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हाई हील्स: कब, कहाँ, कैसे बन गई फेवरेट
- Author, भूमिका राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
''अगर आप आदमियों से हील्स और ड्रेस पहनने के लिए सवाल-जवाब नहीं करते हैं तो आप मुझसे भी नहीं कर सकते.''
ट्विलाइट सागा (वही फ़िल्म जिसमें भेड़िए इंसानों का खून पीते हैं) की हीरोइन क्रिस्टीन स्टीवर्ट मंगलवार को बतौर ज्यूरी कांस फ़िल्म फ़ेस्टिवल में पहुंची थीं. जब वो रेड कार्पेट पर पहुंची तो खूबसूरत सिल्वर ड्रेस और ब्लैक हाई हील्स पहने हुई थीं. कुछ क़दम चलने के बाद जैसे ही सीढ़ियां शुरू हुईं उन्होंने हील्स उतार दीं.
उनका इस तरह हील्स उतारना कांस फ़िल्म फ़ेस्टिवल के 'नो फ़्लैट्स पॉलिसी' के विरोध में था.
हालांकि कांस फ़िल्म फ़ेस्टिवल में इस तरह का ये कोई पहला मामला नहीं है.
2015 में फ़िल्म प्रोड्यूसर वेलेरिया रिक्टर को हाई हील्स न पहनने की वजह से रोक दिया गया था. बाद में रिक्टर को अंदर जाने की अनुमति मिल गई थी. वेलेरिया की उनकी एक टांग नकली थी और इसीलिए उन्होंने हील्स के बजाय फ़्लैट्स पहन रखे थे.
सिर्फ़ कांस फ़िल्म फ़ेस्टिवल ही नहीं...
कुछ साल पहले लंदन में फाइनेंस कंपनी पीडब्ल्यूसी ने एक रिसेप्शनिस्ट को ऊंची एड़ी की सैंडल पहनने से मना करने पर ऑफ़िस से घर भेज दिया था. जिसके बाद उन्होंने एक मुहिम चलाई थी. जिस पर उन्हें दस हज़ार से ज़्यादा लोगों का समर्थन मिला था और सरकार को जवाब देना पड़ा था.
खूनी पैर...
एक ओर जहां ऐसे मामले हैं वहीं 2016 में एक तस्वीर वायरल हुई थी. कनाडा के एक रेस्टोरेंट में काम करने वाली एक महिला वेटर के खूनी पंजों वाली एक तस्वीर ने सोशल मीडिया पर विवाद को जन्म दिया था.
कहां से आए ये टिक-टॉक हाई हील्स?
हाई हील्स पहनने के कुछ अपने कायदे होते हैं. मसलन, हाई हील पहनकर गीली ज़मीन, पहाड़ या पथरीली सड़क पर आराम से नहीं चला जा सकता. ऐसे में ये साफ़ हो जाता है कि इन्हें किसी ख़ास मक़सद के लिए ही बनाया गया होगा.
ऊंची हील के जूतों को सदियों से घुड़सवारी के जूतों के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है. ईरान और पर्शिया में अच्छा घुड़सवार होना ज़रूरी था.
जब घुड़सावार दौड़ते हुए घोड़े से तीर का निशाना लगाता तो यही ऊंची हील उसे घोड़े के रकाब पर पकड़ देती थी. जब 1599 में पर्शिया के शाह अब्बास ने यूरोप में अपने राजदूत भेजे तो उनके साथ ये जूते यूरोप तक जा पहुंचे.
उस वक्त ऐसा माहौल बना कि मानो ये ऊंची हील के जूते ही पुरुषों को मर्द और दिलेर बना सकते हैं.
जैसे-जैसे ये शौक रईसों से आम लोगों में पहुंचा, रईसों ने अपने जूतों की हील को बढ़ाना शुरु कर दिया और इसी तरह ऊंची एड़ियों के जूतों का चलन आया.
फ्रांस के लूईस चौदंवें महान शासक थे लेकिन उनकी लंबाई सिर्फ पांच फुट चार इंच थी. उन्होंने 10 इंच की हील से अपनी ऊंचाई की कमी को पूरा किया.
आज भले ही ये हील बनाना आसान हो, उस जमाने में इस तरह की हील बनाना एक इंजिनियरिंग चुनौती थी. जब महिलाओं में पुरुषों सा दिखने का फैशन चला तो यही ऊंची हील महिलाओं और बच्चों की पसंद बन गया. महिलाएं पुरुषों की तरह दिखना चाहती थी और ये ऊंची हील के जूते उनकी इस चाहत को बखूबी पूरा कर रहे थे.
इस दौरान पुरुषों की हील कम होती चली गई और महिलाओं की हील ज्यादा ऊंची और गोलाइदार होती चली गई. महिलाओं के जूतों की नोक पैनी होती थी ताकि उनके पैर छोटे और पतले लगें.
1740 तक पुरुषों ने ऊंची हील का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था. 50 साल बाद ये ऊंची हील के जूते महिलाओं के पैरों से भी गायब हो गए.
19वीं सदी के मध्य में ऊंची हील के जूते वापस फैशन में लौटे. इस दौर में फोटोग्राफी महिलाओं की छवि और फैशन को निर्धारित कर रही थी.
उनकी तस्वीरों से ही ये मान्यता शुरु हुई कि ऊंची हील महिलाओं के उत्तेजक रुप को पेश करने के लिए अहम है और उसके बाद से हील का स्वरूप समय-समय पर बदलता रहा लेकिन उनका वजूद ख़त्म नहीं हुआ.
हाई हील्स और सेहत
आम मान्यता है कि हाई हील्स पहनना सेहत के लिए ख़तरनाक हो सकता है लेकिन बावजूद इसके महिलाएं बड़े शौक़ से इन्हें पहनती हैं.
द स्पाइन हेल्थ इंस्टीट्यूट के मुताबिक़ हाई हील्स पहनने से रीढ़ की हड्डी, कूल्हे, घुटने, एड़ी और पैर पर बुरा असर पड़ता है.
द सोसायटी ऑफ़ चिरोपोडिस्ट्स एंड पोडिएट्रिस्ट्स की एक रिसर्च के मुताबिक, हाई हील पहनने से गठिया (अर्थराइटिस) का ख़तरा बढ़ जाता है. जिसमें जोड़ों में दर्द और मांस-पेशियों में ख़िचाव की शिकायत हो जाती है.
पैर से जुड़ी समस्याओं के विशेषज्ञ और अर्थराइटिस पर रिसर्च करने वाले प्रोफ़ेसर एंथनी रेडमंड का कहना है कि रोज़मर्रा के लिए आगे से गोलाकार और दो से तीन सेंटीमीटर यानी एक इंच हील वाले फुटवियर पहनने चाहिए. साथ ही सोल ऐसे होने चाहिए जो झटके झेल सके.
द स्पाइन हेल्थ इंस्टीट्यूट के मुताबिक़ चलने या फिर खड़े रहने के लिए शरीर का संतुलित होना ज़रूरी है. हाई हील पहन लेने पर शरीर को संतुलन बनाने में मुश्किल होती है. हाई हील पहनने पर शरीर का ऊपरी हिस्सा बाहर की ओर आ जाता है. पीठ का निचला हिस्सा आगे आ जाता है, जिससे रीढ़ की हड्डी और कूल्हे का संतुलन बिगड़ जाता है. घुटनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और पिंडली पर खिंचाव बढ़ जाता है. साथ ही पंजों पर भी दबाव बढ़ जाता है.
आमतौर पर रीढ़ की हड्डी अंग्रेजी के अक्षर S के आकार की होती है लेकिन हाई हील पहनने पर यह आकार सामान्य नहीं रह पाता. ऐसे में पीठ दर्द या मांस-पेशियों में खिंचाव आ जाना बेहद सामान्य है.
अगर पहन रहे हैं तो किन बातों का ख़्याल रखें?
- बहुत लंबे समय तक हाई हील्स पहनने से परहेज़ करें.
- पैर की मांस-पेशियों से जुड़ी कसरत करते रहें. पहनने से पहले और उतारने के बाद, दोनों वक़्त.
- बहुत अधिक ऊंची एड़ी की सैंडिल पहनने से बचें.
- जब भी जूते या सैंडिल ख़रीदें कोशिश करें कि दोपहर के समय ही ख़रीदें क्योंकि इस दौरान पैर अपने सबसे बड़े आकार में होते हैं.
- प्वॉइंटेड हाई हील्स पहनने से बचें.
- हो सके तो हर रोज़ अलग-अलग शेप के जूते पहनें
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