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विवादों से ख़तरे में ‘क्वीन’ कंगना का करियर?
- Author, राखी शर्मा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
एक्ट्रेस कंगना रनौत ने कभी कहा था कि उन्हें इंडस्ट्री में किसी ख़ान (शाहरुख, सलमान या आमिर) की ज़रूरत नहीं है. वो किसी स्टार के पीछे खड़ी होकर शोहरत हासिल नहीं करना चाहतीं.
2006 में गैंगस्टर से लेकर उनकी आखिरी रिलीज़ 'सिमरन' तक उन्होंने लम्बा और विवादों से भरा सफ़र तय किया है.
कंगना इन दिनों फिर चर्चा में है अपनी फ़िल्म 'मणिकर्णिका- द क्वीन ऑफ़ झांसी' को लेकर. एक्टर सोनू सूद ने हाल ही में मणिकर्णिका ये कहते हुए छोड़ दी कि कंगना में निर्देशक के तौर पर 'योग्यता' की कमी है.
मणिकर्णिका के निर्देशक कृष के किन्हीं वजहों से ये फ़िल्म छोड़ने के बाद इसके कुछ हिस्सों को निर्देशित करने की ज़िम्मेदारी कंगना उठा रही हैं.
पिछले कुछ सालों में कंगना ने बॉलीवुड में तेज़ी से कई 'विरोधी' बनाए हैं जिनमें सोनू सूद का नाम हाल ही में जुड़ा है.
कहीं अकेली न पड़ जाएं कंगना?
फ़िल्म क्रिटिक अर्नब बैनर्जी का मानना है कि अगर कंगना इतनी ही तेज़ी से दुश्मन बनाती गईं तो फ़िल्म मेकिंग ऑर्ट में वो अकेली रह जाएंगी.
''कंगना बहुत तेज़ी से कॉन्ट्रोवर्सी में घुसती चली जा रही हैं. उन्हें इन पर थोड़ा लगाम देने की ज़रूरत है. अगर वो सीरियस फ़िल्में करना चाहती हैं, आमिर ख़ान की तरह साल में सिर्फ़ एक ही फ़िल्म करना चाहती हैं और फ़िल्म के हर डिपार्टमेंट में वो दख़्लअंदाज़ी भी करना चाहती हैं तो वो ख़ुद अपनी फ़िल्में प्रोड्यूस करें और उसी तरह के एक्टर्स चुनें.''
'इसके लिए अभी उन्हें बहुत ज़्यादा सीखना पड़ेगा. आप अगर मणिकर्णिका जैसी इतनी बड़ी फ़िल्म बना रही हैं तो उसके लिए बहुत रिसर्च और एक्सपीरियंस की ज़रूरत है.''
फ़िलहाल तो कंगना के पास काम की कमी नहीं है. किसी भी ए लिस्टर की तरह उनके पास 3-4 फ़िल्में हैं. मणिकर्णिका के बाद वो राजकुमार राव के साथ 'मेंटल है क्या' नाम की फ़िल्म कर रही हैं. इसके अलावा उनके पास डायरेक्टर अश्विनी अय्यर तिवारी की भी एक फ़िल्म है जिसमें वो एक कबड्डी प्लेयर बनी हैं.
अर्नब कहते हैं, ''फ़िल्ममेकिंग एक टीम वर्क है. अगर आप इसी तरह लोगों से दूर होती जाएंगी तो इसका असर आपके और सामने वाले के काम पर पड़ेगा. फिर लोग आपको अवॉइड भी करने लगेंगे.''
बनाती रही हैं दुश्मन
कंगना ने पिछले साल करन जौहर को उन्हीं के शो पर मूवी माफ़िया और अपनी फ़िल्मों के ज़रिए नेपोटिज़्म को बढ़ावा देने वाला कहा था. इसके बाद करन जौहर और उनके कई क़रीबियों ने उनसे दूरी बढ़ा ली.
इंडस्ट्री में रुतबेदार लोगों से दुश्मनी का किसी एक्टर के करियर पर कितना असर पड़ता है, इस पर रेस सिरीज़, एंटरटेनमेंट और अजब प्रेम की गज़ब कहानी जैसी फ़िल्मों के प्रोड्यूसर रमेश तौरानी कहते हैं, ''कॉन्ट्रोवर्सीज़ से एक्टर के चयन पर असर नहीं पड़ता. उसकी काबिलियत ही उसकी पहचान होती है. विवाद चाहे जो हो, अगर कोई एक्टर हमारे दिए रोल में फिट बैठता है तो हम उसे ही लेते हैं.''
वहीं फ़िल्म क्रिटिक अजय ब्रह्मात्मज इससे इत्तेफ़ाक नहीं रखते. किसी का नाम लिए बिना वो कहते हैं, ''इंडस्ट्री में ऐसे दो प्रभावशाली तबके हैं जो गुटबाज़ी का काम खुलेआम करते हैं. वो लोग बाहर तो इंडस्ट्री के एक परिवार होने की बात करते हैं जो एक ही घर में रहता है, लेकिन इस घर के अंदर दीवारें अलग-अलग हैं.''
कहीं 'बाहरी' होने की सज़ा तो नहीं
कंगना तीन बार नेशनल अवॉर्ड जीत चुकी हैं जो उन्हें कमल हासन, नाना पाटेकर और नसीरुद्दीन शाह जैसे एक्टर्स की श्रेणी में खड़ा करता है. फिर क्या वजह है कि कंगना के पास विवाद खिंचे चले आ रहे हैं.
अजय ब्रह्मात्मज कहते हैं, ''कंगना ने जैसा भी हो, अपना करियर ख़ुद गढ़ा है. इंडस्ट्री के बाहर से आई लड़की होने की वजह से उसके संघर्ष की मात्रा दोगुनी हो जाती है. ऐसे में होता ये है कि जब भी कोई बाहर से आया व्यक्ति जिसे आप दुत्कारने की कोशिश करते हैं, वो ज़्यादा आक्रामक हो जाता है. आक्रामक होने के बाद उससे कुछ ग़लतियां भी हो जाती हैं. यही ग़लतियां कंगना से भी होती रही हैं.''
ऐसे में क्या ये मान लिया जाए कि कंगना का करियर ढलान पर है, अजय कहते हैं, ''उनका करियर ख़तरे में है ये अभी नहीं कहा जा सकता. मणिकर्णिका उनके करियर के लिए अहम फ़िल्म है. इसके नहीं चलने से उनका नुकसान ज़रूर होगा. हमने ये देखा है कि बड़े एक्टर्स की दो-चार फ़िल्में ना चलने से उनकी मार्केट वेल्यू पर थोड़ा असर ज़रूर होता है, लेकिन किसी नई फ़िल्म के सफ़ल होते ही वो वापस अपनी जगह हासिल कर ही लेते हैं. ऐसा अक्षय कुमार, करीना कपूर और अजय देवगन जैसे कलाकारों के साथ भी हो चुका है. कंगना को काम मिलना बंद हो जाएगा, फ़िलहाल ऐसा नहीं लगता.''
कंगना आजकल 'मणिकर्णिका- द क्वीन ऑफ झांसी' के कुछ हिस्सों को रीशूट करने में वयस्त हैं. ये फ़िल्म अगले साल जनवरी में रिलीज़ होगी.
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