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वो 'विदेशी' जो हिंदी फ़िल्मों में आए और छा गए
फ़िल्म, टेलीविज़न और थियेटर जगत के दिग्गज अभिनेता टॉम ऑल्टर इन दिनों कैंसर से जूझ रहे हैं. जैसे ही ये ख़बर आई, मनोरंजन जगत में उनकी भूमिका और योगदान का ज़िक्र होने लगा.
वो उन चंद अभिनेताओं में शामिल हैं जो अंग्रेज़ जैसे दिखने के बावजूद भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपनी ख़ास जगह बनाने में कामयाब रहे.
'फ़िरंगी' लुक और तेज़ रफ़्तार हिंदी बोलने वाला ये एक्टर फ़िल्मों में जहां गंभीर रोल करता नज़र आया और तो वहीं 'ज़बान संभाल के' जैसे टीवी सीरियल में हल्की-फुल्की कॉमेडी भी.
विदेशी से देसी कैसे बने टॉम?
साल 1950 में मसूरी में जन्मे टॉम ऑल्टर के माता-पिता अमरीकी मूल के हैं और उनका मूल नाम थॉमस बीट ऑल्टर है. उनके दादा-दादी 1916 में अमरीका से भारत आए थे.
टॉम का परिवार पानी के रास्ते चेन्नई आया था और वहां से लाहौर गया. उनके पिता का जन्म सियालकोट में हुआ जो अब पाकिस्तान में है.
बंटवारे में उनका परिवार बंट गया. दादा-दादी पाकिस्तान में रह गए जबकि उनके माता-पिता भारत आ गए.
हिंदू और उर्दू में पारंगत ऑल्टर ने 'चरस' फ़िल्म से अपना सफ़र शुरू किया और शतरंज के खिलाड़ी, क्रांति जैसी फ़िल्मों से दर्शकों की निगाह में आए.
और कौन से गोरे एक्टर?
टॉम ऑल्टर के अलावा और भी ऐसे कुछ चेहरे हैं जो देखने में हिंदुस्तानी कतई नहीं लगते, लेकिन इसके बावजूद भारतीय फ़िल्मों में अपनी पहचान बनाने में सफल रहे.
हिन्दी फ़िल्मों में विदेशी किरदार अदा करने वाले कलाकारों का जब भी ज़िक्र होता है तो कई विदशी चेहरे आंखों के सामने उतर आते हैं. उनमें से कुछ प्रमुख कलाकार ये हैं -
बॉब क्रिस्टो
मिस्टर इंडिया फ़िल्म में भगवान हनुमान की मूर्ति जब गुंडों को सबक सिखा रही थी, तो अंग्रेज़ दिखने वाला एक शख़्स 'बजरंग बली की जय' कर रहा था. उसकी कॉमेडी कई लोग अब तक नहीं भूले.
ये बॉब क्रिस्टो थे. साल 1938 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में जन्मे क्रिस्टो का असल नाम रॉबर्ट जॉन क्रिस्टो था.
वे पेशे से सिविल इंजीनियर थे जो भारत काम करने आए थे, लेकिन परबीन बाबी से मुलाक़ात के बाद उन्होंने बॉलीवुड की दुनिया में क़दम रखने का मन बना लिया.
क्रिस्टो ने अमिताभ बच्चन से लेकर अनिल कपूर जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया. मिस्टर इंडिया में मिस्टर वॉलकॉट की भूमिका हो या फिर कालिया, नास्तिक, अग्निपथ जैसी फ़िल्मों में निभाए किरदार - इनके ज़रिए क्रिस्टो अपनी पहचान साबित करने में कामयाब रहे.
साल 1980 में अपनी पहली हिंदी फ़िल्म 'अब्दुल्ला' में वो जादूगर के रोल में नज़र आए और फिर क़रीब 200 से ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया. साल 2011 में दिल की गंभीर बीमारी के कारण बंगलुरु में उनका निधन हो गया.
बेन किंग्सले
अगर आपको बताया जाए कि फ़िल्म 'गांधी' में महात्मा गांधी का किरदार अदा करने वाला शख़्स भारतीय नहीं बल्कि अंग्रेज है, तो आप क्या कहेंगे.
साल 1943 में इंग्लैंड के उत्तरी यॉर्कशायर में बेन किंग्सले का जन्म हुआ था और उनका असली नाम कृष्ण पंडित भांजी है.
बेन किंग्सले के पिता गुजराती मूल के थे और मां इंग्लैंड की थी. दोनों इंग्लैंड में ही रहते थे.
बेन किंग्सले ने 1982 में आई फ़िल्म 'गांधी' में महात्मा गांधी का किरदार निभाया और इसी के साथा वे भारत में मशहूर हो गए.
इस फ़िल्म के लिए उन्हें बाफ्टा, गोल्डन ग्लोब पुरस्कार और ऑस्कर से नवाज़ा गया. साल 1984 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया.
बेन किंग्सले ने अंग्रेज़ी फ़िल्म 'द जंगल बुक' में बगीरा के किरदार को अपनी आवाज़ भी दी.
पॉल ब्लैकथॉर्न
अगर आपको आमिर ख़ान की लगान पसंद आई तो कैप्टन रसेल भी याद होंगे. ये किरदार अदा करने वाले अभिनेता का नाम है पॉल ब्लैकथॉर्न.
साल 1989 में इंग्लैंड में जन्मे पॉल ब्लैकथॉर्न का ये पहला फ़िल्मी रोल था और इस भूमिका के लिए उन्होंने क़रीब छह महीने हिंदी सीखी.
इसके बाद उन्होंने अमरीकी फ़िल्मों और टीवी शो का रुख़ किया. उनका ज़्यादातर बचपन इंग्लैंड और जर्मनी के सैन्य ठिकानों में गुज़रा था.
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