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रक्षा बजट का दो फीसदी सैनिटरी पैड पर लगाया जाए: अक्षय कुमार
- Author, सुप्रिया सोगले
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
हिंदी फ़िल्मों के 'खिलाड़ी' कहे जाने वाले अक्षय कुमार बीते कुछ साल में देशप्रेमी और सामाजिक मुद्दों से जुडी फ़िल्मों का हिस्सा रहे हैं. 'टॉयलेट एक प्रेम कथा', 'एयरलिफ़्ट' और 'बेबी' जैसी फिल्में ऐसे ही कुछ उदाहरण हैं.
अब अक्षय कुमार महिलाओं के पीरियड्स के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए फ़िल्म 'पैड मैन' लेकर आ रहे हैं. लेकिन 50 वर्षीय अक्षय कुमार को ख़ुद पीरियड्स की पूरी जानकारी दो साल पहले 'पैड मैन' करने के दौरान मिली.
बीबीसी से रूबरू हुए अक्षय कुमार ने बताया,"जैसा बाकी घरों में होता है, मुझसे भी इस बारे में छिपाया गया था. मुझे भी नहीं मालूम था. जैसे जैसे बड़ा होता गया महिलाओं के मासिक धर्म के बारे में पता चलता गया."
अक्षय ने कहा,"ये कैसे होता है और उस दौरान उन्हें क्या करना चाहिए, हमारे हिंदुस्तान में 82 फीसदी महिलाओं को पता ही नहीं है."
'पूरी जानकारी दो साल पहले मिली'
अक्षय के मुताबिक, "उस दौरान देश में औरतें मिट्टी, पत्ते और राख का इस्तेमाल करती हैं जो बहुत शर्मनाक चीज़ है. इस सबके बारे में जानकारी मुझे दो साल पहले मिली और मुझे लगा इस तरह की फ़िल्म की ज़रूरत है."
यह फिल्म सस्ती पैड मशीन बनाने वाले अरुणाचलम मुरगुनाथम की कहानी से प्रभावित है. अक्षय कुमार का कहना है कि उनकी एक बात उनके दिल में घर कर गई. अरुणाचलम ने कहा था कि अगर देश की महिलाएं ताकतवर होंगी तो देश ताकतवर होगा.
आर बाल्की के डायरेक्शन में बनी फिल्म "पैड मैन" में अक्षय कुमार के साथ राधिका आप्टे और सोनम कपूर भी अहम भूमिका में हैं. फ़िल्म 26 जनवरी को रिलीज़ होगी.
'रक्षा बजट का दो फीसदी पैड्स के लिए लगे'
अक्षय सवाल उठाते हैं कि देश के रक्षा बजट पर हर साल इतना ख़र्च किया जाता है पर उसका क्या फायदा जब देश की महिलाएं ही सशक्त ना हो? वह कहते हैं कि रक्षा बजट का दो फीसदी हिस्सा महिलाओं को मुफ्त सैनिटरी पैड मुहैया कराने में लगाना चाहिए.
पीरियड्स के दौरान महिलाओं की स्थिति पर अक्षय कुमार ने कहा, "मैं इस बारे में बहुत पढ़ रहा हूं. हमारे देश में महिलाओं के वो पांच दिन नरक के समान होते है. इसलिए नहीं कि वो पीरियड्स से गुज़र रही है बल्कि उनके आस-पास के लोगों के व्यवहार की वजह से. उनके पास उचित स्वच्छता नहीं होती. उन्हें कई नियमों का पालन करना पड़ता है जैसे रसोई में नहीं जाना, घर से बाहर सोना, अचार को नहीं छूना, मंदिर से दूर रहना."
'पीरियड्स का जश्न '
ऐसे नियमों पर गुस्सा ज़ाहिर करते हुए वह कहते हैं, "शर्मनाक है कि स्कूल जाने वाली लड़कियों के कपड़े पर अगर दाग लग जाता है तो उन्हें छेड़ा जाता है. कई जगह पर इसे पांच दिन के टेस्ट मैच भी कहा जाता है."
अक्षय कुमार का कहना है कि शुरुआती उम्र में लड़कियों के पीरियड्स का जश्न बनाना चाहिए ताकि लड़कियां इससे हिचकिचाए नहीं और साथ ही उनका आत्मविश्वास बरक़रार रहे.
लगातार हिट फ़िल्में दे रहे अक्षय कुमार ने तय किया है कि उनकी हर फिल्म उनकी दूसरी फ़िल्म से अलग होगी. उन्होंने कहा कि फ़िल्म इंडस्ट्री में हिट फ़िल्म का कोई फॉर्मूला नहीं होता और किसी को पता नहीं होता कि कौन सी फ़िल्म चलेगी.
50 साल के अक्षय कुमार ने कहा कि वह जब तक दौड़ सकते हैं, फ़िल्मों में काम करते रहेंगे.
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