You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
संजय दत्त पर बनी फ़िल्म 'संजू' को क्यों ना कहा था आमिर खान ने
- Author, सुप्रिया सोगले
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
सुपरस्टार आमिर ख़ान ने निर्देशक राजकुमार हिरानी के साथ दो बड़ी सफल फ़िल्में '3 इडियट्स' और 'पी के' दी है.
राजकुमार हिरानी ने आमिर ख़ान को अपनी आगामी संजय दत्त की बायोपिक फ़िल्म "संजू" में सुनील दत्त का क़िरदार ऑफर किया था.
लेकिन आमिर ख़ान ने मना कर दिया क्योंकि वो संजय दत्त का किरदार निभाना चाहते थे.
अपने 30 साल के सफल करियर पर बीबीसी से रूबरू हुए आमिर खान ने 'संजू' फ़िल्म के ऑफर पर कहा, "राजू मेरे पास स्क्रिप्ट लेकर आए थे. वो चाहते थे की मैं दत्त सहाब (सुनील दत्त) का किरदार निभाऊं जो बहुत ही खूबसूरती से लिखा गया है क्योंकि ये एक पिता और बेटे की कहानी है. पर संजू का किरदार अविश्वसनीय है. एक अभिनेता के तौर पर मैंने राजू से कहा की संजय दत्त का रोल इतना कमाल का है कि उसने मेरा दिल जीत लिया है. तो इस फ़िल्म में मैं संजय दत्त के आलावा कोई और किरदार नहीं कर सकता, पर वो भी मैं नहीं कर सकता क्योंकि वो किरदार रणबीर कपूर कर रहा है."
आमिर ख़ान ने साफ़ किया कि कोई और किरदार उनसे होगा नहीं क्यूंकि संजय दत्त के किरदार ने उनका दिल जीत लिया है.
हालाँकि वो "संजू" फ़िल्म का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे है क्योंकि उन्हें यकीन है कि रणबीर कपूर ने बेहतरीन काम किया होगा, वो कमाल के अभिनेता है.
'आज स्टार बनना आसान है'
सुपरस्टार आमिर ख़ान का मानना है की आज के दौर में स्टार बनना आसान है.
आमिर याद करते हैं कि उस दौर में "क़यामत से क़यामत तक" फ़िल्म हिट होने के बावजूद वो जिन निर्देशकों के साथ काम करना चाहते थे उन्होंने उस दौरान फ़िल्में ऑफर नहीं की और अगर की भी तो छोटे किरदार दिए जिसमें उनकी दिलचस्पी नहीं थी.
उन निर्देशकों तक पहुँचने के लिए उन्हें लंबा समय लग गया. आमिर कहते हैं कि उस दौर में एक अभिनता को स्टार बनने के लिए अपने आप को बार-बार साबित करना पड़ता था जबकि आज के दौर में बहुत जल्दी स्टार बन जाते है.
अपने करियर के सबसे बुरे वक़्त को याद करते हुए आमिर खान ने बताया कि "क़यामत से क़यामत तक" के बाद उन्होंने 6 महीने में करीबन 8 से 10 फ़िल्में नए निर्देशकों के साथ साइन कर ली थी.
'घर आकर रोज़ रोया करता था'
पर शूटिंग के दौरान आमिर ख़ान को महसूस हुआ कि वो फ़िल्में उनके लिए सही नहीं है और वो दुखी हो गए. वो जो काम कर रहे थे उसमे उन्हें ख़ुशी नहीं मिल रही थी वो रोज़ घर आकर रोया करते थे और सोचते थे की वो क्या कर रहे है.
उनका ज़हन सवाल पूछता था कि क्या वो ये करने फ़िल्म इंडस्ट्री में आए थे? उन 10 फ़िल्मों में से जब फ़िल्में रिलीज़ होना शुरू हुई तो सभी फ्लॉप रही और उनका करियर भी गिरने लगा.
तब उन्होंने अपने आप से वादा किया कि वो उन्हीं फ़िल्मों का हिस्सा बनेंगे जिसमें वो पूरी तरह से सहमत होंगे और जिसमे उन्हें ख़ुशी मिलेगी.
फिर भले उनका करियर ख़त्म ही क्यों ना हो जाए. उनके इस फ़ैसले ने उन्हें नई हिम्मत और करियर को नई दिशा दी.
आमिर खान अपने 30 साल के फ़िल्मी सफ़र के लिए दर्शकों के बहुत आभारी है. आमिर मानते है कि उन्हें सम्मान और बहुत प्यार मिला है. दर्शकों के साथ उनके रिश्ते को वो सबसे ज़्यादा अहमियत देते है.
आमिर ख़ान अमिताभ बच्चन के साथ पहली बार रुपहले पर्दे पर अपनी आगामी फ़िल्म "ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान" में नज़र आएंगे जो दिवाली 2018 में रिलीज़ होगी.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)