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अनुपम खेर को क्यों नहीं मिल रही हैं हिंदी फ़िल्में?
- Author, सुप्रिया सोगले
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी के लिए
पद्म भूषण से नवाजे गए बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर पांच सौ से ज़्यादा फ़िल्मों में काम कर चुके हैं.
न सिर्फ बॉलीवुड, बल्कि हॉलीवुड में भी अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके अनुपम खेर के फ़िल्मी करियर में फ़िलहाल इंटरवल चल रहा है.
उनके पास अभी हिंदी की कोई फ़िल्म नहीं है, हालांकि वो शुक्रवार को रिलीज हो रही फ़िल्म 'वन डे- जस्टिस डिलिवर्ड' में नज़र आ रहे हैं.
इस फ़िल्म में अनुपम खेर एक जज की भूमिका निभा रहे हैं. फ़िल्म में ईशा गुप्ता भी लीड रोल में हैं.
फ़िल्म के साथ-साथ राजनीति में अपनी दख़ल रखने वाले अनुपम खेर भारतीय जनता पार्टी का खुल कर समर्थन करते दिखते हैं.
अनुपम मानते हैं कि इन्हीं वजहों से उन्हें बॉलीवुड में अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है.
बीबीसी से बात करते हुए अनुपम खेर ने कहा, "ज़्यादा से ज़्यादा लोग क्या कर लेंगे? मुझे काम नहीं देंगे. मैं 99.9 फ़ीसदी लोगों के बीच लोकप्रिय हूं और उन 0.01 फ़ीसदी लोगों की ज़रूरत नहीं है, जो मुझे अलग-थलग करना चाहते हैं."
अनुपम खेर कहते हैं कि ये बचे लोग मुझे अपनी फ़िल्मों में कास्ट नहीं करते हैं. "लेकिन मैं भी उनसे काम थोड़े ही हूं, मेरा नाम हॉलीवुड के 10 प्रभावशाली नामों में शामिल है."
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'सच की राह में अकेलापन'
लोकसभा चुनावों से पहले अनुपम खेर 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' में दिखे थे. यह फ़िल्म पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल पर बनाई गई थी.
आलोचकों का कहना था कि यह फ़िल्म राजनीतिक एजेंडे से बनाई गई थी, ताकि लोकसभा चुनावों में भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फ़ायदा पहुंचाया जा सके.
हालांकि अनुपम खेर इन फ़िल्मों को एजेंडाधारी मानने से इंकार करते हैं.
वो कहते हैं, "सच की राह में बहुत अकेलापन है, लेकिन उसमें बहुत ताक़त होती है और मेरी सफलता इसका प्रमाण है."
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अमिताभ जैसा बनने की चाहत नहीं थी
फ़िल्म इंडस्ट्री में 35 साल पूरे कर चुके 65 साल के अनुपम खेर ने कई यादगार फ़िल्में दी हैं, उनमें से सारांश, डैडी, ए वेडनेसडे, खोसला का घोसला, स्पेशल 26, कर्मा, मैंने गांधी को नहीं मारा, जैसी फ़िल्में शामिल हैं.
अनुपम मानते हैं कि उनका फ़िल्मी सफ़र मे कई उतार-चढ़ाव आए पर वो निष्ठा और मेहनत से डटे रहे.
उन्होंने साफ़ किया कि वो हमेशा से ही अपनी अलग पहचान बनाना चाहते थे इसलिए उन्होंने 'सारांश' में 27 वर्ष के होते हुए भी 65 साल के बुज़ुर्ग का क़िरदार निभाया. उनकी कभी भी अमिताभ बच्चन या किसी और की तरह बनाने की चाहत नहीं थी.
बॉलीवुड में ऑफ़रों की कमी को अनुपम खेर अपने करियर का इंटरवल मानते हैं. वो इन दिनों अमरीकी सीरीज़ में काम कर रहे हैं.
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