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पद्मावती के वंशज प्रसून जोशी से क्यों ख़फा हुए?
- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
संजय लीला भंसाली की बहुचर्चित फ़िल्म पद्मावती पर विवाद ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है. लगातार होते विरोध के दायरे में अब सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी भी आ गए हैं.
चितौड़ की रानी पद्मावती के वंशज और मेवाड़ के पूर्व राजघराने ने केंद्रीय सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी को निशाने पर लिया है. मेवाड़ के पूर्व राजघराने के प्रमुख महेंद्र सिंह मेवाड़ ने सेंसर बोर्ड पर उन्हें अंधेरे में रखने का आरोप लगाया है.
प्रसून पर आरोप
सिंह ने केन्द्रीय प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी को इस संबंध में एक पत्र लिखकर अपनी नाराज़गी व्यक्त की है. अपने पत्र में सिंह ने लिखा है, ''सेंसर बोर्ड ने फिल्म को हरी झंडी देने में जिस तरह से ज़ल्दबाजी में कदम उठाए हैं, उससे बोर्ड की साख़ पर ही सवाल खड़े हो गए हैं.
पत्र में आगे लिखा है,''पहले छह लोगों को फ़िल्म दिखाने की बात कही गई थी, लेकिन बोर्ड ने गैर ज़रूरी हड़बड़ाहट दिखाई और सिर्फ़ तीन लोगों को ही फ़िल्म का अवलोकन करवाया. बोर्ड ने इस रिव्यू के बाद यह माहौल बनाया कि जैसे इन तीन लोगों के पैनल ने फ़िल्म पर रज़ामंदी की मुहर लगा दी है, जबकि तथ्य इसके विपरीत हैं.''
सिंह कहते हैं कि उनके पुत्र विश्वराज सिंह ने केंद्रीय सेंसर बोर्ड को ख़त भेज कर फ़िल्म को लेकर कुछ सवालों का जवाब मांगा था, मगर बोर्ड ने इस ख़त को अनदेखा कर दिया.
नाम बदलकर रिलीज़ का सुझाव
महीनों तक चले विवाद, प्रदर्शनों, राजनीतिक बयानबाज़ी और फ़िल्म की रिलीज़ डेट को आगे बढ़ाए जाने के बाद आख़िरकार फ़िल्म पद्मावती को सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिल गई थी.
सेंसर बोर्ड ने फ़िल्म का नाम बदल कर 'पद्मावत' करने का सुझाव दिया साथ ही फ़िल्म के कई सीन काटने के भी आदेश दिए थे.
हालांकि इसके बाद भी फ़िल्म का विरोध करने वाली करणी सेना के संरक्षक लोकेंद्र सिंह कालवी ने कहा था कि वे पद्मावती के वंशज और राजघराने से जुड़े 6 अन्य लोगों की राय जानने के बाद ही अपने अगले कदम पर विचार करेगी.
क्या है विवाद?
वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स के बैनर तले बनने वाली फिल्म पद्मावती पर पिछले कई दिनों से विवाद चल रहा है. पद्मावती' का सारा विवाद रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के प्रसंगों को लेकर है.
राजस्थान के करणी सेना सहित कुछ और संगठनों का आरोप है कि भंसाली खिलजी के साथ रानी पद्मावती के प्रेम संबंधों पर फिल्म बनाकर राजपूतों की भावना को चोट पहुंचा रहे हैं.
पहले यह फ़िल्म एक दिसंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली थी, लेकिन सेंसर बोर्ड ने फिल्म को यह कहकर लौटा दिया था कि बोर्ड के पास भेजे गए आवेदन में तकनीकी खामियां थी. जिससे इसकी रिलीज़ में देरी की संभावना पैदा हो गई थी.