नेगेटिव रोल करना चाहती हैं रवीना

    • Author, सुप्रिया सोगले
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

नब्बे की दशक की चुलबुली हीरोइन रवीना टंडन ने दशक के अंत तक आते-आते अपनी छवि पूरी तरह से बदल दी है.

फ़िल्म "शूल" ने रवीना टंडन को गंभीर अभिनेत्री के श्रेणी में डाला पर उस समय फ़िल्म के निर्माता राम गोपाल वर्मा नहीं चाहते थे रवीना टंडन "शूल" फ़िल्म की हीरोइन बने.

बीबीसी से ख़ास रूबरू हुई रवीना टंडन ने बताया.,"राम गोपाल वर्मा कहते थे कि रवीना तुम्हें मैं 'अंखियों से गोली मारे' वाली छवि में ही देखता हूँ. पर शूल फ़िल्म के निर्देशक ई निवास की ज़िद्द थी फ़िल्म में रवीना ही हीरोइन होगीं जिससे राम गोपाल वर्मा काफ़ी नाराज़ थे."

उन्होंने बताया, "फ़िल्म की फोटो शूट में जब मैं सादी साड़ी पहलकर उनके ऑफिस पहुंची तो रामू ने लगभग मुझे अनदेखा कर दिया. मैं घबरा गई कि रामू मुझसे बहुत ख़फ़ा है पर फ़ोटो शूट के दौरान रामू को महसूस हुआ कि सादी साड़ी में मैं थी उन्हें यकीन ही नहीं हुआ. तब मुझे लगा की मैं गंभीर किरदार निभा सकती हूँ."

फ़िल्म दमन के लिए रवीना टंडन को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला.

बड़े पर्दे पर अलग अलग किरदार निभाने वाली रवीना टंडन की लालसा है कि वो बड़े पर्दे पर बेहद नकारात्मक भूमिका निभाए पर अभी तक उन्हें मौका नहीं मिला है.

अपने 25 साल के फ़िल्मी करियर में रवीना ने फ़िल्मों से कई अंतराल लिए जिसका उन्हें कोई अफ़सोस नहीं है.

वो कहती है,"मैं 60 साल की उम्र में पहुँचकर ये नहीं कहना चाहती कि मैंने सिर्फ़ फ़िल्म स्टूडियो के चक्कर काटे और ज़िन्दगी नहीं जी. फ़िल्म मेरी ज़िन्दगी का हिस्सा है मेरी ज़िन्दगी नहीं."

अपनी आगामी फ़िल्म "मातृ" में रवीना टंडन बलात्कार पीड़िता की माँ बनी है जो न्याय के लिए क़ानून की हदें पार करती हैं.

रवीना ने माना की भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रहे अपराधों में बढ़ोतरी हुई है और ये बहुत ही गंभीर मामला है पर अभी तक इन अपराधों के लिए सख़्त क़ानून नहीं आए हैं.

सामाजिक मुद्दों पर अक्सर टिप्पणी करने वाली रवीना टंडन को राजनीति से परहेज़ है.

उनका मनना है कि किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ जाने से उन्हें अपनी आवाज़ दबानी पड़ेगी.

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