीत ने उनसे बेहतरीन तरीक़े से काम निकलवाया और उन्होंने कहा कि आप जैसी हैं, वैसी ही हमें चाहिए जिससे उनका हौसला बढ़ा और वो जैसी हैं वैसे ही कैमरे के आगे बैठ गईं.

फ़र्रुख़ ने शाहरुख़, आमिर, सलमान और अमिताभ बच्चन के साथ भी काम कर लिया. उनको किसके साथ काम करने में ज़्यादा मज़ा आया?

इस सवाल पर वो कहती हैं कि उन्हें आमिर के साथ काम करने में ज़्यादा मज़ा आया क्योंकि उनकी ओर से उन्हें बहुत तवज्जो मिली और उनकी फ़िल्म पीपली लाइव भी ख़ूब हिट हुई.

हालांकि, वो कहती हैं कि उन्हें उनकी पहली फ़िल्म उमराव जान सबसे ज़्यादा पसंद है.

उनकी बेटी मेहरू कहती हैं कि उनकी मां को ख़ुद को पर्दे पर देखना ज़्यादा पसंद है इसलिए उन्हें एक्टिंग भी पसंद है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)