You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
आर के स्टूडियो को संजोकर रखना बेवक़ूफ़ी होती: रणधीर कपूर
- Author, मधु पाल
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता, निर्देशक और निर्माता दिवंगत राज कपूर की ज़िंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए. उन्हें भारतीय सिनेमा में शो मैन के नाम से जाना जाता था.
महाराष्ट्र की राजधानी और सपनों का शहर कहे जाने वाले मुंबई में उनके नाम पर रखा गया आर के स्टूडियो काफ़ी मशहूर है. मुंबई के चेंबूर इलाक़े में दो एकड़ में फैला आरके स्टूडियो अब ख़त्म हो गया है.
अगर आप अब कभी मुंबई दर्शन के लिए चेंबूर जाएंगे तो हो सकता है वहां आपको आरके स्टूडियो नहीं बल्कि ऊंची-ऊंची इमारत दिखाई दे.
70 साल से भी ज़्यादा पुराने इस स्टूडियो का नामोनिशां धीरे-धीरे अब मिट रहा है. इस स्टूडियो को गोदरेज समूह की रिएलिटी फ़र्म गोदरेज प्रॉपर्टीज ने ख़रीद लिया है और वे यहां पर बड़ी-बड़ी इमारत बनाने जा रही है.
हाल ही में कंपनी ने इसकी जानकारी मीडिया को दी लेकिन इसकी क़ीमत के बारे में नहीं बताया गया है.
गोदरेज प्रॉपर्टीज का कहना है कि वह लग्ज़री फ्लैट बनाने और रीटेल स्पेस के लिए स्टूडियो की ज़मीन का इस्तेमाल करेंगे. इसके लिए 33,000 वर्ग मीटर ज़मीन काम में ली जाएगी.
राज कपूर के बेटे और भारतीय सिनेमा के अभिनेता, निर्देशक और निर्माता रणधीर कपूर कहते हैं कि इस तरह आरके स्टूडियो का ख़त्म होना हमारे परिवार के लिए बहुत दुखद है.
पुरानी यादों का घर था आरे के स्टूडियो
15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के ठीक एक साल बाद 1948 में राजकपूर ने आर के स्टूडियो की स्थापना की थी. उन्होंने पहली फ़िल्म 'आग' बनाई थी.
इन फ़िल्मों का सिलसिला चलता रहा और देखते ही देखते उन्होंने ऐसी ही कई यादें और भारतीय सिनेमा पर अपनी पहचान की छाप 'बरसात', 'आवारा', 'बूट पॉलिश', 'श्री 420', 'जागते रहो', 'मेरा नाम जोकर', 'सत्यम शिवम सुंदरम', 'बॉबी', 'प्रेम रोग', 'राम तेरी गंगा मैली हो गई' जैसी फ़िल्मों से छोड़ दी.
ये भी पढ़ें- जहाँ रिलीज़ से पहले राज कपूर करते थे हवन
आरके स्टूडियो में फ़िल्में बनाने का सिलसिला सिर्फ़ राजकपूर तक ही सीमित नहीं था. रणधीर कपूर ने भी इस सिलसिले को जारी रखा. उन्होंने फ़िल्म 'कल आज कल' से इस परंपरा को आगे बढ़ाया जिसके बाद दो और फ़िल्म 'धरम करम' और 'हीना' बनाई.
राज कपूर के दूसरे बेटे राजीव कपूर ने 'प्रेम ग्रन्थ' और ऋषि कपूर ने 'आ अब लौट चले' बनाई. भाइयों के लिए सालों तक इस धरोहर को संभालना और अचानक उसे बेच देना आसान नहीं था.
रणधीर कपूर कहते हैं, ''आर के स्टूडियो राज कपूर जी की वजह से ही था. वहां की सिर्फ़ ज़मीन ही नहीं वहां की हर तस्वीर, हर फ़िल्म उन्हीं के ज़रिए बनाई गई थी. हम तीनो भाइयों ने अपना करियर आरके स्टूडियो से शुरू किया. कई फैंस की तरह हमारे लिए भी ये एक मंदिर था, बचपन से लेकर अब तक यहां से हमारी कई यादें जुड़ी हैं, जो आख़िरी सांस तक हमारे साथ रहेगी.
ये भी पढ़ें- पेशावर में राज कपूर का घर गिराए जाने से बचाया
जब कपूर परिवार पर लगा था स्टूडियो जलाने का आरोप
अपने पुराने दिनों को याद करते हुए रणधीर कपूर थोड़े भावुक हो जाते हैं. वे कहते हैं कि दो साल पहले 16 सितम्बर 2016 को हमारा सब कुछ जलकर राख हो गया था.
वो कहते हैं वहां हमारी कई यादगार अमानत थी जिनका अब नामोंनिशां नहीं रहा जिनमें कई दुर्लभ तस्वीरें, यादगार फ़िल्मों के पोस्टर, अभिनेता और अभिनेत्रियों के कॉस्ट्यूम्स, जूलरी, 'मेरा नाम जोकर' का क्लोन मास्क, फ़िल्मों से जुडी कई चीज़े थीं. अगर आग नहीं लगती तो हम सभी भाई उसे बेचने के बदले फिर से बनाने के बारे में सोचते.
हालांकि जब उनसे बीबीसे ने पूछा कि आग लगने के बाद भी एक और कोशिश की जा सकती थी. उनसे ये भी पूछा गया कि इसे जलाने का आरोप ख़ुद कपूर परिवार पर लगाया जाता है.
वे कहते हैं कि कई लोग मानते हैं कि ये आग हमने ही लगाई है जबकि इसके साथ हमारी हंसी, बचपन सब जुड़ा हुआ था. पहले यहां इसके अलावा भी पांच छह स्टूडियो थे.
कई कलाकारों का जमावड़ा लगा रहता था. लेकिन अब सब बंद हो चुके हैं और सभी सितारे जुहू, अंधेरी और बांद्रा जैसे इलाक़ों में रहने लग गए हैं.
ये भी पढ़ें- फिल्म स्टूडियोज़ः कल चमन था, अब उजड़ा दयार!
वे कहते हैं, ''ट्रैफिक के कारण यहां कोई आना नहीं चाहता. अगर हम इस पर पैसा ख़र्च करके एक बार और बनवा भी देते तो ये हमारी बेवक़ूफ़ी होती. कई सालों से यहां फ़िल्मों की शूटिंग बंद हो गई है. हम कपूर परिवार ही अपनी तस्वीरें खिचवाते थे, शूटिंग के लिए कोई इतना दूर आता नहीं और इसमें हमारा ही नुक़सान होता. ऐसे में कुछ करवाकर कोई फ़ायदा नहीं होता.''
अपनी बातचीत में वे आगे बताते हैं कि एक समय ऐसा आया जब वहां राज कपूर घंटों बैठा करते थे. फ़िल्म मेरा नाम जोकर फ्लॉप हो गई थी. इसकी वजह से राज कपूर साहेब बहुत दुखी थे. इससे वे काफ़ी निराश थे और वहीं दिन भर बैठा करते थे.
रणधीर बताते हैं कि क्या हुआ अगर आज आर के स्टूडियो नहीं है लेकिन हमारे पास आज भी आर के बैनर मौजूद है. इस बैनर तले और भी फ़िल्मे बनती रहेगीं.
वो कहते हैं कि वहां बिल्डिंग बनने जा रही है लेकिन स्टूडियो बिकने के बाद हम उस ज़मीन से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहते और न वहां कोई घर ख़रीदना चाहते हैं. ज़मीन बेच दी है लेकिन आज भी वहां की यादें मौजूद हैं. आरके का नाम हमारे बच्चे करिश्मा, करीना, रणबीर आगे बढ़ाएंगे, वो भी तो आरके की ही यादें हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)