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कामयाबी की खान, आमिर ख़ान
मंगलवार को आमिर ख़ान 52 साल के हो गए. इस साल अपने बर्थ डे पर मिस्टर परफेक्शनिस्ट के पास बड़े पर्दे से मिली फिल्म 'दंगल' की कामयाबी है और छोटे पर्दे पर 'नई सोच' के साथ चलने की कहानी भी.
'दंगल' में आमिर ने पहलवान महावीर फोगट की बेटियों के संघर्ष की कहानी बयां की तो एक निजी टीवी चैनल के लिए बेटों की तरह बेटियों की कामयाबी की नई सोच का समर्थन भी किया.
वो आमिर जिनको साल 2015 में असहिष्णुता पर अपने बयान की वजह से आलोचना झेलनी पड़ी आज फिर कामयाबी और नई सोच ने उन्हें लोगों का चहेता बना दिया.
उनकी फिल्म थ्री इडियट्स का डायलॉग उनपर बिल्कुल फिट बैठता हैं ' क़ाबिल बनो कामयाबी तुम्हारे पीछे दौड़ेगी.'
वो इतने क़ाबिल हैं कि जो करते हैं वो ख़ास लगता है. लेकिन वो जानते हैं कि क़ाबिलियत दिखाने के लिए प्रमोशन ज़रूरी है.
साल 2014 में आई फ़िल्म 'पीके' के बाद सुस्त पड़े आमिर ख़ान हरियाणा के छोटे शहरों के चौराहे पर टूटी-फूटी हरयाणवी बोलते देखे गए थे.
आमिर भिवानी के एक मध्यमवर्गीय परिवार की शादी में वधु पक्ष की तरफ से शरीक हुए. आमिर का 'फैट टू फिट' कैंपेन इन दिनों मीडिया की सुर्ख़ियों में रहा.
दरअसल आमिर ख़ान की सक्रियता में ही उनकी कामयाबी का राज़ छुपा है. इसी सक्रियता को बॉलीवुड में 'प्रमोशनल फंडा' माना जाता है. जिसमें आमिर ख़ान अपने काम की तरह ही एकदम परफेक्ट माने जाते हैं.
ऐसा लगता है कि प्रमोशन के इन पैंतरों पर आमिर को इतना यक़ीन है कि इसके लिए वो किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहते हैं.
हर फ़िल्म के लिए आमिर अलग-अलग स्ट्रेटजी बनाते हैं, जो एकदम नई और प्रभावी होती है. वो हमेशा इसे वनमैन शो के स्टाइल में अमली जामा पहनाते हैं.
19 दिसंबर, 2014 को रिलीज़ हुई फ़िल्म 'पीके' को प्रमोट करने के लिए आमिर ने भोजपुरी सीखी थी. फ़िल्म के फर्स्ट लुक के साथ ही जारी किए गए मोशन पोस्टर में आमिर भोजपुरी बोलते हुए दिखाई दिए.
आमिर ने इस बात को लेकर और अधिक उत्सुकता बढ़ाने के लिए अपने ट्विटर अकाउंट पर भोजपुरी में ही मैसेज लिखने भी शुरू कर दिए थे, जिससे दर्शकों में उनके फ़िल्म 'पीके' के प्रति उत्सुकता बने.
फ़िल्म के प्रमोशन के लिए आमिर खान ने पुतलों का इस्तेमाल किया था, जो थियटर्स में रखे गए और जब इन पुतलों के पास दर्शक गए तो आमिर उनसे भोजपुरी में बात करते दिखे. दरअसल, इन पुतलों में आमिर की रिकॉर्डिड आवाज़ थी.
फ़िल्म 'धूम 3' के प्रमोशन के दौरान शुरुआत में आमिर गायब नज़र आए. इसे उनके और यशराज फ़िल्म्स के बीच तनाव के रूप में पेश कर मीडिया में हाइप बनाया गया. क्लाइमैक्स पर पर्दा उठा और तीसरे राउंड के प्रमोशन से जब आमिर हर छोटे-बड़े सेंटर पर पब्लिक से रूबरू हुए तो उनके आने की ख़बर यकीनन मीडिया में खूब हॉट रही.
इससे फ़िल्म लगातार चर्चाओं में बनी रही और फ़िल्म को जबरदस्त कामयाबी मिली. यह सब आमिर खान की प्लानिंग का एक हिस्सा भर था. फ़िल्म 'पीपली लाइव' को प्रमोट करने के लिए आमिर ने तब मंहगाई से जूझ रही जनता के सामने इस फ़िल्म का गाना 'मंहगाई डायन खायत जात है...' के ओरिजनल सिंगर्स को इंट्रोड्यूज करने के अलावा मॉल्स और कई अन्य जगहों पर लाइव परफॉरमेंस करवाए.
इतना ही नहीं आमिर ने खुद इस फ़िल्म के प्रमोशन के दौरान ड्रम बजाकर भी मीडिया और दर्शकों को अट्रेक्ट किया. 'गजनी' की रिलीज़ से पहले आमिर ने तमाम गंजों की फौज के साथ अपनी फ़िल्म का प्रमोशन किया.
फ़िल्म के प्रमोशन के लिए सड़कों पर उस्तरा लेकर भी घूमे और अपने कुछ फैन्स का 'गजनी हेयरस्टाइल' बनाकर अखबारों में खूब सुर्खियां बटोरी. पूरी बॉडी पर टैटू लगाए गए पोस्टर देख दर्शक पहले ही उत्साहित थे और जब आमिर ने इसमें अपनी मार्केटिंग प्लानिंग मिक्स कर ली तो यह फिल्म बंपर हिट रही.
फिल्म 'थ्री इडियट्स' के प्रमोशन के दौरान आमिर की व्यवसायिक सोच अपने चरम पर दिखी. आमिर इस फ़िल्म के प्रमोशन के दौरान बहुरूपिया का रूप धारण कर ऑटो रिक्शे से घूमते नज़र आए, तो कभी गांव के स्कूलों में बच्चों के बीच चाय लेकर पहुंच गए.
फ़िल्म रिलीज़ होने से पहले आमिर ख़ान अलग-अलग गेटअप में देश के अलग-अलग शहरों में घूमे. आमिर ख़ान का गेटअप वाकई इतना नया और बनावटी था कि कोई उन्हें पहचान ही नहीं पाया.
फ़िल्म 'मंगल पांडे' की रिलीज़ से पहले जो इंटरव्यू हुए, उनमें आमिर ख़ान ने सभी जर्नलिस्ट्स से उनकी मूंछें खींचने के लिए कहा, ताकि वो चैक कर सकें कि ये असली हैं या नकली. इस तरह की छोटी-छोटी लेकिन अट्रेक्टिव मार्केटिंग स्ट्रैटजी से आमिर अपनी फ़िल्मों की हाइप बढ़ाते रहे.
आमिर ख़ान फ़िल्म 'तलाश' के लिए मुंबई के क्राइम रिपोर्टर से मिले थे. जहां उन्होंने क्राइम रिपोर्टिंग की फील्ड में होनेवाली दिक्कतों को साझा किया. साथ ही क्राइम रिपोर्टर्स से बारे में जानकारी ली.
फ़िल्म 'लगान' के लिए आमिर ने जो मार्केटिंग फंडा अपनाया उससे सब दंग रह गए थे. 'लगान' के प्रमोशन में आमिर लगान के सभी मुख्य किरदारों के साथ फ़िल्म में अपनाए गए गेटअप में ही विभिन्न मॉल्स और सार्वजनिक जगहों पर पहुंचे.
इतना ही नहीं पूरी टीम ने मॉल में 'लगान' फ़िल्म में अपनाए गए अपने-अपने गेटअप में ही क्रिकेट भी खेला. यह देखकर निश्चित था कि पब्लिक फ़िल्म से कनेक्ट होती चली गई और आमिर की यह मार्केटिंग स्ट्रेटजी काम कर गई.
इतना ही नहीं आमिर ने 'लगान' की रिलीज़ से पहले क्रिकेट की दुनिया के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को फ़िल्म दिखाकर भी तब खूब सुर्खियां बटोरीं थी. बॉलीवुड में फ़िल्म प्रमोशन फ़िल्म की लागत का ही हिस्सा माना जाता है और इस पर भारी-भरकम रकम भी ख़र्च की जाती है, लेकिन आमिर की सोच अलग है.
फ़िल्म के वरिष्ठ समीक्षक अजय ब्रह्मात्मज के मुताबिक, "फ़िल्म की मेकिंग पर आमिर का जितना ध्यान होता है, उससे कई ज़्यादा ध्यान वो फ़िल्म के प्रमोशन पर देते हैं. आमिर ने फ़िल्म प्रमोशन के लिए एक ख़ास टीम बना रखी है. जिसमें मार्केटिंग, मीडिया और स्ट्रेटेजी से जुड़े लोग शामिल हैं. आमिर की स्ट्रेटेजिकल समझ ही उनकी फिल्मों को ख़ास बना देती है."
आमिर की फिल्मों की मार्केटिंग एजेंसी "स्पाइस" की प्रमुख शिल्पा हांडा के मुताबिक़, "यह पूरी स्ट्रेटेजी ज़्यादातर आमिर के ही दिमाग की उपज होती है, जिसे हम हर संभव तरीके से जमीनी स्तर पर लाने की कोशिश करते हैं. कभी-कभी हम अपना आइडिया भी उनसे शेयर करते हैं, लेकिन उन्हें पसंद आने या ना आने पर निर्भर करता है."
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