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पाकिस्तानी मूल के ब्रितानी गायक ज़ायन मलिक नहीं मानते खुद को मुसलमान
पाकिस्तानी मूल के गायक ज़ायन मलिक का कहना है कि वे मुसलमान नहीं हैं.
"मैं खुद को मुसलमान नहीं मानता. मैं आध्यातमिक तौर पर मानता हूं कि ऊपरवाला है लेकिन मैं जहन्नुम में यक़ीन नहीं रखता. वोग मैगज़ीन को दिए इंटरव्यू में उन्होंने ये बात कही.
ज़ायन मलिक का ये बयान ऐसे वक्त आया है जब मीडिया में खबरें आ रही हैं कि वे और उनकी अमरीकी प्रेमिका जीजी हदीद फिर से एक हो गए हैं. जीजी हदीद ने हाल ही में उन दोनों की तस्वीर इंस्टाग्राम पर पोस्ट की है.
ज़ायन और हदीद मार्च में अलग हो गए थे.
ज़ायन जावेद मलिक 12 जनवरी 1993 को इंग्लैंड के यॉर्कशर में पैदा हुए थे. उनके पिता यासीर जावेद मलिक पाकिस्तान से थे और उनकी मां तृषा मलिक आयरलैंड से थीं.
हाल तक उनकी मां तृषा एक प्राइमरी स्कूल में मुसलमान बच्चों के लिए खाना बनाने का काम करती रहीं थीं.
उनकी मां ने बताया, "ज़ायन ने मुझसे कहा कि मुझे अब ये सब करने की ज़रूरत नहीं और अब वो ही मेरी तनख्वाह बैंक में डालता है."
"हमारे पास घर खरीदने के लिए कभी पैसा नहीं था. ज़ायन के हमारे लिए घर खरीदने से पहले हम किराये के घर में ही रहते आए हैं."
उन्होंने बताया कि ज़ायन की बहनों ने ज़ायन की तरह कला क्षेत्र नहीं अपनाया.
ज़ायन ने संगीत की दुनिया में अपने करियर की शुरुआत एक्स फैक्टर कार्यक्रम के ज़रिए की, लेकिन वे इससे बाहर भी हो गए थे.
वन डायरेक्शन से हुए मशहूर
इसके बाद वह मशहूर बैंड वन डायरेक्शन में शामिल हुए लेकिन 25 मार्च 2015 को वे इससे अलग भी हो गए क्योंकि एक सोशल नेटवर्किंग साइट के मुताबिक वह एक सामान्य जीवन जीना चाहते थे.
बैंड से अलग होने के बाद उन्होंने जनवरी 2016 में अपनी एकल सीडी 'टॉकिंग पैड' निकाली.
फिर 2017 की शुरुआत में उन्होंने गायिका टेलर स्विफ़्ट के साथ एक गाना रिलीज़ किया जिसे '50 शेड्स ऑफ़ ग्रे' फ़िल्म में इस्तेमाल किया गया था.
ज़ायन को दीवारों पर चित्र बनाने, उनके मेडिटेशन और टैटू प्रेम के लिए भी जाना जाता है. उन्हें पानी से डर लगता है और इसलिए उन्हें तैराकी भी नहीं आती है.
इस्लाम छोड़ने की बात पर ज़ायन कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि मुझे मांस खाने की ज़रूरत है. मुझे नहीं लगता कि किसी भाषा में मुझे दिन में पांच बार प्रार्थना करने की ज़रूरत है."
उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने इस्लाम छोड़ने पर उनका विरोध नहीं किया और साथ ही इस्लाम से उन्होंने सीखा है कि उन्हें अपना चुनाव करने की आज़ादी है.
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