जावेद अख़्तर से लोग गाने क्यों नहीं लिखवाना चाहते?

गीतकार और लेखक जावेद अख़्तर अक्सर नाराज़ हो जाते हैं, कभी ग़लत उर्दू या हिंदी बोलने की बात पर, तो कभी इस दौर के संगीत को लेकर.

हाल ही में उनकी नई फ़िल्म पलटन के एक इवेंट पर उन्होंने फिर से अपनी नाराज़गी जताई.

उन्होंने कहा, "कुछ लोग कहते हैं कि जावेद अख़्तर से गाने मत लिखवाया करो, वो गानों में शायरी लिख देते हैं. गानों में शायरी मांगने वाले बहुत कम हो गए हैं. अगर गाने के बोल में कुछ मतलब या गहराई है तो ये उनके लिए ख़तरे की बात हो जाती है."

"कुछ फिल्म मेकर, जो अपने गानों में अब भी गहराई चाहते हैं, उनमें से एक हैं जेपी दत्ता."

दरअसल नई फिल्म पलटन में जावेद अख़्तर और जेपी दत्ता एक साथ काम कर रहे हैं. जेपी दत्ता फ़िल्म के कहानीकार हैं, जबकि गानों के बोल जावेद अख़्तर ने लिखे हैं. म्यूजिक दिया है अनु मलिक ने.

ये तिकड़ी पहले भी कई फ़िल्मों में काम कर चुकी है.

1997 में आई जेपी दत्ता की फ़िल्म बॉर्डर में भी जावेद अख़्तर ही गीतकार थे और अनु मलिक ने संगीत दिया था. 21 साल बाद बॉर्डर की यह टोली, पलटन लेकर आ रही है, जो 7 सितंबर को रिलीज़ होगी.

बॉर्डर फ़िल्म के "संदेशे आते हैं" और "तो चलूं" गाने दर्शकों के बीच खासे लोकप्रिय हुए थे. इन गानों को लोग आज भी उतने ही चाव से सुनते हैं, जितना 1997 में सुना करते थे.

आज-कल के गानों पर अख़्तर की हैरानी

जावेद अख़्तर ने आज-कल के गानों पर हैरानी जताई है. वो कहते हैं कि आज-कल के गीतों को गीत कहा भी जाए या नहीं.

जावेद कहते हैं, "आज-कल के गानों में सिंगर की आवाज़ और ऑर्केस्ट्रा, ड्रम, गिटार और तबले की आवाज़ मिक्स होती है. ये सारे साधन आवाज़ के ऊपर बज रहे होते हैं, इससे सिंगर की आवाज़ कहीं नीचे दब जाती है. ऐसे में आवाज़ को कभी-कभी खोदकर निकालना पड़ता है और कभी तो निकाल भी नहीं पाते. अब जब आवाज़ ही सुनाई नहीं देती, तो शब्द अच्छे हैं या बुरे, किसे फर्क पड़ता है."

यंग जनरेशन को यही सब सुनना पसंद है, इस पर जावेद अख़्तर तंज कसते हुए कहते हैं, "अगर ऐसा है तो सिंगिंग रियालिटी शो में सब लता जी, रफ़ी, मुकेश, किशोर दा के गाने क्यों गाते हैं?"

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